ऑनलाइन शिक्षा के लाभ और हानि

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

ऑनलाइन शिक्षा को सीधे एवम् सरल शब्दों में घर बैठे इंटरनेट आधारित शिक्षा व्यवस्था कहा जा सकता है,इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अर्थात कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन और टेबलेट के माध्यम से पढ़ने वाला सरल एवम् सुलभ व्यवस्था।

स्कूल या कॉलेजों में जाकर ऑफलाइन शिक्षा ग्रहण करने की बजाय इन्टरनेट के माध्यम से घर बैठे शिक्षा प्राप्त करने को ऑनलाइन शिक्षा कहते है।

छात्र जीवन में ऑनलाइन शिक्षा आज बहुत महत्वपूर्ण विषय बन गई चुकी है, क्योंकि आज किसी कारणवश स्कूल,कॉलेज बंद रहे तो इस समय ऑनलाइन शिक्षा ही शिक्षा प्राप्त करने का सबसे अच्छा और सुलभ साधन है।

जिस प्रकार कोविड महामारी के समय में ऑनलाइन शिक्षा ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है उसी प्रकार हर समय ऑनलाइन शिक्षा हमारे लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है।

ऑनलाइन शिक्षा हम देश के किसी भी भाग में बैठकर पढ़ सकते है, और अपने शिक्षक से हर एक प्रश्न के विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते है।

ऑनलाइन शिक्षा हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है, ऑनलाइन शिक्षा हम कम पैसों के खर्च करके आसानी से प्राप्त कर सकते है, जिसके कारण अधिक विद्यार्थी और अभिभावक ऑनलाइन शिक्षा को पसंद कर रहे है।

इस नई शिक्षा व्यवस्था ने समय और दूरी के बच्चों को आजाद कर दिया है। बच्चे जहाँ चाहे वहां बैठकर लाइव या रिकार्डेड लेक्चरर की मदद लेकर पढ़ सकते हैं।

Covid-19 के विश्वव्यापी विकट समय में जब देश विदेशों के सभी सरकार ने समस्त स्कूलों एवं शिक्षण संस्थाओं को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया तो भारत समेत अन्य देशों में भी ऑनलाइन शिक्षा को ही भरपूर प्रोत्साहन मिला।

हालांकि ऑनलाइन शिक्षा की यह परिकल्पना कोई नई नहीं हैं, कई सालों से यूट्यूब और अन्य एप्स पर विभिन्न प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह शिक्षा काफी लंबे समय से दी जा रही थी, मगर इसे उतना गम्भीरता से कभी नहीं लिया जाता था।

लेकिन सम्पूर्ण लॉकडाउन के वजह से ऑनलाइन शिक्षा का प्रसार बहुत तेजी से हुआ,इसके बहुत तेजी से प्रसार के पीछे एक कारण यह भी है की आजकल अधिकतर बच्चों और उनके अभिभावकों के पास स्मार्टफोन मौजूद है। इस कारण यह अभिभावकों और बच्चों दोनो के लिए शिक्षा का लोकप्रिय माध्यम भी बन गई हैं। इस माध्यम से शिक्षक इंटरनेट के द्वारा विश्व के किसी भी स्थान से बैठकर बच्चों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उन्हे पढ़ा सकते हैं।

 

ऑनलाइन शिक्षा के लाभ,

विभिन्न प्रकार के सर्द,गर्म,लू,बारिश वाले मौसम, घरेलू परिस्थतियाँ, हाउसवाइफ या शारीरिक अपंगता जैसी बाधाओं से विद्यार्थी की शिक्षा प्रभावित नहीं होती हैं।

नियमित रोजाना के आवागमन में जो बाधाएं उत्पन्न होती है उसके खत्म हो जाने से समय और खर्च की बचत भी अच्छे तरीके से हो जाती है।

विद्यालय के लिए जरूरी संसाधनों एवं विभिन्न प्रकार के संभारतन्त्र की भी भरपूर बचत होती हैं।

पढाई से पूर्व की व्यवहारिक औपचारिकता में खर्च होने वाले समय को भी बचाया जा सकता हैं।

डिजिटल ऑफलाइन या ऑनलाइन भी डेटा को आसानी से सेव किया जा सकता हैं जिस कारण पूर्व में दिए गये लेक्चर को रिकॉर्डेड फॉर्म में किसी भी समय पुनः उपयोग किया जा सकता हैं।

 

ऑनलाइन शिक्षा के हानि,

सभी विद्यार्थीगण एक तरह के नहीं होते है उनमें अपने-अपने व्यापक स्तर पर अलग-अलग विविधताएं पाई जाती हैं,इसलिए स्क्रीन पर पढना या देखना हर बच्चे के लिए उतना भी सहज नहीं होता हैं। हार्डकॉपी की तुलना में स्क्रीन पर पढना कुछ बच्चों के लिए काफी कठिन हो जाता हैं.

ऑनलाइन शिक्षा के वजह से होने वाले में बच्चों के नेत्र, अंगुलियों तथा रीढ़ की हड्डी में आने वाली विकृति भी ज्यादा देर तक स्क्रीन पर देखते रहने के वजह से सामने आई हैं।

ऑनलाइन क्लासेस में  शिक्षक सभी बच्चों के साथ एक समय पर संवाद स्थापित नहीं कर पाते हैं, ऐसे में एक तरफे संवाद की स्थिति हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है।

ऑनलाइन तरीके से बच्चें के टैलेंट उनकी समझ व वीकनेस का परीक्षण सही रूप में नहीं किया जा सकता हैं।

यह माध्यम बच्चों को अधिक स्वतंत्रता देता हैं इसके कारण वह अपने मुताबिक कार्य करने लग जाते हैं, इससे अनुशासन की भावना बच्चें में विकसित नहीं हो पा रही हैं।

जब बच्चों को मोबाइल अथवा कोई और उपकरण दे

दिया जाता है तो उनकी मोनिटरिंग भी नहीं हो पाती हैं, वह क्या देखते हैं क्या करते हैं इत्यादि, आज के दौर में बच्चे को गलत दिशा देने वाले कंटेट की इंटरनेट साइटों पर कमी नहीं हैं, ऐसे में अभिभावकगण भी उन्हें स्मार्ट फोन देने से डरते हैं।

 

ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में सुधार के उपाय, 

जब भी कोई नई पद्धति प्रभाव में आती हैं तो दुष्प्रभावों से अछूत हो इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उसके उपयोग में लाने के बाद  हम नकारात्मक और सकारात्मक बिन्दुओं को पहचान कर पाते हैं।

चूँकि ऑनलाइन शिक्षा एक महत्वपूर्ण उपयोगी क्षेत्र हैं जिस पर बच्चों और सम्पूर्ण देश का भविष्य टिका हज तो हमें पद्धति के सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर इसमें सुधार के उपायों को अवश्य देखना चाहिए।

विद्यार्थियों को पढ़ाई के सिर्फ इसी माध्यम पर पूरी तरह से निर्भर नहीं रहना चाहिए, बच्चे प्रिंटेड पुस्तकों को भी पढ़े तथा उन्हें ऑनलाइन सामग्रीयों से भी लाभ लेकर पढने के भी अवसर खुले रखने चाहिए।

रोचक और नए तरीके से पढ़ाने कराने वाले अनुभवी शिक्षकों को इसमें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, विभिन्न स्तरों पर बच्चों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प केंद्र खोले जाने चाहिए, बच्चों के प्रैक्टिस अध्ययन के अवसर भी उपलब्ध किए जाने चाहिए।

 

 

निष्कर्ष,

अंत में निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता हैं यदि सुचारू रूप से बच्चों को ऑनलाइन माध्यम द्वारा सीखने के अवसर दिए जाए तो वह तनाव रहित होकर अपनी रूचि के साथ बहुत कुछ सीख और पढ़ सकते हैं, हम टेक्स्ट बुक्स के पाठ्यक्रम के साथ इस नवीन पद्धति को भी आसानी से अपना सकते हैं।

राष्ट्रीय स्तरों पर बच्चों के लिए छोटे-छोटे क्रेस कोर्स बनाए जाएं जिन्हे कम समय में सीखा जा सके, कोचिंग संस्थान भी निरंतर दस-बारह घंटों की भारी भरकम क्लास लेने के बजाय बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान ने रखते हुए कम समय में अन्य आकर्षक फिचरों के साथ पढ़ाने की नई व्यवस्था करें तो इस तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था से अधिक लाभ लिया जा सकता हैं।

 

:- By Raksha

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