सेल्फ स्टडी कैसे करे

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

वैसे तो आज के टाइम में सभी बच्चे लोग पढाई के लिए स्कूल (School), कोचिंग (Coaching )करते हैं। लेकिन फिर भी छात्रों व छात्राओं के बीच में सेल्फ स्टडी (Self- study)का अपना एक अलग ही महत्व है।  इसमें विद्यार्थी अपने अनुसार अपना पाठ्यक्रम बना कर पढ़ते हैं या फिरअपने  दोस्तों के साथ ग्रुप बना कर एक साथ पढाई करते हैं। लोग अपने अपने टॉपिक्स (Topics), परेशानियों को डिसकस कर सकते हैं।  जो लोग सरकारी नौकरी की या किसी और competitive exam की तैयारी  कर रहे हैं, उनके लिए ये सेल्फ स्टडी द्वारा पढ़ना बहुत ही काम आता है।  ज्यादातर सफल  लोग सेल्फ स्टडी को ही महत्व देते हैं।

सेल्फ स्टडी कैसे करें :

हमें सेल्फ स्टडी करने के लिए निम्न निखित बिन्दुओ पर ध्यान देना चाहिए :

* सर्वप्रथम हमें किताबें(Books) या फिर उनके नोट्स(Notes) इकट्ठे कर लेने चाहिए, जिसमे देखकर हम पढाई करेंगे । किताबें अगर अच्छे लेखक या कंपनी की होगी तो  और भी फायदा होगा, क्यूंकि किताबें बहुत सारे लेखक व कंपनियों की आती है।

* हर एक दिन का अलग अलग टाइम टेबल बनाये ,जिसमे कि सभी विषय कवर हो जाए।  टाइम टेबल ऐसा बनाना चाहिए कि जिसमे न हम थके , न बोर हो , और हमारे सरे सब्जेक्ट्स भी कवर हो जाएं।  दिन में २-३ सब्जेक्ट्स पढ़ना ठीक रहता है।

*जो जरुरी विषय हो उनको रोज़ाना , और बाकि को alternate दिन के हिसाब से रख सकते हैं।

* पढ़ते हुए महत्वपूर्ण पॉइंट्स को हाईलाइट कर ले या निशान लगा कर कही अलग नोट कर ले , और उनको बार बार दोहराएं।

* हमें हर सब्जेक्ट्स व टॉपिक के खुद से अपने हिसाब से नोट्स बनाने होंगे ताकि जब हम उसको पढ़े बाद में, to हमें थोड़ा पढ़ते ही पूरा का पूरा टॉपिक याद आ जाये । इसके लिए हम एक बार टॉपिक को पढ़ के समझेंगे तथा बाद में एक एक टॉपिक के क्रमवार नोट्स बनाएंगे। याद रहे कि नोट्स हम अपने खुद बनाये, किसी और के बने बनाये नोट्स से तैयारी करना उतना फायदे का नहीं होता।

* तीसरी बार पढ़ते हुए अपने ही नोट्स को फ़ास्ट पढ़ें, ताकि देखते ही सब याद आ जाये।

* बीच बीच में अपना खुद का आकलन करने के लिए पिछले साल के पेपर भी सॉल्व कर के देखते रहे , ताकि पता चल जाये कि हम सब चीज ठीक से पढ़ रहे हैं के नहीं।  पिछले सालो का पेपर सॉल्व करने से तयारी में बहुत मदद मिलती है।

इस तरह से अगर हम पढ़ते हैं, तो  ६ माह में ही हम अपना सब कोर्स भी कवर कर लेंगे तथा हमारी तैयारी भी नोट्स बनाते बनाते हो जागेगी ।

दिनचर्या :

जब हम किसी चीज कि तैयारी या पढाई करते हैं तोह हमें अपनी दिनचर्या का विशेष तौर पर ध्यान देना होगा।  ऐसा कहा जाता है कि विद्यार्थियों के लिए सुबह ४-६ बजे का ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा रहता है।

पुराने ज़माने में विद्यार्थी इसी समय में उठ कर पढ़ा करता था, जिससे उसकी स्मरण शक्ति बहुत तेज़ होती थी ।  इस समय याद की हुई चीजें लम्बे समय तक याद रहती हैं। सुबह जल्दी उठने के लिए हमें सोना भी समय से चाहिये ।  रात को ९-१० बजे तक सो जाना सबसे अच्छा होता है।  जल्दी सो कर जल्दी उठने से मन भी खुश रहता है, और पढाई का भी सब समझ में आता है।  रात को देर से सोने से पूरी दिनचर्या बिगड़ जाती है।

हर एक टॉपिक के लिए अलग समय निर्धारित करे :

सुबह के समय नया टॉपिक पढ़े, दोपहर को रेविसिओं करे इत्यादि इत्यादी ।  इस हिसाब से तैयारी करनी चाहिए की सरे सब्जेक्ट्स की खिचड़ी न बन जाये । और छोटे छोटे अंतराल भी बीच बीच में लेते रहे ।

खाने पिने का ध्यान :

हमें ज्यादा भरी खाना नहीं खाना चाहिए, हलके फूलते व स्फूर्ति देने वाला  खाना खाना चाहिए , नहीं तो  सारा दिन भरी खान खा कर नींद ही आती रहेगी।

और हमें चाहिए की अच्छे लेखक या टीचर की किताबो से तैयारी करे, बहुत ज्यादा और भड़ -भड़ करके नहीं पढ़ना चाहिए नहीं तोह हम कंफ्यूज हो जाते हैं और कुछ समझ नहीं आता । लिमिटेड व अच्छी किताबों  से हमें अपना टॉपिक कवर करना चाहिए।

अगर आप हमारे इन तरीको को अपना कर पढाई करेंगे तो हमें विश्वास है कि आप अवश्य ही सफल होंगे व कामयाबी आपके कदम चूमेगी।

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