अजवाइन के फायदे ( ajwain ke labh bataiye )

अजवाइन एक स्वास्थ्यवर्धक मसाला है। यह पेट की समस्याओं को चुटकी भर में दूर करती है। रात में सोने से पहले गर्म पानी के साथ अजवाइन को चबाकर खाने से सेहत को कई लाभ होता है जिससे आप अभी तक अपरिचित हैं। अजवाइन न सिर्फ भोजन का स्वाद बढ़ाता है बल्कि उसके औषधीय गुण भी खाने को और अधिक भी पौष्टिक बनाता है। जिससे वह मनुष्य के सेहत को कई तरह से लाभ पहुँचाने में सक्षम होता है। अजवाइन का वानस्पतिक नाम ट्रकीस्पर्मम् ऐम्मी है और ये ऐपीएसी कुल से है और इंग्लिश में इसको दि बिशॉप्स वीड कहते हैं। अजवायन हर भाषा में कई नामों से प्रचलित है, जैसे हिन्दी में अज़वाइन, अजमायन, जवाईंन, जबायन, अजोवां, गुजराती में अजमो, अरबी में  कमूने मुलुकी, बंगाली में यमानी या जोवान, तमिल में ओमुम, अंग्रेजी में एजोबा सीड्स, मराठी में अजमा, यवान , कैरम (carum), आदि। अजवाइन वस्तुत: ऐसे प्रांतों में उपजता है जिस जगह के मिट्टी में नमक की मात्रा में काफी ज्यादा होती है।

 

अजवाइन मुख्यतः तीन प्रकार की होती है:

  1. अजवाइन
  2. जंगली अजवाइन
  3. खुरासानी अजवाइन।

 

अजवाइन के पोषक तत्व :

अजवाइन में अवाष्पशील तेल, मिरसीन, फिनोल, क्युमिन, कैम्फीन, डाईपेन्टीन, पॉमिटिक, निकोटिनिक, लिनोलीक, ओलिक, β-पाइनिन, अम्ल, राइबोफ्लेविन, तथा थाइमिन पाया जाता है। इसके फल में साइमीन तेल तथा थायमोल पाया जाता है।अजवाइन में एसेनशियल ऑयल भी होता है, जो खाने का स्वाद और फ्लेवर बढ़ाने में भी मदद करता है। अजवाइन में फाइटोकेमिकल जैसे कार्बोहाइड्रेट्स, ग्लाइकोसाइड्स, सैपोनिन्स फिनोलिक यौगिक या कम्पाउन्ड आदि होता है। इसके साथ-साथ अजवाइन में फैट, प्रोटीन, फाइबर और मिनरल जैसे फॉस्फोरस, कैल्शियम, आयरन और निकोटिनिक एसिड आदि भी होता है। अजवाइन के फायदे भी अजवाइन के पोषक तत्वों पर ही निर्भर करता है।

 

अजवाइन में पाए जाने वाले औषधीय गुण

 

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि इतने पोषक तत्व से भरपूर अजवाइन के औषधीय गुण भरे पड़े होंगे। अजवाइन के बीज में कार्मिनटिव (वातहर), मूत्रवर्धक, एंटीसेप्टिक, स्टीमूलेंट, एनेस्थेटिक, नेमाटिडाइड, एंटी-अल्सर, ऐंटीमाइक्रोबायल, एंटीवायरल, एंटीहाइपेर्टेन्सिव, एंटी-ट्यूसिव, ब्रोंकोडाइलेटरी, एंटी-हाइपरलिपिडेमिक और एंटीप्लेटलेट, हेपेट्रोप्रोटेक्टीस जैसे औषधीय गुण विद्यमान होते हैं। साथ ही अजवाइन का एंटी-कैरोजेनिक गुण मुँह में पैदा होने वाले बैक्टिरीया को पनपने से रोकता है जिससे की ओरल हेल्थ बेहतर होता है। अजवाइन में थायमोल तथा एंटी-बैक्टीरिया गुण होता है, जो की ओरल हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा अजवाइन मनुष्य के धमनियों का रक्तचाप कम करने में सहायता करती है जो शरीर का एलडीएल लो करके हाइपरटेंशन से राहत दिलाने में मदद करती है। अजवाइन एक डाइजेस्टिव स्टीमूलेंट होता है जो गैस्ट्रिक एसिड, बाइल एसिड्स और डाइजेस्टिव एंजाइम के कार्यविधि को बेहतर बनाकर खाना को पचाने में मदद करती है।

 

अजवाइन के सेवन की विधि :

 

बाहरी उपयोग के लिए-

अगर आप अजवाइन का उपयोग बाहरी तौर पर करना चाहते हैं तो आवश्यकता के अनुसार दो से पांच ग्राम ताजा पत्ते का पेस्ट बनाकर कर सकते हैं या दो से पांच ग्राम जरूरत के अनुसार अजवाइन के बीज का पाउडर भी बना सकते हैं। अगर आपको दर्द के जगह पर अजवाइन का तेल लगाना है तो एक से तीन बूंद जरूरत के अनुसार तेल लगा सकते हैं, नहीं तो अजवाइन के नुकसान से त्वचा पर असर पड़ता है।

 

आंतरिक उपयोग के लिए –

अजवाइन का चूर्ण, अजवाइन तेल और अज‍वाइन पानी तो आप घर पर भी आसानी से बना सकते हैं। लेकिन आजकल अजवाइन के टैबलेट और कैप्सूलस भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। एक से दो ग्राम अजवाइन का चूर्ण को दिन में दो बार ले सकते हैं या 30-50 मिली अजवाइन पानी दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं।

वैसे तो अजवाइन का इस्तेमाल कई तरीकों से कर सकते हैं लेकिन इसके सेवन करने का तरीका और लगाने का तरीका भी अलग-अलग होता है। जिसका विशेष रूप से ध्यान रखना होता है, नहीं तो अजवाइन के नुकसान से कई मुश्किलें भी आ सकती हैं। अजवाइन लेने का तरीका सही होगा तभी अजवाइन के फायदे शरीर को पूरी अच्छी तरीके से मिलेगा।

 

पेट के संक्रमण से राहत : 

अजवाइन ऐंन्थेल्मिंटिक एक्टिविटी एटीपीएएस एक्टिविटी को बढ़ाकर पैरासाइट्स यानि परजीवीयों के गति विधि को कमजोर करके संक्रमण से पेट को राहत दिलाने में सहायता करती है। इसके अलावा कोलिर्नेजिक एक्टिविटी पेट के मांसपेशियों के संकुचन को कम करने के साथ-साथ परजीवीयों को बाहर निकालने में आपकी मदद करती है।

 

हाइपरटेंशन :

जानवर का परिक्षण करके यह पाया गया है कि अजवाइन में एन्टी हाइपरटेंसिव गुण होता है, जो धमनियों में ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायता करती है और आपके हाइपरटेंशन को लो करती है।

 

पाचन शक्ति :

आयुर्वेद में अजवायन को पाचन करने के औषधि के रूप में जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अकेला अजवायन सैंकड़ो प्रकार के अन्न को हजम करने में सक्षम है। अजवायन पाचक जूस के सिक्रेशन को बढ़ाने के साथ-साथ डाइजेस्टिव एन्जाइम के एक्टिविटी को बढ़ाकर हजम करने के शक्ति को बेहतर करने में बेहतर मदद करती है।

 

दंत स्वास्थ्य :

अजवायन के थायमोल में जो एन्टीबैक्टीरियल गुण होता है वह मुँह और दांत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती है। साथ ही अजवाइन में एंटी-कैरोजेनिक गुण भी होता है जो मुँह में बैक्टीरिया को पनपने से रोकता है और किसी भी प्रकार के संक्रमण को कम करने में मदद करता है।

 

अस्थमा या दमा रोग :

 अजवायन में जो कार्वाकोल नाम का एसेनशियल तेल होता है, वह ब्रोंकोडाइलेटरी प्रभाव के कारण जाना जाता है। ये कफ से भी राहत दिलाने में काफी मदद करता है, यह श्वसन नली के जमे हुए बलगम या कफ को कम करके दमा के परेशानी को कम करने में काफी सहायता करती है।

 

हाइपरलिपिडिमिया :

अजवायन की एक यह खास बात है कि ये लिपिड को लो करती है। ये टोटल कोलेस्ट्रॉल,टोटल लिपिड्स एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड को लो करने में काफी मदद करती है। अजवाइन में जो थायमोल और कारक्रोल आदि होता है। वे एन्टीऑक्सिडेंट होते हैं और शरीर को फ्री रैडिकल्स से होने वाले क्षति को कम करने में काफी मदद करते हैं।

अजवायन से होने वाले नुकसान के बारे में तो हमने पहले ही बात की है कि गर्भवती औरतों को इसके सेवन से बचना चाहिए। इन स्थितियों के अलावा अगर आपने अजवायन निश्चित मात्रा से भी ज्यादा लिया तो उल्टी, मिचली और सिरदर्द की समस्या भी हो सकती है।

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