जीएसटी के प्रकार और लाभ ( Benefits of GST in hindi )

जीएसटी को आम भाषा में Good and Services Tax (वस्तु एवम् सेवा कर) कहते हैं।कोई भी कंपनी में जब कोई भी वस्तु का उत्पादित होता है तो ग्राहकों तक उस वस्तु के पंहुचने में उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती हैं। वस्तु एवं सेवा कर भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर अप्रत्यक्ष कर है।

भारतीय उपभोक्ता के लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स का लाभ काफी अधिक है क्योंकि इसने कई लोगों का बोझ कम कर दिया और हैकरों को एक छत के नीचे ले आया। यह जानना महत्वपूर्ण है कि जीएसटी एक ऐसा कर है जिसका भुगतान खरीदार सीधे सरकार को नहीं करते हैं। वे इसे उत्पादकों या विक्रेताओं को भुगतान करते हैं। और, ये निर्माता और विक्रेता फिर सरकार को इसका भुगतान करते हैं।

रोज इस्तेमाल किए जाने वाले सामान जैसे:- मोबाइल, हैंडसेट, सिगरेट, शराब, कार आदि गुड्स में शामिल होते  हैं।

किचन में इस्तेमाल होने वाले सामान पर अब सिर्फ 18% टैक्स लग रहा हैं।

सर्विस सेवाएं जैसे मोबाइल बिल, बिजली बिल, ट्रैन टिकट आदि के लिए अब लोगों को 14 प्रतिशत टैक्स देना होता हैं।

फैक्ट्री में वस्तुओं के उत्पादन के बाद वहाँ से निकलने पर एक्साइज ड्यूटी लगती हैं। फिर उसके बाद वो प्रोडक्ट एक स्टेट से दूसरे स्टेट में भेजा जाता हैं तब इस पर एंट्री टैक्स भी लगता है। दूसरे स्टेट में पहुँचने के बाद भी इस पर सेल्स टैक्स लगता है, जो सभी स्टेट का अपना अलग-अलग टैक्स निर्धारित टैक्स होता हैं। कुछ वस्तुओं पर तो परचेज टैक्स भी देना पड़ता हैं।

खाने वाले अनाज जैसे, अंडा, गुड़, सब्जियां दूध,आटा, चावल, बेसन, नमक, इन सभी चीजों पर कोई Tax नहीं हैं मतलब यह चीजें खरीदने पर अब आपको कोई भी टैक्स नहीं लगेगा।

बाइक की कीमत पहले अलग-अलग टैक्सेस की वजह से ज्यादा थी लेकिन गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने की वजह से इसकी कीमत में कमी आई हैं।

एयर कंडीशनर , रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन पर पहले 30 – 35% तक का टैक्ट लगता था लेकिन अब इन पर भी सिर्फ 28% टैक्स लागू कर दिया है।

पहले वस्तुओं पर उपभोक्ताओं को 50% तक टैक्स लगता था जिसमे वेहीकल भार टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और सर्विस टैक्स आदि मिलाकर अलग-अलग कुल 18 टैक्स लगा करते थे लेकिन GST लागू होने के बाद सभी वस्तुओं पर सेवाओं पर अब सिर्फ एक ही टैक्स लगता हैं।

अब सम्पूर्ण देश में सिर्फ एक GST  लगता है तो इसकी जानकारी हम सभी को भी होना बेहद आवश्यक है इसलिए इस पेज पर हमने आज GST से संबंधित जानकारी साझा की हैं।

 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स के प्रकार

गुड्स एंड सर्विस टैक्स चार प्रकार की होती हैं भारत सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू करने से पहले इसको चार भागों में बाट दिया था।

CGST (Central Goods and Services Tax) : सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स यह टैक्स किसी भी राज्य के अंदर होने वाले लेन-देन पर लगती हैं इस टैक्स से जो पैसे वसूल किए जाते हैं वो सीधे केंद्र सरकार के खाते में जाते हैं।

SGST (State Goods and Services Tax) :  स्टेट गुड्स एंड सर्विस टैक्स यह टैक्स किसी भी राज्य के अंदर होने वाले लेन-देन पर लगती हैं इस टैक्स से जो पैसे वसूल किए जाते हैं वो सीधे स्टेट गवर्मेन्ट के खाते में जाते हैं।

IGST (Integrated Goods and Services Tax) :  जब कोई प्रोडक्ट एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजा जाता हैं तो इसमें सेंट्रल गवर्मेन्ट और स्टेट गवर्मेन्ट दोनों तरह के tax वसूल किए जाते है ,जिसे इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विस टैक्स कहते हैं।

UGST/UTGST (Union Territory Goods and Services Tax) : भारत देश में पांच केंद्र शाषित प्रदेश हैं जो भी वस्तुएं और सर्विस वहाँ दी जाती हैं उन पर भी गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होती हैं।

 

गुड्स एंड सर्विस टैक्स के फायदे

भारत सरकार द्वारा गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू कर सारी व्यवस्था आसान कर दी है। कर के ऊपर भी कर लगाने की व्यवस्था से आम आदमी को छुटकारा मिला है।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लगने से छोटी कारें खरीदना अब पहले से अधिक सस्ता हो गया हैं क्योंकि पहले छोटी गाड़िया खरीदने पर 30-40% तक टैक्स लगता था लेकिन गुड्स एंड सर्विस टैक्स लगने के बाद अब यह टैक्स घटकर 17%- 18% हो गया है।

रेस्टोरेंट में खाना खाना भी पहले से अधिक सस्ता हो गया हैं पहले रेस्टोरेंट में खाना खाने पर लोगों को वैट और सर्विस दोनों टैक्स देना पड़ते थे । लेकिन अब केवल एक ही टैक्स देना पड़ता हैं।

अब घर या जगह जमीन खरीदना भी पहले से अधिक सस्ता हो गया हैं क्योंकि इन पर भी वैट और सर्विस दोनों टैक्स देना होता था लेकिन अब सिर्फ एक ही टैक्स देना पड़ता हैं।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने पर सभी काम अब ऑनलाइन हो गए हैं जिससे सरकार की कर के आय में वृद्धि हो गई हैं।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने पर कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी अब पहले से कम हो गई हैं।

गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने पर सबसे बड़ा फायदा उपभोक्ता के अलावा इंडस्ट्रीज को भी फायदा होगा क्योंकि उन्हें पहले अलग-अलग तरह के 18 टैक्स देने पड़ते थे अब GST लागू होने की वजह से उन्हें sb सिर्फ एक ही टैक्स देना पड़ता हैं।

पहले जब हम कोई भी समान खरीदते थे सभी पर 24 फीसदी टैक्स देना होता था लेकिन जब से गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने पर यह टैक्स घटकर 17-18 फीसदी ही रह गया हैं।

पहले के टैक्स व्यवस्था में कंप्लायंस और रिटर्न अलग-अलग होता है। जीएसटी में दोनों को मिला कर नंबर ऑफ रिटर्न्स काफी कम हो गए हैं। साथ ही कंप्लायंस पर खर्च किया गया वक्त की भी बचत होती है।

पहले की व्यवस्था में 5 लाख से ज्यादा की कमाई होने वाले किसी भी प्रकार के व्यवसाय में VAT (वैल्यू ऐडेड टैक्स) चुकाना पड़ता था। 10 लाख से कम कि कमाई वाले सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए सर्विस टैक्स में कुछ छूट थी। जीएसटी में अब इसे 20 लाख तक कर दिया गया है जिससे छोटे व्यापारी और सर्विस प्रोवाइडर्स को काफी राहत भरी छूट मिली है।

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