दीपावली पर निबंध ( diwali tyohar par nibandh )

दीपावली या दिवाली का शाब्दिक अर्थ है दीपों की अवली अर्थात दीपों की पंक्ति। यह पर्व विशेष कर भारत और भारत के पड़ोसी देश नेपाल में बेहद उत्साह से मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त अन्य देशों में जहां भी हिंदू रहते हैं वहां भी यह त्योहार विधि पूर्वक और धूम-धाम से मनाया जाता है। यह पर्व अपने साथ खुशी, उत्साह और ढ़ेर सारा उमंग लेकर आता है। कार्तिक माह के अमावस्या को दिवाली का पर्व अनगिनत दीपों के प्रकाश के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर अमावस्या की काली रात दिपों के जगमगाहट से रौशन हो जाती है। दिपावली पर पुराने रीत के अनुसार सभी अपने घरों को दीपक से सजाते हैं।

 

क्यों मनाई जाती है दिपावली?

दीपावली का त्योहार लगभग पांच दिनों तक चलने वाला हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। दुर्गा पूजा के बाद से ही हमारे घरों में दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाती है, जो बहुत ही व्यापक स्तर पर की जाती है। हमारे धर्म ग्रंथों में ऐसा बताया गया है की इस दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। इसके अलावा दीपावली को लेकर कुछ और भी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।

प्रत्येक समाज त्योहारों के माध्यम से अपनी खुशी को प्रकट करता है। हिन्दुओं के प्रमुख त्योहार होली, रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली ही हैं। इनमें से दीपावली सबसे प्रमुख त्योहार माना जाता है। इस त्योहार का ध्यान आते ही मन मयूर के भांति नाच उठता है। यह त्योहार दीपों का पर्व होने से हम सभी का मन आलोकित करता है।

यह त्योहार कार्तिक माह के अमावस्या के दिन मनाया जाता है। अमावस्या की अंधेरी रात में हर घर जगमग असंख्य दीपों से जगमगाने लगता है। कहते हैं भगवान राम इसी दिन 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्यावासियों ने सम्पूर्ण अयोध्या नगरी में दीये जलाकर उनका स्वागत किया था।

उत्तरी गोलार्द्ध में शरद ऋतु के कार्तिक माह की पूर्णिमा को यह दिपोत्सव धूम-धाम से मनाया जाता है। ग्रेगोरी कैलेंडर के अनुसार यह त्योहार अक्टूबर या नवम्बर माह में मनाया जाता है।

कथाएं यह भी प्रचलित हैं की भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध भी इसी दिन किया था। इस दिन को भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण प्राप्त हुआ था। इन सभी कथाओं से लगता है की हमारे यहां दीपावली का त्योहार बहुत पहले से ही मनाया जाता रहा है।

यह त्योहार अब सभी धर्म के लोग मानने हैं। इस त्योहार के आने के कई दिन पहले से ही घरों की साफ-सफाई, लिपाई-पुताई, तथा विभिन्न तरह की सजावट प्रारंभ हो जाती है।

नए नए कपड़े बनवाए जाते हैं, मिठाइयां बनाई जाती हैं। वर्षा ऋतु के बाद जो हर जगह जंगल जंगल होता है, उन सबकी सफाई की जाती है तथा यह सब सजावट भव्य आकर्षण, सफाई और स्वच्‍छता में बदल जाती है। इस दिन लक्ष्मी जी के आगमन में चमक-दमक और खूब सज्जा सजावट की जाती है।

यह त्योहार पांच दिनों तक मनाया जाता है। धनतेरस से यह त्योहार शुरू होता है और भाई दूज तक यह त्योहार चलता है। धनतेरस के दिन सारे व्यापारी अपने नए बहीखाते नए बनाते हैं। अगले दिन नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करना अच्‍छा माना जाता है। तथा अमावस्या के दिन लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है।

खीर, बताशे तथा लड्डू आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है। नए कपड़े पहने जाते हैं।बच्चे फुलझड़ी, पटाखे आदि जलाते हैं। असंख्य दीपों की रंग-बिरंगी रोशनियां मन मोह लेती है। दुकानों, बाजारों और घरों की सजावट बेहद दर्शनीय रहती है।

अगला दिन परस्पर भेंट का दिन होता है। एक-दूसरे के गले लगकर दीपावली की शुभकामनाएं दी जाती हैं। घरों की गृहिणियां मेहमानों का स्वागत करती हैं। लोग छोटे-बड़े, अमीर-गरीब का भेद भूलकर आपस में मिल-जुलकर यह त्योहार मनाते हैं।

 

प्रदुर्भाव:-

दिपावली को हम “रोशनी का त्योहार” मानते हैं। लोग मिट्टी के बने दीपक में दीप जलाते हैं, और अपने घरों को विभिन्न रंगों और आकारों की रोशनी से सजाते हैं, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो सकता है। बच्चों को पटाखे जलाना और विभिन्न तरह के आतिशबाजी जैसे फुलझड़ियां, रॉकेट, फव्वारे, चक्री आदि बहुत पसंद होते हैं।

दीपावली का त्योहार सभी के जीवन को नई खुशी प्रदान करता है। नया जीवन जीने का उत्साह प्रदान करता है। कुछ लोग इस दिन पैसे लगाकर जुआ खेलते हैं, जो घर व समाज के लिए बड़ी बुरी बात है।

हमें इस बुराई से बचना चाहिए। पटाखे सावधानीपूर्वक छोड़ने चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारे किसी भी कार्य एवं व्यवहार से किसी को भी व्यक्ति को दुख न पहुंचे, तभी दीपावली का त्योहार मनाना सार्थक हो पाएगा।

दिपावली की तैयारी के वजह से घर तथा घर के आस-पास के स्थानों की साफ सफाई संभव हो पाता है। साथ ही दिवाली का त्योहार हमें हमारे परंपरा से भी जोड़ता है, यह हमारे आराध्य के पराक्रम का बोध कराता है। इस बात का भी ज्ञान कराता है कि, अंत में विजय सदैव सच्चाई और अच्छाई की होती है।

दीपावली अंधकार को मिटा कर समूचे वातावरण को प्रकाशमय बनाने का त्योहार है। बच्चे अपनी मन मुताबिक बम, फुलझड़ियाँ तथा अन्य पटाखे खरीदते हैं और आतिशबाजी का आनंद उठाते हैं। हमें इस बात को समझना होगा कि दीपावली के त्योहार का अर्थ दीप, प्रेम और सुख-समृद्धि से है। इसलिए पटाखों का इस्तेमाल सावधानी पूर्वक और अपने बड़ों के सामने रहकर करना चाहिए। दिवाली का त्योहार हमें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। दीपावली का त्योहार सांस्कृतिक और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। इस त्योहार के कारण लोगों में आज भी सामाजिक एकता बनी हुई है। हिंदी साहित्यकार गोपालदास नीरज ने भी कहा है, “जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना, अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए।” इसलिए दीपोत्सव यानि दीपावली पर प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा देने के प्रयत्न करने चाहिए।

Leave a Comment