दूरदर्शन से लाभ पर निबंध ( Doordarshan ke labh )

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

भारत में सबसे पहले 1959 में दूरदर्शन पर प्रसारण किया गया था। इसकी शुरुआत ब्रिटेन में 1926 में हो चुकी थी। ये रेडियो का विकसित रूप माना जाता है। इसे अंग्रेजी तथा आम भाषा में टेलीविजन कहा जाता है लेकिन इसका हिंदी व संस्कृत में दूरदर्शन ही कहा जाता है। यानी की दूर की चीजों के दर्शन। पहले के समय में दूरदर्शन सादा होता था, सिर्फ काला और सफेद रंग का जिसमे सिर्फ एक ही चैनल था। पहले के दूरदर्शन बड़ी साइज के ज्यादा जगह लेने वाले होते थे, लेकिन अब के दुरदर्शन रंगीन हो गए है। देखने वालो के रुचि अनुसार अलग-अलग तरह के चैनल भी 250 से ज्यादा मौजूद है। आज के दुरदर्शन भी बहुत कम जगह लेते है। पहले की तरह इन्हे कहीं रखने की जरूरत नही है, इसे अब दीवार में सेट किया जाता है। दूरदर्शन के कई सारे फायदे है तो चलिए आज आपको उन फायदों के बारे मे बताते हैं।

विज्ञानं ने हम मनुष्यों को एक से बढ़कर एक अद्भुत गैजेट प्रदान किए हैं। इन्हीं अद्भुत गैजेट  में एक दूरदर्शन भी है । दूरदर्शन एक ऐसा अद्भुत गैजेट है जिसे कुछ समय पहले कल्पना की वस्तु समझा जाता था। यह आधुनिक युग में मनोरंजन के साथसाथ सूचनाओं की प्राप्ति का महत्त्वपूर्ण साधन भी है। पहले इसका प्रयोग महानगरों के संपन्न घरों तक सीमित था, परंतु वर्तमान में इसकी पहुँच शहर और गाँव के घर-घर तक हो चुकी है।

 

दूरदर्शन के लाभ 

दूरदर्शन विविध क्षेत्रों में विविध रूपों में लाभदायक है। यह वर्तमान में सबसे सस्ता और सुलभ मनोरंजन का साधन है। इस पर मात्र बिजली और कुछ रुपये के मासिक खर्च पर मनचाहे कार्यक्रमों का आनंद उठाया जा सकता है। दूरदर्शन पर प्रसारित फ़िल्मों ने अब सिनेमा के टिकट की लाइन में लगने से मुक्ति दिला दी है। अब फ़िल्म हो या कोई प्रिय धारावाहिक, घर बैठे इनका सपरिवार आनंद लिया जा सकता है।

समाचार

आज के समय में हम दूरदर्शन के माध्यम से घर बैठे ही अपनी आंखों के सामने दुनिया के हर कोने की खबरें जान सकते हैं। दूरदर्शन पर कई समाचार के चैनल्स उपलब्ध है जिनपे हर तरह के हर समाचार दिखाए जाते हैं। अब तो वो लोग भी समाचार सुन कर समझ सकते हैं, जिन्हे समाचार पत्र पढ़ने नही आता, इतना ही नहीं अब तो मूक और बघिर लोगों के लिए भी इशारों में उनकी भाषा में समाचार समझाया जाता हैं। अब समाचार पत्र के खर्च करने की जरूरत ही नहीं, दुरदर्शन के कारण आप हर समय समाचार सुन सकते हैं, और अपनी जानकारी बढ़ा सकते हैं। कई ऐसे भी चैनल्स उपलब्ध है जो शतक, न्यूज एक्सप्रेस जैसे प्रोग्राम्स चलाते हैं, जिससे कम ही समय में ढेर सारे समाचार दिखाए जाते हैं। देश, विदेश, खेल, मनोरंजन, आतंकी, शिक्षा, रोजगार हर विषय को अच्छी तरह खंगाल कर समाचार देखने को मिलता है। देश के किस हिस्से में कौनसी सरकार कैसा काम कर रही है और उस हिस्से के लोगों की राय क्या है, मांग क्या है ये सारी जानकारियां दूरदर्शन के माध्यम से अब घर में ही जाना जा सकता है। सरकारी नई नीतियां क्या है, कब कौनसा नियम लागू हो रहा है, देश के वर्षीय बजट में क्या आया है ये सारी बातें आम आदमी दूरदर्शन के माध्यम से आसानी से समझ सकता है और उस हिसाब से अपने बचत को घटा-बढ़ा सकता है। किस राज्य में मतदान हो रहा है, वहां के लोगों का रुझान किसकी और है, उस राज्य में किसकी कितनी सीटें आ रही है, किसकी सरकार बनेगी, किसने नामांकन किया, कौन जीता ये सारी जानकारियां दूरदर्शन पर आम भाषा में समझाया जाता है। हमें किसी और राज्य या राष्ट्र की जानकारियां लेने के लिए हमें वहां जाने की जरूरत नहीं पड़ती। अब दूरदर्शन पर ही लाइव प्रसारण किया जाता है।

मनोरंजन

पहले के समय में मनोरंजन के लिए व्यक्ति सिनेमा हॉल जाया करते थे या सफेद परदे पर फिल्म चलाया करते थे। रेडियो पर गीत सुना करते थे। लेकिन अब आप दूरदर्शन पर अपना मन-पसंद गीत सुन सकते हैं। अब फिल्मे देखने के लिए हमेशा थियेटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। अब आप अपने घर में अपनी कुर्सी पर बैठ कर अपने पसंद की फिल्म देख सकते हैं। पहले दूरदर्शन पर सिर्फ एक ही चैनल था, लेकिन अब तो केबल है अब सिनेमा के 70 से अधिक चैनल उपलब्ध है। अब व्यक्ति अपने पसंद के हीरो-हीरोइन के फिल्म देख सकता है, संगीत का चलचित्रो के साथ आनंद ले सकता है। सिर्फ संगीत के लिए 40 से अधिक चैनल है जिन पर हर घड़ी गीत आते रहते है। अब आप अपने पसंद के अपनी रुचि अनुसार अपनी भाषा में अपने ही घर में बैठ कर गीत सुन सकते हैं। दूरदर्शन पर तो कई धारावाहिक चलाई जाती है ऐसे कई चैनल है जो कहानियों को किरदारों को चलचित्रों के माध्यम से दिखाते हैं। जिन्हें खास कर महिलाएं काफी पसंद करती हैं। बच्चो के लिए भी कई सारे चैनल हैं, जिन पर कार्टून सीरीज दिखाए जाते हैं। अब मनोरंजन के लिए कहीं भी जाने की जरूरत नहीं रही, एक ही दूरदर्शन पर घर के बड़े बुजुर्ग, युवा, महिलाएं, बच्चे सबका मनोरंजन होता है।

संस्कृति

अब तो दूरदर्शन पर भारत के हर राज्य के संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक चैनल उपलब्ध है, जैसे की डीडी बिहार, डीडी उत्तरप्रदेश , डीडी झारखंड और राज्यसभा, लोकसभा जैसे चैनल्स भी मौजूद है। भारत विविधता से भरा एक राष्ट्र है जिसमे हर राज्य की संस्कृति में कुछ अलग है, आज की नई पीढ़ी अपनी संस्कृति से परिचित हो और संस्कृति का विकास हो इस लिए ऐसे चैनल्स भी बनाए गए हैं। इन चैनलों पर हर राज्य के लोकगीत, लोक नृत्य दिखाए जाते हैं। संस्कृति को जीवंत रखने के लिए दूरदर्शन काफी अच्छा माध्यम है।

विकास में सहयोगी

दुरदर्शन को विकास के लिए उपयोगी कहा जाए तो बोहोत से लोग नही समझ पाएंगे या यकीन नही करेंगे लेकिन ये सच है की दूरदर्शन विकास साधने में सहयोगी साबित हुआ है। क्योंकि दूरदर्शन पर बच्चो के लिए शिक्षा के क्लास भी चलाए जाते है। कृषि क्षेत्र में क्या हो रहा है किस तरह के उत्पाद की मांग है, किस तरह की खेती ज्यादा कारगर होगी इन सब से किसानों को मार्गदर्शन दिया जाता है। इसके लिए डीडी किसान नामक चैनल भी उपलब्ध है। इस लिए हम ऐसा कह सकते हैं की दूरदर्शन विकास में सहयोगी साबित हुआ है।

विज्ञापन

आप जब भी दूरदर्शन देखेंगे उस दौरान कई सारे विज्ञापन भी देखेंगे जिससे आपको नई-नई चीजों के बारे में जानकारी बढ़ेगी और आप अपनी जरूरत के हिसाब से खरीद इकेन, साथ ही कंपनियों का विज्ञापन का कार्य भी होगा और बिक्री भी बढ़ेगी।

खर्च भी कम

दुरदर्शन के लाभ लेने के लिए आपको सिर्फ एक बार दूरदर्शन खरीदने के खर्च करने पड़ते है, उसके बाद अगर आप ढेर सारे चैनल्स देखना चाहते हैं तो केबल का खर्च करना होगा और उतने ही खर्च में घर के सभी लोगो का मनोरंजन भी होगा और ज्ञान भी बढ़ेगा। एक साथ बैठ कर दूरदर्शन देखने से परिवार मे एकता भी बढ़ेगी।दूरदर्शन के लाभ बहुत सस्ते में उपलब्ध है।

 

दूरदर्शन का बढ़ता उपयोग

दूरदर्शन मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन का उत्तम साधन है। आज यह हर घर की आवश्यकता बन गया है। उपग्रह संबंधी प्रसारण की सुविधा के कारण इस पर कार्यक्रमों की भरमार हो गई है। कभी मात्र दो चैनल तक सीमित रहने वाले दूरदर्शन पर आज अनेकानेक चैनल हो गए हैं। बस रिमोट कंट्रोल उठाकर अपना मनपसंद चैनल लगाने और रुचि के अनुसार कार्यक्रम देखने की देर रहती है। आज दूरदर्शन पर फ़िल्म, धारावाहिक, समाचार, गीत-संगीत, लोकगीत, लोकनृत्य, वार्ता, खेलों के प्रसारण, बाजार भाव, मौसम का हाल, विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम तथा हिंदी-अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में प्रसारण की सुविधा के कारण यह महिलाओं, युवाओं और हर आयुवर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय है।

 

दूरदर्शन का प्रभाव

अपनी उपयोगिता के कारण दूरदर्शन आज विलसिता की वस्तु न होकर एक आवश्यकता बन गया है। बच्चेबूढ़े, युवा-प्रौढ़ और महिलाएँ इसे समान रूप से पसंद करती हैं। इस पर प्रसारित ‘रामायण’ और महाभारत जैसे कार्यक्रमों ने इसे जनमानस तक पहुँचा दिया। उस समय लोग इन कार्यक्रमों के प्रसारण के पूर्व ही अपना काम समाप्त या बंद कर इसके सामने आ बैठते थे। गाँवों और छोटे शहरों में सड़कें सुनसान हो जाती थीं। आज भी विभिन्न देशों का जब भारत के साथ क्रिकेट मैच होता है तो इसका असर जनमानस पर देखा जा सकता है। लोग सब कुछ भूलकर ही दूरदर्शन से चिपक जाते हैं और बच्चे पढ़ना भूल जाते हैं। आज भी महिलाएँ चाय बनाने जैसे छोटे-छोटे काम तभी निबटाती हैं जब धारावाहिक के बीच विज्ञापन आता है।

दूरदर्शन पर प्रसारित समाचार ताजी और विश्व के किसी कोने में घट रही घटनाओं के चित्रों के साथ प्रसारित की जाती है जिससे इनकी विश्वसनीयता और भी बढ़ जाती है। इनसे हम दुनिया का हाल जान पाते हैं तो दूसरी ओर कल्पनातीत स्थानों, प्राणियों, घाटियों, वादियों, पहाड़ की चोटियों जैसे दुर्गम स्थानों का दर्शन हमें रोमांचित कर जाता है। इस तरह जिन स्थानों को हम पर्यटन के माध्यम से साक्षात नहीं देख पाते हैं या जिन्हें देखने के लिए न हमारी जेब अनुमति देती है और न हमारे पास समय है, को साक्षात हमारी आँखों के सामने प्रस्तुत कर देते हैं। दूरदर्शन के माध्यम से हमें विभिन्न प्रकार का शैक्षिक एवं व्यावसायिक ज्ञान होता है। इन पर एन०सी०ई०आर०टी० के विभिन्न कार्यक्रम रोचक ढंग से प्रस्तुत किए जाते हैं। इसके अलावा रोज़गार, व्यवसाय, खेती-बारी संबंधी विविध जानकारियाँ भी मिलती हैं।

 

दूरदर्शन से हानियाँ

दूरदर्शन लोगों के बीच इतना लोकप्रिय है कि लोग इसके कार्यक्रमों में खो जाते हैं। उन्हें समय का ध्यान नहीं रहता। कुछ समय बाद लोगों को आज का काम कल पर टालने की आदत पड़ जाती है। इससे लोग आलसी और निकम्मे हो जाते हैं। दूरदर्शन के कारण बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। इससे एक ओर बच्चों की दृष्टि प्रभावित हो रही है तो दूसरी और उनमें असमय मोटापा बढ़ रहा है जो अनेक रोगों का कारण बनता है।

दूरदर्शन पर प्रसारित कार्यक्रमों में हिंसा, मारकाट, लूट, घरेलू झगडे, अर्धनंगापन आदि के दृश्य किशोर और युवा मन को गुमराह करते हैं जिससे समाज में अवांछित गतिविधियाँ और अपराध बढ़ रहे हैं। इसके अलावा भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों की अवहेलना दर्शन के कार्यक्रमों का ही असर है।

दूरदर्शन एक बेहद अत्यंत उपयोगी उपकरण है जो आज हर घर तक अपनी पैठ बना चुका है। इसका दूसरा पक्ष भले ही उतना उज्जवल नही है, पर इससे दूरदर्शन की उपयोगिता कम नहीं हो जाती। दूरदर्शन के कार्यक्रम कितनी देर देखना है, कब देखना है, कौन से कार्यक्रम देखने हैं यह हमारे बुद्धि विवेक पर निर्भर करता है। इसके लिए दूरदर्शन दोषी नहीं है। दूरदर्शन का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए।

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