मछली पालन का बिजनेस कैसे शुरू करें? | How to Start a Fish Farming Business in Hindi

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

हमारे देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहकर खेती बाड़ी और पशुपालन से जुड़ी हुई है। खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों को खेती से इतना नहीं मिल पाता कि वह अपने परिवार का आर्थिक स्तर ऊंचा कर पाएं। इसके अलावा गांवों में बहुत से श्रमिक भूमि विहीन भी हैं, जो खेतों में काम करके करके अपना परिवार का पेट पालते हैं और जब गांवों में काम नहीं मिलता तो उन्हें मजबूरी में महानगरों की ओर रोजगार के लिए जाना पड़ता है। किसान हों या मजदूर इनके जीवनयापन के लिए गांवों में पशुपालन या मछली पालन बहुत बड़ा सहारा हैं। आजकल के जमाने में पशुओं को पालना तो बहुत महंगा हो गया है, खास कर के उनके लिए जिनके पास अपनी भूमि नही है। पशुपालन भूमिहीन श्रमिकों के वश की बात नहीं रह गयी है।  नदी, नहर व पोखर, तालाब के किनारे रहने वाले गरीब श्रमिक भी मछली पालन का व्यवसाय करके अपना परिवार का अच्छी तरह से भरण पोषण कर सकते हैं।

मछली पालन का बिजनेस कैसे शुरू करें? How to Start a Fish Farming Business in Hindi

स्टेप-1

यदि आपको फिश फार्मिंग के बारे कोई अनुभव है या कोई जानकारी है तो अच्छी बात है वरना आपको मछली पालन की ट्रेनिंग लेनी होगी। सरकार द्वारा मछली पालन के लिए ट्रेनिंग की सुविधाएँ  दे रखीं हैं। भारत सरकार के मत्स्य विभाग में समय-समय पर फिश फार्मिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। कृषि मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग आता है। आप मत्स्य विभाग की वेबसाइट (http//dof.gov.in/hi) से मत्स्य पालन की ट्रेनिंग की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस ट्रेनिंग में मत्स्य पालक को तालाब की साफ सफाई करना, मछली पालन से पहले तालाबों को भी तैयार किया जाना आवश्यक है। इससे जुड़ी सभी जानकारीयों को  ट्रेनिंग के दौरान दिया जाता है। इसके अलावा अच्छी नस्ल की मछलियों के बीज कहां से और कैसे उपलब्ध होंगे, उसकी जानकारी दी जाती है। इसके बाद मछली पालन के दौरान कौन कौन सी सावधानियां बरतनीं होतीं है अथवा कौन कौन सी चीजें तालाब में डालना है, उसको बताया जाता है जिससे जल्द से जल्द मछलियों का विकास हो सके ताकि उनका वजन बढ़ सके।  उन्हें कब तालाब से निकाल कर मार्केट में बेचा जाये तथा किस प्रकार बेचा जाये कि उससे अधिक से अधिक लाभ मत्स्य पालक को मिल सके। इसकी जानकारी ट्रेनिंग के दौरान दी जाती है। सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा दी जाने वाली ट्रेनिंग 10-15 दिन की होती है।

स्टेप-2

मत्स्य पालन के लिए आपके पास जगह है जहां पर तालाब बना सकते हैं तो सबसे बेहतर है वरना आजकल टैंक में छोटे पैमाने पर फिश फार्मिंग का बिजनेस किया जा रहा है। इस तरह से मत्स्य पालन करके लाखों लोग इस बिजनेस से लाभ कमा रहे हैं। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएँ चला रखीं हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी भूमि में बने तालाबों पर मछली पालन के ठेके दिये जाते हैं। यदि आप इन ठेकों को लेकर भी अपना व्यवसाय कर सकते हैं।

स्टेप-3

तालाब की व्यवस्था करते समय यह देखना बहुत आवश्यक है कि तालाब केवल वर्षा ऋतु में ही नहीं भरते हैं, क्योंकि आपको ऐसे तालाब की जरूरत होगी  जिसमें पूरे साल भर पानी भरा रहना चाहिये। इसकी वजह यह है कि मछली एक साल में ही इतनी बड़ी हो पाती है जिसका बिजनेस करके अच्छी आय कमाई जा सके।

स्टेप-4

आजकल ग्रामीण क्षेत्र में लोग आपस में मिलकर तालाब बनवाते हैं और छोटे-छोटे फार्म बनाकर उसमें मछली पालन का व्यवसाय करते हैं।  इसके अलावा और छोटे पैमाने पर अपने घर पर ही लोग टैंक में मछली पालन करके व्यवसाय करते हैं।

स्टेप-5

तालाब की व्यवस्था होने के बाद आपको सबसे पहले तालाब की साफ सफ़ाई अच्छी तरह से की जानी चाहिये। उसके बाद उस तालाब में गोबर का छिड़काव करके पानी का भराव करना चाहिये। गोबर डाले जाने के बाद उसमें उत्पन्न होने वाले नन्हें कीट मछली के बीजों का भोजन बन जाते हैं। इसके अलावा गर्मी, सर्दी से भी उन बीजों का बचाव हो जाता है। इससे बीजों का अच्छा विकास हो जाता है।

स्टेप-6

तालाब को पूर्ण रूप से तैयार हो जाने के बाद अब आपको अच्छे नस्ल की मछलियों के बीज खरीदने होंगे जिनकी मार्केट में अच्छी कीमत पर बहुत मांग हो। इस बारे में आप बीज भंडार और मत्स्य विभाग के जिला कार्यालय से सम्पर्क कर सकते हैं, जहां से अच्छी नस्ल वाली मछली के बीज आसानी से मिल सकते हैं।

स्टेप-7

अच्छी किस्म की मछलियों के बीज डालने के बाद तालाब की समय-समय पर देखरेख करनी चाहिये। समय समय पर उनके लिए भोजन डालना होता है और यदि किसी प्रकार के रोग के संकेत मिलें तो तत्काल उसका निदान करना होता है।

स्टेप-8

मछलियों का वजन जब 5 से 10 किलो के बीच हो जाये तब उन्हेें पानी से बाहर निकालकर बाजार में बेचना चाहिये। इससे मत्स्यपालक को अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होगा।

 

फिश फार्मिंग का व्यवसाय शुरू करने से पहले की कुछ बातें

हमें सबसे पहले हमें मछलियों की नस्लों के बीज का चयन करना होगा, जिनकी बाजार में हमेशा डिमांड रहती है और जिनका बाजार में अच्छा भाव मिलता हो।इस तरह की मछलियों में रोहू, कॉमन क्रॉप, सिल्वर क्रॉप और टूना प्रमुख हैं।

अब हमें तालाब का भी ध्यान रखना होगा। फिश फार्मिंग के लिए पूरे बारह माह पानी वाले तालाब की आवश्यकता होती है। इसलिये हमें तालाब का चयन करते समय ये ध्यान देना चाहिये कि कहीं ऐसा न हो कि केवल बरसात में तालाब में पानी रहता हो और बाद में सूख जाता हो ।

तालाब में उन किस्म की मछलियों के बीज डालने हों, जो जल्दी से बढ़ती हों। यदि आपकी मछली तेज़ी नहीं बढ़ेगी तो आपका ही नुकसान होगा।

यह तो सभी जानते हैं कि मछलियों कीड़े मकोड़े खाती हैं। इसलिये तालाब में ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि मछलियों को भोजन मिलता रहे। चाहे वह केंचुए को डालना हो, चोकर डालना हो या आंटे की गोली डालनी हो।

आपको तालाब में वो सारी व्यवस्थाएँ करनी चाहिये जिनसे आपकी मछलियां किसी भी प्रकार की बीमारी से बची रहें। इसके लिए आपको तालाब के माहौल के अनुसार ही मछलियों के बीज का चुनाव करना चाहिये। इस बारे मेंं आपको आपके क्षेत्र में पहले से मत्स्य पालन करने वाले सीनियर लोग जानकारी दे सकते हैं।

हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि हम पैसे कमाने के लिए मत्स्य पालन का बिजनेस कर रहे हें। आपको उस नस्ल की मछलियां पालना होगा जिनकी बाजार में मांग सबसे अधिक रहती हो । इससे आपको अधिक से अधिक लाभ प्राप्त होगा।

 

मछली के आहार की व्यवस्था कैसे करें?

जिस तालाब में मछली पालन का व्यवसाय करने की सोच रहे हैं , उसमे एक महीना पहले से ही गोबर का छिड़काव करना चाहिये । इससे मछली का बीज डालने के समय उन्हें भरपूर खाना मिल सकेगा।

आंटे का चोकर और आंटे की गोलियों को नियमित तालाब में डालें

ऐसा माना जाता है कि पानी में रहने वाली बत्तख को तालाब में पाला जाता है तो उसकी बीट को मछलियां खातीं हैं, इससे मछलियों का वजन भी तेजी से बढ़ता है।

 

फिश फार्मिंग के लिए लोन की सुविधा

मछली पालने के लिए कम ब्याज दरों पर स्थानीय बैंकों से भी लोन मिल सकता है। किसान क्रेडिट कार्ड से भी लोन लिया जा सकता है।  मत्स्य पालन के लिए सरकार से भी लोन मिलता है। आप टैंक बनवाएं या तालाब बनवाएं सरकार अपनी ओर से 75 प्रतिशत तक लोन देती है। इसके बारे में मत्स्य विभाग से सम्पर्क किया जा सकता है।  इस बिजनेस के लिए आप 20 लाख रुपये तक का लोन आसानी से ले सकते हैं।

 

फिश फार्मिंग बिजनेस के लिए लागत एवं मुनाफा?

मछली पालन का व्यवसाय की लागत मत्स्य पालक की क्षमता  पर निर्भर करती है। फिर भी इस बिजनेस को शुरू करने में कम से कम 3 लाख रुपये लागत आती है। इसके बाद आप जितना अधिक चाहें इन्वेस्ट कर सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति कोई सा भी बिजनेस पैसे कमाने यानी मुनाफे के लिए करता है। इसलिये आपको भी मुनाफे की उम्मीद तो होती है।  जानकार लोगों का मानना है कि इस बिजनेस में 25 से 40 प्रतिशत तक का मुनाफा मिल सकता है।

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