गायत्री मंत्र के लाभ ( gayatri mantra ke labh in hindi )

गायत्री महामंत्र हिंदू धर्म का एक चमत्कारिक मंत्र है। इसे सभी मंत्रो में सबसे ज्यादा श्रेष्ठ माना गया है।इस मंत्र का 8+8+8 के छंद में रचना हुआ है। इस मंत्र को यजुर्वेद से और ऋगवेद के मंत्र से मिला कर बनाया गया है। इस मंत्र की महिमा ऋग्वेद में भी मानी गई है। इस मंत्र के उच्चारण से पहले इसका अर्थ समझना जरूरी है तभी ये फलकारक होता है। इस मंत्र की महता ‘ ॐ ‘ के बराबर मानी गई है। इस मंत्र से सवित देव की भी उपासना की जाती है। इस लिए गायत्री माता को सावित्री देवी भी कहा जाता है। इसे चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अर्थवेद का सार माना जाता हैं। गायत्री मंत्र से मुख्य रूप से सूर्य देवता की उपासना की जाती है। गायत्री माता से ही वेदों को उत्पति हुई है, इसी लिए गायत्री माता को वेदमाता भी कहा जाता है। गायत्री माता की पूजा ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव भी करते हैं। इस मंत्र के उच्चारण का कोई ऐसा समय नहीं है, जब उच्चारण नही किया जा सकता हो किंतु इसका उच्चारण दिन में तीन बार करना शुभ माना जाता है, एक तो सुबह सूर्योदय से ठीक पहले से सूर्योदय के ठीक बाद तक, दूसरा दोपहर में, तीसरा शाम को सूर्यास्त से ठीक पहले से सूर्यास्त के ठीक बाद तक फिर भी इस समय ले विपरीत किसी को मंत्र उच्चारण करने की इच्छा हो तो वह मन-ही-मन मौन रूप से इस महामंत्र का उच्चारण कर सकते हैं, और चमत्कारिक लाभ ले सकते हैं।

“ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात्।” 

अर्थ : उस प्राणस्वरूप, दुखनाशक, देवस्वरूप, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक परमात्मा का हम ध्यान कर रहे हैं। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

 

(1)  गायत्री मंत्र जप करने से हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मन शांत रहता है, मन के सारे दुख, सारे भय, शोक, द्वेष, पाप जैसी नकारात्मकता दूर होती हैं। हम मानसिक तौर पर जागृत होते हैं। मन शांत व एकाग्र होता हैं।

(2) इस मंत्र का उच्चारण करने से मुखमंडल पर चमक आती है और चेहरे पर निखार आता हैं।

(3) किसी भी कार्य में सफल होने के लिए रोज गायत्री महामंत्र का उच्चारण करना फलदायी होता है, व्यक्ति को हर सफलता प्राप्त होती हैं।

(4) गायत्री महामंत्र का जप करने से पितृदोष, कालसर्पदोष, राहु-केतु दोष तथा शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती हैं।

(5) नारियल का धूरा, शहद और घी के हवन करने से शत्रुओं का नाश होता है, और विरोधियों पर विजय प्राप्त किया जा सकता हैं।

(6) यह महामंत्र खास कर के विद्यार्थियों के लिए एक अमृत है, जिनकी याद्दाश्त अच्छी नहीं रहती, उन्हे लंबे समय तक याद नहीं रहता, इस महामंत्र के उच्चारण से याददाश्त अच्छी होने लगती हैं। स्मरण शक्ति बढ़ती हैं। एकाग्रता बढ़ती है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती हैं।

(7) जिन भी युवक या युवती के विवाह में बाधाएं आती रहती है, विवाह में विलम्ब हो रहा हो, उन्हे हर सोमवार को 108 बार गायत्री महामंत्र का उच्चारण करने से तुरंत लाभ मिलता हैं।

(8) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली में सूर्य के बलवान होने से नाम प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी होती है, सरकारी कामकाज में सफलता मिलती है, गायत्री महामंत्र भी सूर्य की उपासना करने की लिए उच्चारण किया जाता है खास कर के रविवार को इस मंत्र का उच्चारण लाभकारक होता है।

(9) जिस भी दंपति को संतान सुख प्राप्त नहीं होता उन्हें श्वेत रंग के वस्त्र पहन कर “यों” बीजमंत्र के साथ गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से संतान प्राप्ति होती है, संतान के स्वास्थ्य में सुधार होता है।

(10) वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के कुछ स्थानों में वास्तुदोष होते हैं जिनसे नकारात्मकता आती है, गायत्री मंत्र के उच्चारण करने से हम उन नकारात्मक प्रभाव से बच सकते है।

(11) किसी शुभ घड़ी में दूध, दही, घी और शहद मिलाकर 100 बार गायत्री मंत्र के उच्चारण करने से आंख और पेट की पुरानी-से-पुरानी या गंभीर-से-गंभीर समस्या ठीक की जा सकती है।

(12) गायत्री मंत्र के उच्चारण करने से क्रोध को शांत किया जाता है, अनेक तरह की बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है, रक्त संचार सही से होने लगता है, अस्थमा की समस्या का निदान किया जा सकता है, त्वचा को प्रकृतिक निखार मिलती हैं।

(13) जीवन की परेशानियों से उबरने के लिए, जीवन में आने वाली हर परीक्षा का सामना करने के लिए हिम्मत मिलती है, घर में दुख-दरिद्रता का नाश होता हैं।

(14) सुबह-सुबह मंत्र उच्चारण करने से दिन भर मन उत्साहित रहता है, मन में सकारात्मक विचार आते है, दोपहर में भोजन करने से पहले तीन बार मंत्र उच्चारण करने से भोजन अमृत के समान हो जाता है, रात को भी मन ही मन मंत्र उच्चारण कर के सोना लाभ प्रदान करता हैं।

(15) गायत्री महामंत्र का जप या उच्चारण करने से मन धर्म और सेवा कार्य में लगने लगता है, मन से अशुद्ध विचार दूर होने लगते है, विकार दूर होता हैं।

(16) बताया जाता है कि गायत्री मंत्र को जीवन का हिस्सा बना लेने वाले व्यक्ति का मन उदार हो जाता है और उसकी आशीर्वाद देने की क्षमता बढ़ती है, उसके आशीर्वाद भी फलित होने लगते है साथ ही किसी व्यक्ति को दिए हुवे श्राप भी फलित होने लगते हैं।

(17) गायत्री मंत्र से नियमित रूप से जुड़े लोगों की आंतरिक चेतना जागृत हो जाती है, उन्हे आने वाले अच्छे या बुरे समय का आभास होने लगता है, उन्हे सचोट पूर्वानुमान लगाने की शक्ति मिलती है।

(18) रोज गायत्री मंत्र करने से व्यक्ति जो भी स्वपन देखता है वो उसे पूरा कर सके इतनी क्षमता, हिम्मत, साहस मिलती है और उनके सारे स्वपन पूरे होने लगते हैं।

(19) गायत्री महामंत्र बच्चो को बचपन से सिखाने से उनके मन में संस्कृति का सम्मान बढ़ता है, बच्चे धर्म से जुड़ते है, अपने धर्म को समझते है, धर्म का मार्ग अपनाते हैं।

(20) घर में नियमित रूप से गायत्री महामंत्र के उच्चारण करने से घर की हवाएं शुद्ध होती है, मन में धैर्य रखने की क्षमता बढ़ती है, मन संतुष्ट रहता है, जीवन में खुशहाली आती हैं, स्वास्थ्य समस्या दूर रहती है।

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