आदतों का महत्त्व

इनाम बहुत तरीके के हो सकते है जैसे की शारीरिक चेतना जो कुछ खाने से होती है या फिर किसी पदार्थ के सेवन से या भावात्मिक चेतना जो प्रशंसा और आत्म बधाई के साथ आती है। 

आदतें भी याददाश्त और करने की तरह जरूरी होती है जो हमारे निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है। हम लोग शायद ही उन अनुभवों को याद रख पाए जिसने उन आदतों का निर्माण किया हो लेकिन जब वह आदते हमारे जीवन में आती है तब वह हमारी निर्णय लेने में एक बड़े भागिदार का खेल खेलती है। 

आदतों में संकेत, कार्यक्रम, और इनाम के साथ एक और चीज़ है जो आदातो को और भी शक्तिशाली बनती है और वह है – तृष्णा या इनाम को पाने की लालसा। और यह तृष्णा आपके मन में उपजती है वो भी इनाम पाने से पहले और जब आदते और भी आपके मन में पक्की होने लगती है तब आपका मन इनाम पाने से पहले इनाम को महसूस करता है जो तृष्णा के रूप में होती है और जब इस तृष्णा को संतुष्ट नहीं किया जाता इनाम से तब ये तृष्णा गुस्से या डिप्रेशन  परवर्तित होने लगती है। जैसे की मीठा खाने की आदत, आप जब सोफे में बैठते है और टीवी को ऑन करके अपने मनपसंद फिल्म लगते है तब आपके मन में ये संकेत जाता है की कुछ मीठा खाने की  ज़रुरत है और आपका हाथ आपके बगल  रखे उस मिठाई की डब्बे की ओर जाता है उस समय आपका दिमाग मिठाई को खाने से पहले स्वयं को इनामित कर रहा होता है वह तृष्णा होता है और जब आपको वह मिठाई का डब्बा अपने बगल में नहीं मिलता तो आप के दिमाग में और भी ऊर्जा उत्पन्न होती उसको पाने के लिए और यदि वह प्राप्त  लेता है तब दिमाग को संतुष्टि का अहसास होता है या इनाम प्राप्त करने की ख़ुशी होती है। 

आपकी आदतों की शक्ति आपके तृष्णा पर निर्भर करती है यदि आपका इनाम पाने की लालसा आपके असली इनाम से ज़्यादा  है तब वह आदत आपके दिमाग में काफी पकड़ बना चुकी होती है। यदि आपके मीठे खाने की आदत उतनी शक्ति शाली नहीं तब आपका दिमाग मीठे की जगह पर मोबाइल के इस्तमाल से भी संतुष्ट हो जाएगा परन्तु जिसके इनाम पाने की लालसा इनाम ज्यादा होती है उसको मिठाई के सिवा  और कुछ संतुष्ट नहीं कर पायेगा। जब दिमाग इनाम की लालसा इनाम से पहले ही करने लगता है तब दिमाग को उस कार्य से कोई नहीं भटका सकता।  और ये लालसा इतनी अधिक होती है की उसका इनाम पाने के लिए इंसान अपना नुक्सान करने  भी तैयार रहता है, जैसे की एक जुआ खेलने  वाले व्यक्ति की लालसा इतनी अधिक होती है की उसका चाहे जितना नुक्सान हो वह रुकता नहीं परन्तु इनाम को प्राप्त करने के लिए और बड़े डाव खेलने लगता है। 

हमारे दिमाग में कोई ऐसी बात पहले से नहीं बैठी होती की हम जैसे ही मिठाई के डब्बे को देखेंगे उसे हमें उठाने का मन करेगा और उसके बाद उस मिठाई में मिलायी गयी चीनी से हमारे मन के अंदर और भी गतिविधियाँ होंगी। जब हमारा दिमाग इस बात को सीख लेता है की यदि ‘ मैं मिठाई खाऊँगा तो मुझे अच्छा लगेगा ‘ तब आपका दिमाग उस चीज़ की लालसा करने लगता है, और जब आप उस मिठाई के डब्बे को नहीं प्राप्त पाएंगे जो आपके मन में लालसा को उत्पन कर रही थी तब आपको मन में निराशा महसूस होगी।  

जब आपका मोबाइल बजता है और उस पर किसी का सन्देश आया होता है और उसे आप खोल कर नहीं देख पाते क्यूँकि आप अपने दफ्तर के किसी कार्य से व्यस्त रहते है या कार्यालय की किसी बैठक में व्यस्त रहते है तब तक लोगो के मन में उसकी लालसा इतनी ज़्यादा बन चुकी होती है की वह अपने बैठक के दौरान ही अपने मोबाइल फ़ोन को चेक करने लगते है चाहे वह किसी कमपनी का क्यों न कोई सन्देश हो, और अगर कोई आपके मोबाइल से उस बजने की आवाज को हटा दे तब लोग अपने कार्य में ज़्यादा समय तक लगे रहते है और वो भी बिना रुके।   

तृष्णा की शक्ति को समझने के लिए, लोगो के एक समूह के शोध किया गया जिससे शोधकर्ता ये समझ सके की क्या वह कारण है जो लोगो को दैनिक व्यायाम करने के लिए उत्साहित करता है। जब शोधकर्ताओं ने उन लोगो से पूछा की कैसे उन्होंने अपने दैनिक व्यायाम के कार्य को करना शुरू किया तो लोगो ने अपना कारण बताते हुए कहा की उन्हें जीवन में तनाव को काम करना था और व्यायाम एक अच्छा तरीका था या वह अपने सेहत को और बेहतर बनाना चाहते थे। लेकिन जब उन्होंने अपने कारणों और समझाना शुरू किया तो यह पता चला  एक प्रकार के इनाम की लालसा कर रहे थे जो उनको व्यायाम करने से मिलती थी। 92 प्रतिशत लोगो ने ये कहा की वे व्यायाम करके ‘ अच्छा महसूस ‘ करना चाहते थे और उन्हें ये अच्छा महसूस इसलिए होता था क्यूँकि व्यायाम एक प्रकार का न्यूरो केमिकल का उत्पादन करता है जिससे उन्हें अच्छा लगता है। और 67 प्रतिशत लोगो ने ये भी कहा की उन्हें व्यायाम करके उपलब्धि की भावना महसूस होता है अपने हर दिन के प्रदर्शन पर नज़र रखकर और इतना स्व इनाम काफी था एक शारीरिक कार्य को एक  आदत में बदलने के लिए। 

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