आदतों का बदलाव

इसलिए यदि आप सुबह उठकर अपने गार्डन में व्यायाम करना चाहते या प्रतिदिन अपने सुबह के सैर पर जाना चाहते है तो आपको आसान संकेतो का इस्तमाल करना चाहिए जिससे आप अपनी आदतों की शुरुआत कर सके जैसे की अपने व्यायाम के कपड़ो के अपने बिस्तर के पास में रखना। इसी के साथ एक स्पष्ट इनाम की आवश्यक्ता है जैसे की एक बार दिन में किसी अच्छे खाने से अपने को इनामित करना या फिर अपने उपलब्धियों की भावना को कही पर लिख कर रखना जिससे आप अपने आप को स्व इनामित कर सके। और जब आपका मन स्वयं ही इन इनामो की लालसा करने लगे तब यह सारे कार्य आपके आदतों में शामिल पाएंगे।

यदि कोई व्यक्ति नयी आदतों को बनाने के लिए इस लालसा या तृष्णा का इस्तमाल कर सकता है। यदि आप ज़्यादा व्यायाम करना चाहते है तो कार्य में और संकेत डालना शुरू करे जैसे की आप जब अपने बिस्तर से उठे तब अपने व्यायाम की तयारी में लग गए जैसे की जूते पहनना या सीधे कपडे पहनकर अपने दरवाजे पर खड़े होकर थोड़ी देर चलना जिससे की आप अपने बड़े व्यायाम के हिस्से को शुरू कर सके। और इसी के साथ आप अपने आप को इनाम देना मत भूलिए क्यूंकि इनाम की लालसा ही आपके आदत को बनाने में आपको सफलता देंगी। इनाम के तौर पर आप अपने मनपसंद नाश्ते का भोजन कर सकते है या किसी किताब में हर दिन की उपलादियों को नोट कर सकते है, इसके साथ आपके व्यायाम के दौरान भी आपके शरीर को अच्छा महसूस होता है उस अहसास को प्राप्त करने भी एक प्रकार का इनाम होता है। आप इस इनाम की अपने मन के अंदर एक लालसा उत्पन करे, की कैसा होगा जब आप मनपसंद अपना नाश्ता कर रहे होंगे या उस भाव को महसूस करे जो आपको व्यायाम के दौरान महसूस होंगी। तब आपकी ये लालसा आपके कार्यो को एक आदत में बदल देंगी और आपको बिलकुल भी उस कार्य को करने में दिमाग नहीं लगाना पड़ेगा।

एक शोध में पाया गया की कैसे लोग वजन काम करने वाले अपने खान पान पर कैसे ज़्यादा देर तक डटे रहते है। और उन लोगो में पाया गया की 78 प्रतिशत लोग उस खान पान को दिनभर में लागू करने के दौरान उनके मन में एक लालसा होती की जैसे अपने आप को रोज़ शीशे में देखना या फिर वजन नापने वाली उपकरण पर रोज अपना वजन देखना। और इस कारण से उन लोगो को ज़्यादा सफलता मिलती बजाए की उन लोगो से जो अपने वजन को कम करने के लिए सिर्फ अपने खान पान पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते है।

आप अपनी आदतों का बदलाव तब ही कर सकते है जब आप आदतों के कार्यक्रम में बदलाव लाते है संकेतो और इनामो को वैसा ही रखते हुए। एक बार डॉक्टर के पास एक लड़की आती है और उसे अपने नाखून चबाने की आदत थी और यह इससे छुटकारा पाना चाहती थी डॉक्टर को पता था की आदते कैसे कार्य करती है। डॉक्टर ने लड़की से कहा की वह अपने सारे उन चीज़ो को लिखे जो जिससे उन्हें दाँतों को चबाने का ख्याल आता है और लड़की ने एक – एक कर अपने संकेतो को डॉक्टरों को बताना शुरू किया। लड़की ने डॉक्टर से बताया की जब वह अपने स्कूल के कार्य को करती है या पड़ना शुरू करती है तब उसके उँगलियों के बीच में एक खुजली सी महसूस होती है और उसकी उंगलिया नाखूनों को महसूस करना शुरू कर देती है, और जब उन्हें नाखून की बाहरी किनारो पर कोई उबड़ खाबड़ नाखून का महसूस होता है तब वह अपने दातो से उस नाखून को चबाने लगती है। डॉक्टर ने लड़की से कहा की जब भी उन्हें अपने नाखून को चबाने का मन करे तब वह अपने हाथ को अपने को जेबो के अंदर दाल ले और अपने हाथ की त्वचा पर रगड़ना शुरू कर दे जिससे की उनके एक अन्य प्रकार की शारीरिक भावना का महसूस कर सके और लड़की ने जैसा डॉक्टर ने कहा वैसा ही किया। जब उसे अपने हाथो में खुजली सी महसूस होती है तब वह अपने हाथों को अपने जेब में रख लेती थी या फिर किसी चीज़ के नीचे दबा लेती थी और फिर वह अपने उँगलियों को अपने हाथो को रगड़ने लगती थी या फिर अपने उँगलियों को अपने किसी चीज़ से सहलाती थी उन्हें जिससे उन्हें किसी प्रकार का शारीरिक भाव को महसूस होने लगे और धीरे धीरे उनकी बेचैनी स्वतः ही कम हो गयी और हर हफ्ते बाद में लड़की स्वयं को इनाम देने के लिए अपने हाथो का मैनीक्योर भी करवाती थी, और कुछ समय के अंदर उन्होंने पाया की उनकी ये आदत सफल हुई और उनकी अब उंगलयों में उतनी उलझन सी महसूस नहीं होती थी।

डॉक्टर को पता था की यदि हमें अपनी पुतनी आदतों को बदलना है तो हमें नयी विकास करना होगा और उन्हें पता था की आदते कैसे चलती है की उन्हें पहले संकेत होता है और जिससे में कार्यकर्म जाती और आंत में वे अपने इनाम को प्राप्त करती है। और डॉक्टर ने सिर्फ नयी आदत को डाला वो पुरानी आदते के संकेतो पर जिससे जैसे ही दिमाग को संकेत की भावना का महसूस हो वे अपननए कार्यकर्म गए और अंत में उसको वही इनाम मेले जो उसको पहले मिलता था। तो यदि आपको नयी आदते बनानी है तो या तोह आप नए संकेतो को बनाना शुरू करे या यदि आपको अपनी पुराणी कोई बुरी हाथना होता है तोह अपने उन्ही संकेतो का मको दीजिये जो मिलते थे परनतु अपने कार्यकर्म बदल दीजिये।

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