आदतें और जीवन

दिन भर में हम जितने भी निर्णय लेते है वह आपको लग सकता की वह एक सोचा समझा निर्णय परन्तु वह नहीं होते। वह सब आपकी आदतों का नतीजा होता है। एक प्रयोग के शोध में ये पाया गया की ४० प्रतिशत कार्य जो हम करते है वह हमारे निर्णयों के वजह से नहीं परन्तु हमारी आदतों की वजह से होता है। 

इंसान का दिमाग, प्याज़ की परतो की तरह कई परतों से बना हुआ है और दिमाग के सबसे ऊपरी परत विकासवादी दृष्टिकोण से सबसे हाल का जोड़ होती है। जब आप अपने सपनो में कोई नए यन्त्र का आविष्कार कर रहे होते है या अपने दोस्त के चुटकुलो पर है रहे होते है तब आपके दिमाग का यह भाग कार्य में होते है। दिमाग का सबसे ऊपरी भाग  सबसे जटिल सोचो का हिस्सा होता है। 

जैसे जैसे हम दिमाग के और गहराई में जाने लगते है जहा रीढ़ की हड्डी आपके दिमाग से जुड़ती है वहा पर सांस लेना और दिल की धड़कन के कार्य संचालित होते है  जिसमे ज्यादा आपको सचेत सोचो की आवशकता नहीं पड़ती। और जब आप दिमाग के मध्य में पहुँचते है तब आपको बेसल गैंग्लिया नाम का हिस्सा पाया जाता है जो आपके आदतों का जिम्मेदार  है।

आपकी आदते आपके मन के सोचने के कार्य को बंद कर देती है। जैसे जब आप शुरुआत में कार चलना सीख रहे थे तब आपको सोचना पड़ता था की कार के पेडल पर दबाव हल्का करना है जब कोई गति ब्रेकर आये या वह बाये मोड़ पर इंडिकेटर को ऊपर या नीचे करे और जैसे जैसे ये कार्य आप हर दिन करने लगते है उतना ही इन सभी कार्यो में सचेत मन का इस्तमाल काम होने लगता है और आपकी आदते आपके कार्यो पर हावी हो जाती है जिससे की मानसिक ऊर्जा का काम से काम उपयोग हो।  इसलिए जब अगली बार कोई गति ब्रेकर आता है तो आपके मन का वह हिस्सा जो आदतों के लिए ( बेसल गैंग्लिया ) वह कार्य में आजाता है और आपके सचेत मन जो अन्य जटिल सोच और ख्याल की जगह होती है वह खाली हो जाता है, इसलिए इस बार जब आप गति ब्रेकर पर पेडल पर पाँव की दबाव को काम ज़्यादा करते है तब आप अपने सचेत मन को अन्य कार्य के लिए खाली छोड़ देते है जैसे की मोबाइल फ़ोन पर अपने दोस्त से बात करना उसी वक़्त। 

शोधकर्ता इसलिए कहते है की आदते इसलिए उत्पन्न होती है की वह आपकी मानसिक शक्ति को बचा सके जिससे की वह अन्य महत्पूर्ण कार्यो को जगह दे सके। लेकिन ये आदते बहुत ही ख़तरनाक भी हो सकती है जैसे की कोई तेज रफ़्तार से चलता हुआ कोई वाहन जब आप उस गति ब्रेकर के पास पहुंचते है। इसलिए मन ने एक चतुर प्रणाली बनायीं है की कब आदते आपके मन पर हावी  सके। इसलिए जब आदतों की शुरुआत होती है तब मन अपनी काफी शक्ति उस संकेत को ढूंढने में देता है जिससे वह समझ सके की कौन से पैटर्न को इस्तमाल करना है। 

यह प्रक्रिया हमारे दिमाग के अंदर तीन कदमो में होती है – पहला, संकेत जो आपके दिमाग को स्वचालित या ऑटोमैटिक मोड में दाल देता है और उसको बताता है कौन सी आदतों का उसको इस्तमाल करना है। फिर आता है नियमित कार्यक्रम, जो शारीरिक या मानसिक या भावनात्मक होता है। और आखिर में इनाम होता है, जिससे दिमाग को या पता चलता है की एक विशेष कार्य लूप या पाश याद रखने लायक है या नहीं। 

आदतों के इस लूप की जानकारी इतनी जरूरी इसलिए है की यदि आप अपनी पुरानी आदतों को छोड़ना चाहते है तो आपको नयी आदते बनानी होंगी क्यूँकि आपकी पुरानी आदते की यादाश कभी ख़तम नहीं होती वह हमेशा आपके बेसल गैंग्लिया में होती है और जैसे उसको संकेत मिलता है वह कार्य में आजाती है और आपका सचेत दिमाग निर्णय लेने का कार्य तब रोक देता है। इसलिए आदते या तो नज़र अंदाज़, या उसकी जगह कोई नयी आदत ले सकती है परन्तु पुरानी आदते कभी बदलती नहीं है। 

दिमाग के साथ सिर्फ ही तकलीफ है की वह नहीं पहचान पता की कौन सी आदते अच्छी है या कौन सी आदते ख़राब। और ख़राब आदतों को अपनना और भी आसान होता है क्यूँकि उसमे इनाम जल्दी मिल जाता है जैसे के चीनी की मिठास से मीठी चीज़ो की लत लगना परन्तु यही पर अच्छी आदतों के इनाम में थोड़ा वक़्त लगता है जैसे रोज़ व्यायाम करने का असर आपको तुरंत नहीं होता परन्तु आप यदि लगातार करते रहेंगे तो आपको कुछ दिनों में इसका परिणाम मिल जाएगा।  इस परिणाम के इनाम की देरी से आप बुरी आदतों के चपेट में जल्दी आ जाते है। 

आदते आपके दिमाग के लिए एक तरीके आवश्यक भी है क्यूँकि यदि हम दैनिक कार्यो के हर चीज़  के बारे  सोचेंगे तो हमारा मन बहुत सारे इन्ही ख्यालो से जूझता रहेगा। जब किसी वजह से बेसल गैंग्लीअ में किसी तरह की चोट आती है तब उनको अपनी हर छोटी से छोटी दिनचर्या के कार्यो को करने में तकलीफ होने लगती है। वह अपने दिन के महत्वहीन विवरण या कार्यो पर अपने सचेत मन का उपयोग करने लगते है और जिस कारण से उनका दिमाग दैनिक कार्यो में ही झुझता रहता है। बिना बेसल गैंग्लीअ के हम अपने दिनचर्या के कार्यो की एक पुस्तकालय को खो बैठते है जैसे की क्या आप यह सोचते है की आपको अपने दांतो में ब्रश कैसे करना है या आपको कौनसा जूता किस पैर  पहनना है।

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