हेनरी फोर्ड का जीवन पहला भाग

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

आज हम बात करने जा रहे हेनरी फोर्ड की।  जब आप हेनरी फोर्ड के बारे में पड़ेंगे तोह आपको पता चलेगा की कुछ महान करने के लिए किसी डिग्री की आवशकता नहीं है। 

हेनरी फोर्ड का जनम ३० जुलाई १८६३ में हुआ था।  हेनरी फोर्ड का अपने माँ के प्रति काफी लगाव था वह अपनी आत्मकथा में बताते है की उनके पिता दमनकारी थे और वह हेनरी फोर्ड के ऊपर काफी दबाव बनाते थे खेतो पर काम करने के लिए।  उनके पिता जी हेनरी फोर्ड से कहते थे की सपने मत देखो और उनके साथ चल कर खेतो पर काम करो और उनके जैसे कईओ ने सपने देखे होंगे आज सब वही है।  और क्यूंकि हेनरी फोर्ड के उनके माँ के साथ बहुत ही सम्बन्ध थे वह उससे के कारण खेतो में जाया करते थे, क्यूंकि उनकी माँ उनका बहुत ख्याल करती थी।

हेनरी फोर्ड को बचपन से ही अपने आस पास के यंत्रो को देखकर बहुत आचार्य होता था की ये कैसे काम करती है और इसी जिज्ञासा ने उन्हें काफी आगे तक पहुंचाया।  हेनरी फोर्ड के पिता एक किसान थे और वे चाहते थे हेनरी फोर्ड भी आगे जाकर एक खेत में काम करे।  पर एक आज़ाद पंछी को कौन ही कैद कर सकता था तब क्या था एक दिन हेनरी फोर्ड सब छोड़ कर घर से भाग गए। 

१८७६ में हेनरी फोर्ड जब सिर्फ तेरा साल के होते है तब उनके माँ का निधन हो जाता है और हेनरी फोर्ड इस वजह से काफी निराश हो जाते है। हेनरी फोर्ड अपनी माँ के बारे में दिन रात सोचने लगते है और ध्यान हटाने के लिए वह दिन रात मशीन में लगा देते है।  

हेनरी फोर्ड के पिता चाहते थे की हेनरी फोर्ड अपने पारिवारिक खेत में आकर काम करे और बेकार के सपने देखना छोड़ दे।  परतु ये बात हेनरी फोर्ड को हज़म नहीं थी और उन्हें खेत पर काम करने से सख्त इंकार था।  इसी वजहों से हेनरी फोर्ड १६ साल की उम्र में अपने घर को छोड़ देते है और एक मशीनिस्ट का काम ढूंढ लेते है डेट्रॉइट में। 

उसके बाद हेनरी फोर्ड क्लारा जेन ब्रयांट से शादी कर लेते है और उनका एक बच्चा होता है जिसका नाम एडसेल फोर्ड होता है। एडसेल फोर्ड एक बहुत ही सभ और अच्छे इंसान थे परन्तु हेनरी फोर्ड उतने ही उनपर सख्त थे। हेनरी फोर्ड अपने बेटे एडसेल फोर्ड को जब अपने फैक्ट्री में कार्य करते थे तब हेनरी फोर्ड अपने बेटे को सख्त से सख्त और कठिन से कठिन परेशानियों को हल करने के लिए देते है।  क्यूँकि  हेनरी फोर्ड इतने कठिनायों का सामना किया था तोह वह अपने बच्चे को भी यही समझाना चाहते थे की दुनिया में उन्हें कठिनायों का सामना करके ही कुछ मिल सकता है। 

एडसेल फोर्ड ने हेनरी फोर्ड को कभी भी निराश नहीं किया और सारा काम बिलकुल सही और समय से करके हेनरी फोर्ड को देते थे।  

१८९० तक हेनरी फोर्ड ने डेट्रॉइट के सबसे बड़ी कंपनी जो की एडिसन कंपनी थी वह पर कार्य करना शुरू किया और देखते ही देखते १८९३ तक वह एडिसन के कंपनी के चीफ इंजीनियर भी बन गए।  

इस स्थान पर पहुँचने के बाद हेनरी फोर्ड के पास काफी पैसा और समय था।  अब उनका पूरा ध्यान अपने प्रयोग में लगाने लगे।  हेनरी फोर्ड का सपना था की वह एक सस्ती कार का निर्माण करे पर यह इतना आसान भी नहीं था।  पहले बग्गिया चलती थी जिसमे घोड़े गाड़ियों को आगे चला रहे होते थे और हेनरी फोर्ड चाहते थे की वह एक कार का निर्माण करे जिसके लिए उन्हें इन्वेस्टर चाहिए थे।

हेनरी फोर्ड हॉर्स कैरिज बनाने में सफल हो गए और  1896  उन्होंने  ऐसी मशीन बना ली जो बिना घोड़े के चलती थी।  हेनरी फोर्ड अपनी गाडी को रात में गलियों में लेकर टेस्ट किया करते थे और उन्हें देखकर सभी लोग चौकन्ना रह जाते थे कि यह कौन सी मशीन है। हेनरी फोर्ड ने उस मशीन को बना तो लिया था परंतु उसमें अभी भी कई खामियां थी जैसे उसमें कोई रिवर्स गियर नहीं था और साथ ही बीस मील से ज्यादा आगे नहीं जा सकती थी लेकिन वह काफी सस्ती थी। हेनरी फोर्ड ने उसका नाम क्वाड्रा साइकिल का नाम दिया था एक ऐसी साइकिल जो चार पहियों पर चल सकती है और एक इंजन से चलती है। 

उस समय पर सबसे बड़ा प्रयोग था क्योंकि ऐसा किसी ने अभी तक देखा नहीं था और  जितने भी अमीर लोग थे उस समय में और जितने भी इन्वेस्टर थे उन्होंने इसे एक बहुत बड़ी बिजनेस के रूप में आगे देखने लगे हैं और सारा का सारा पैसा हेनरी फोर्ड की कंपनी में लगा दिया। परंतु जब इन्वेस्टर ने पाया कि हेनरी फोर्ड अपने बताए हुए समय पर निर्धारित कारों का निर्माण नहीं शुरू कर रहे और अभी भी कार को और अच्छा करने में लगे हुए हैं तब इन इन्वेस्टर ने हेनरी फोर्ड से जवाब मांगा, इस कारण से हेनरी फोर्ड इन्वेस्टरों से नफ़रत करते थे। 

और इसी तरीके से हेनरी फोर्ड ने अपनी कंपनी की स्थापना की इसका नाम डेट्रॉइट  ऑटोमोबाइल कंपनी रखा गया।  हेनरी फोर्ड ने विलियम हेयरवेज की मदद के साथ एक ऐसी कार डिजाइन करी जिसकी हॉर्स पावर 26 हॉर्स पावर के बराबर थी और इसकी मदद से वह गाड़ियों के बीच में रेस किया करते थे। 

एक ऐसी ही बड़ी रेस होने वाली थी जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स काफी बड़े कार के निर्माता भी भाग लेने वाले थे साथ ही हेनरी फोर्ड उसी रेस में अपनी 26 हॉर्स पावर की कार पहली बार उतारने वाले थे। पहले लैप में हेनरी फोर्ड की कार बहुत ही धीरे निकली परंतु आखिरी लैप पर हेनरी फोर्ड की कार सबको पीछे छोड़ कर काफी आगे निकल गई और इस बात का बहुत ही साफ तरीके से पता चल गया की हेनरी फोर्ड अमेरिका के सबसे बड़े और सबसे तेज कार के निर्माता है। 

हेनरी फोर्ड अपनी खुद की कंपनी जिसका नाम हेनरी फोर्ड मोटर्स था अपने सबसे करीबी दोस्त के साथ शुरू कर दी और जून 16 1903 में इसकी स्थापना कर दी $28000 के साथ फिर उसके बाद हर जगह हेनरी फोर्ड का ही नाम होने लगा।

हेनरी फोर्ड का जीवन [ दूसरा भाग ]

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