होली का निबंध हिंदी में ( Holi nibandh in hindi )

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

जब सारी प्रकृति यौवन यानी की बसंत ऋतु से सराबोर रहती है तो मनुष्य भी आनन्द से झूमने लगता है होली पर्व इसी का तो प्रतीक है। इस रंगीन उत्सव के समय पूरा वातावरण खुशहाली से भरा रहता है। होली के त्यौहार को मनाने के लिए इस दिन स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में सरकारी छुट्टी होती है।

जिस तरह मुसलमानों के लिए ईद का त्यौहार, ईसाईयों के लिए क्रिसमस का त्यौहार जितना महत्व रखता हैं उसी तरह हिन्दुओं के लिए भी होली के त्यौहार का भी बहुत अधिक महत्व होता है। होली का त्यौहार अब इतना लोक जनप्रिय हो चुका है कि यह त्यौहार केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोगों को पसंद आता जा रहा है। भारत के अतिरिक्त बहुत से देशों में भी अब लोग होली का त्यौहार मनाने लगे हैं।

होली हिंदू धर्म को मानने वालों का एक महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। जिसे हिंदू के साथ अन्य धर्मों के लोग भी बहुत धूम-धाम से रंग बिरंगे रंगों के साथ बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। होली के त्यौहार के उपलक्ष्य में सभी लोग एक-दूसरे के घर जा कर बधाइयां देते हैं, नाचते- गाते हैं, रंग अबीर लगाते हैं और मिठाइयां खाते हैं, होली के दिन पर लोग अपने घरों में अलग-अलग तरह के मिठाइयां और पकवानों को बनाते हैं। होली पर निबंध अकसर लिखने के लिए छात्रों से परीक्षाओं में भी पूछा जाता रहा है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको होली के बारे में सभी जानकारियां देंगे। जैसे होली क्यों मनाई जाती है ? होली कब मनाई जाती है ? और होली के उपलक्ष्य में क्या – क्या किया जाता है आदि लेख के माध्यम से आपको विस्तार पूर्वक बताया जा रहा है।

भारत त्यौहारों का देश है इसीलिए यहाँ लगभग हर दिन ही कोई – न – कोई त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। भारत का होली का त्यौहार विश्व प्रसिद्ध है। होली का त्यौहार हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा त्यौहार है। इस त्यौहार को रंगो के त्यौहार के नाम से भी जाना जाता है। होली का त्यौहार भारत के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा जैसे कई अन्य देशों में भी प्रसिद्ध है।

खास बात तो यह है की इस त्यौहार को सभी वर्गों के लोग मनाते हैं। वर्तमान में तो अन्य धर्मों को मानने वाले लोग भी इस त्यौहार को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। प्रकृति भी एक तरह से इस त्यौहार में सम्मिलित होती है। चारों ओर रंग बिरंगे फूल बिखेर कर बसंत ऋतु वातावरण में खुशियाँ लुटाती है।

यह खुशियां बांटने वाला त्यौहार है, इस दिन सभी लोग एक दूसरे से गले मिलकर खुशी-खुशी इस त्यौहार को मनाते है। इस त्यौहार में ऐसी शक्ति है कि वर्षों पुरानी दुश्मनी को भुला कर दोस्ती में बदल लेते हैं । इसीलिए होली को सौहार्द का त्यौहार भी कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि होली का त्योहार कई हजारों वर्षों से मनाया जा रहा है।

होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, साथ ही यह मौज-मस्ती और अल्हड़पन का भी प्रतीक है। होली को ना जाने लोगों ने कितने रूप दिए हैं, बचपन की होली हो या बुढ़ापे की उल्लास हमेशा एक जैसी ही होती है। इस पर एक मशहूर गाना हमेशा याद आता है ‘होली के दिन दिल खिल जाते है रंगों में रंग मिल जाते है।’

 

होली क्यों मनाई जाती हैं?

होली से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। विष्णुपुराण की कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने राज्य में विष्णु पूजा पर प्रतिबंध लगा रखा था। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद विष्णु के परम भक्त हुए और हमेशा प्रभु भक्ति में लीन रहते थे। सारी नाकाम कोशिशों को करके भी प्रह्लाद को भगवान की भक्ति करने से रोक पाने में असफल रहने पर असुर राजा ने प्रह्लाद को मारने का आदेश दे दिया। उसने प्रहलाद को हाथी के पैरों तले कुचलने और पहाड़ से फेंककर मरवाने का आदेश दिया। फिर भी जब प्रहलाद को मार नही सका तो हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की मदद से प्रह्लाद को जलाकर मारने की योजना बनाई। होलिका को ब्रह्मा जी से यह वरदान में एक शॉल मिला था जिसे ओढ़ने के बाद कोई भी अग्नि में नहीं जलता। इसलिए लकड़ियों के ढेर पर वह प्रह्लाद को गोद में लेकर खुद शॉल ओढ़कर बैठ गई और उसमें आग लगवा दिया गया। होलिका की गोद में बैठकर भी बालक प्रह्लाद भगवान का नाम जपता रहा और प्रहलाद बाल भी बाँका नहीं हुआ जबकि वरदान प्राप्त होलिका अपनी दुष्ट इच्छाओं के कारण वहीं जलकर भस्म हो गई। बुराई पर अच्छाई की जीत की याद में तभी से ही होलीका दहन और होली का त्योहार मनाया जाता है।

 

होली से जुड़ी कुछ सामाजिक कुरीतियां

होली जैसे धार्मिक महत्व वाले पर्व को भी कुछ लोग बदनाम करने से बिल्कुल नहीं चूकते हैं। कुछ असामाजिक तत्व मादक पदार्थों का सेवन कर हर जगह हंगामा करते नजर आते हैं। कुछ लोग होलिका दहन के दौरान टायर आदि को जलाते हैं, उनको इस बात का अंदाजा नहीं होता कि इससे पर्यावरण को काफी अधिक क्षति होती है। कुछ लोग रंग और गुलाल की जगह पर पेंट और ग्रीस लगाने का भी गंदा काम करते हैं जिससे लोगों को शारीरिक नुकसान होने की आशंका रहती है। अगर में होली में इन कुरीतियों को दूर रखा जाए तो होली का पर्व वास्तव में सुंदर होली बन जाएगा।

होली अपने दुखों को भूल कर भविष्य में आने वाले जीवन को सँवारने, पुराने गीले शिकवे भूल कर नये रिश्ते बनाने तथा बुराइयों को छोड्‌कर अच्छाई की ओर चलने के निश्चय का त्योहार है। होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार से सीख लेते हुए हमें भी अपने अंदर की बुराइयों को छोड़ते हुए अच्छाई को अपनाना चाहिए। इस त्यौहार से एक और सीख हमे मिलती है कि कभी भी हमें अहंकार नहीं करना चाहिए क्योंकि अहंकार इंसान के सोचने समझने की शक्ति को क्षीण कर देता है।

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