क्रिया के कितने भेद होते हैं? ( Kriya ke kitne bhed hote hain )

हिंदी भाषा में बात करने के लिए वाक्यों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। हम वाक्यों के द्वारा ही अपनी बात दूसरे को समझा सकते हैं। जब हम कोई भी वाक्य बोलते हैं, तो वो कई शब्दों का बना हुआ होता है, जैसे की संज्ञा या सर्वनाम, क्रिया, विशेषण इत्यादि। आज हम आपको क्रिया यानि verb के बारे में बताते हैं।

परिभाषा जिस शब्द से किसी भी कार्य का करना या होना पाया जाता है, उसे क्रिया कहते हैं।  जैसे कि – पढना, खेलना, दौड़ना, खाना, पीना, सोना, हंसना, रोना इत्यादि । हम क्रिया को इन उदाहरणों की सहायता से समझते हैं।

उदाहरण

 श्याम रो रहा है।

यहाँ पर रोया जा रहा हैं, इसलिए ये एक क्रिया है ।

 राम खाना खाता है।

यहाँ पर खाना खाया जा रहा है, इसलिए ये एक क्रिया है।

 हंसना बहुत जरुरी चीज होती है।

यहाँ पर हसने के बारे में बात हो रही है, इसलिए ये एक क्रिया है।

 

अब तक हमने समझा कि किसी काम के किये जाने को क्रिया कहते है। अब हम आपको क्रिया के बारे में विस्तार से समझाते हैं।  ये बात तो हम जान ही चुके हैं कि क्रिया एक ऐसा शब्द है जिसके जुड़ने या लगने से वाक्य पूरा होता है।

अब हम क्रिया के भेद के बारे में समझाते हैं।

 

क्रिया के भेद  –

क्रिया के मुख्य (main) रूप से दो भेद होते हैं –

(१) अकर्मक क्रिया ( Intransitive Verb )

(२) सकर्मक क्रिया ( Transitive verb )

 

अकर्मक क्रिया ( Intransitive verb ) –

परिभाषा वह क्रिया, जो अपने साथ कर्म नहीं लाये अर्थात् जिस क्रिया का फल या व्यापार कर्ता पर ही पड़े, वह अकर्मक क्रिया ( Intransitive Verb ) कहलाती है, या फिर जिस क्रिया का कार्य कर्ता (काम करने वाला ) तक ही सीमित रहे अर्थात जहाँ कर्म का भाव होता है उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं ।

 

उदाहरण

मीरा गाती है ।

यहाँ पर मीरा गाना गाती है, और उसका गाना उसी तक सीमित है, इसलिए यह एक अकर्मक क्रिया का उदाहरण हुआ।

 

मोहन खेलता है ।

यहाँ पर मोहन खेलता है, और उसका खेलना उसी तक सीमित है, इसलिए यह एक अकर्मक क्रिया का उदाहरण हुआ।

 

सकर्मक क्रिया  ( Transitive verb ) –

परिभाषा जिस क्रिया का फल कर्ता (जो काम करता है) पर न पड़कर कर्म पर पड़े, उसे ‘सकर्मक क्रिया’  (Transitive verb) कहते हैं।

उदाहरण

मीरा भजन गाती है ।

यहाँ पर मीरा भजन को जाती है, इसलिए यह एक सकर्मक क्रिया का उदाहरण हुआ।

 

मोहन फुटबाल खेलता है ।

यहाँ पर मोहन फुटबॉल को खेलता है, इसलिए यह एक सकर्मक क्रिया का उदाहरण हुआ।

 

क्रिया के कुछ अन्य भेद अब हम क्रिया के कुछ अन्य भेदों (other types ) के बारे में बताते हैं –

 

सहायक क्रिया (Auxiliary verb) सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ प्रयुक्त होकर अर्थ को स्पष्ट पूर्ण करने में सहायता करती है। जैसे की – वह फिसल गया।

 

पूर्वकालिक क्रिया जब कर्ता (किसी काम को करने वाला ) एक क्रिया को समाप्त कर दूसरी क्रिया करना प्रारंभ करता है तब पहली क्रिया को पूर्वकालिक क्रिया कहा जाता है। जैसे – राम भोजन करके सो गया। यहाँ पर राम ने दो काम किये, पहले भोजन किया और फिर सो गया, तो ये पूर्वकालिक क्रिया हुई ।

 

प्रेरणार्थक क्रिया जब कर्ता किसी कार्य को स्वयं न करके, किसी दूसरे को कार्य करने की प्रेरणा दे तो उस क्रिया को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।

जैसे 

मालिक नौकर से कार साफ करवाता है।

अध्यापिका छात्र से पाठ पढ़वाती हैं।

 इनमे कर्ता खुद काम न कर के दूसरो से करवा रहा है, अतः ये प्रेरणार्थक क्रिया के उदाहरण हैं।

 

संयुक्त क्रिया (compound verb) जब भी कोई क्रिया, दो क्रियाओं के संयोग से बनती है, तब उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं ।

जैसे

बच्चा विद्यालय से लौट आया ।

यहाँ पर दो क्रियाएं है, लौट और आया। तो ये संयुक्त क्रिया का उदाहरण हुआ। 

 

समस्त क्रिया  जो क्रिया दो धातुओं के योग से पूरी हो, तथा जिसमें दोनों धातुओं का अर्थ बना रहे, उसे समस्त क्रिया कहते हैं। जैसे– खेल-कूद, चल-फिर, मार-पीट, कह-सुन, उठ-बैठ,आदि ऐसी ही क्रियाएँ हैं।

 

सामान्य क्रिया  जब किसी वाक्य (sentence) में एक की क्रिया का प्रयोग हुआ हो, तो उसे सामान्य क्रिया कहते हैं।
जैसे– 

लड़का पढ़ता है।

वह खाता  है।

 

विधि क्रिया  विधि क्रिया उसे कहते है जिस क्रिया से की आज्ञा का पता चले।
जैसे 

यहाँ चले जाओ।

आप काम करते रहिए।

 इधर आ जाओ।

 

नामिक क्रिया  संज्ञा, विशेषण शब्दो के आगे क्रियाकार लगाने से क्रिया को नामिक क्रिया कहते हैं।

जैसे  दाखिल होना, सुनाई पड़ना, दिखाई देना आदि क्रिया-रूपों में – देना, होना, पड़ना आदि क्रिया के शब्द हैं।

 

 

 

Leave a Comment