मार्क ज़ुकेरबर्ग की जीवनी

बचपन में मार्क ज़ुकेरबर्ग पढ़ने में काफी अच्छे थे और वह अपनी हर कक्षा में अवल आया करते थे। उन्होंने मैथमेटिक्स, फिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी में कई सारे पुरस्कार भी अपने स्कूल में जीते हैं। 

मार्क ज़ुकेरबर्ग जब 13 वर्ष के थे तब उनकी दिलचस्पी कंप्यूटर के कोर्स के अंदर जाग गयी और कंप्यूटर किस प्रकार से काम करता है मार्ग को आकर्षित करने लगा। जब कुछ थोड़ा सीखने के बाद मार्क ज़ुकेरबर्ग के पिताजी ने उनको कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग सीखने का सोचा और जिसके लिए उन्होंने एक ट्यूटर को भी हायर किया था जो मार्क को कंप्यूटर के विषय के बारे में और रुचि बढ़ाने का कार्य किया। मार्क के पिताजी ने एक डेंटिस्ट होने की वजह से घर के पास एक ऑफिस खोल रखा था जिसमें बहुत सारे कंप्यूटर रहते थे, मार्क ने बचपन में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है कि उनके घर के कंप्यूटर उनके अपने पिता के ऑफिस के कंप्यूटर एक दूसरे से इंफॉर्मेशन का आदान प्रदान कर सकते थे, जिससे मार्क के पिता को बार बार अपने ऑफिस जाकर कंप्यूटर में सुधर नहीं करना पड़ता था। 

मार्क बताते हैं कि उनके बचपन में कुछ ऐसे मित्र थे जो बहुत ही अच्छा चित्रकला  करते थे। जब उनके दोस्त कोई नया चित्र बनाते थे तो उनके चित्र के मदद से वह अपने गेम को तैयार किया करते थे और इसी रूप से वह अपने गेम में अपने दोस्तों के बनाए हुए चित्र कला का इस्तेमाल कर अपने कंप्यूटर के गेम को पूरा करते थे। 

 जब मार्क जकरबर्ग का हार्वर्ड के अंदर दाखिला हुआ तो उन्हें कंप्यूटर के बारे में काफी ज्ञान हो चुका था और हार्वर्ड में उन्होंने कंप्यूटर साइंस एंड साइकोलॉजी के विषयों पर अपने आगे की पढ़ाई करने का निर्णय किया था। मार्क जकरबर्ग जब अपने पहले साल में थे कॉलेज में तब उन्होंने एक कोर्स मैच नाम की एक वेबसाइट भी बनाई जिसका इस्तेमाल कर लोग अपने पढ़ाई में कौन सा विषय चुनना है सहायता ले सकते थे। इसके बाद मार्क जकरबर्ग ने फेस स्मैश नाम का एक वेबसाइट बनाई।  इस वेबसाइट में उन लोगों का चेहरा दिखाया जाता था जो हार्वर्ड में पढ़ रहे थे और उस में से जो उनको अच्छा लगता था वह चयन कर सकते थे इसको मार्क जकरबर्ग ने सिर्फ मजे के लिए ही बनाया था। 

मार्क जकरबर्ग के इस वेबसाइट के कारण हार्वर्ड का नेटवर्क गिरने लग गया और इस  कारण से हार्वर्ड में अन्य छात्र इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे, जिसकी शिकायत हार्वर्ड के नेटवर्क इंस्पेक्टर को दी गई तब पता चला कि मार्क जकरबर्ग की वेबसाइट पर इतना ज्यादा ट्रैफिक आ चुका था कि उसकी वजह से हार्वर्ड का एक नेटवर्क स्विच काम करना बंद कर दिया था। इस वेबसाइट के लिए मार्क जकरबर्ग ने दूसरों की तस्वीरों को गलत तरीके से हासिल करा था वह हार्वर्ड के सर्वर को हैक करके अपने साथ में पड़ने वाले छात्रों के तस्वीरों को प्राप्त किया,  जिसके कारण उन्हें हार्वर्ड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर से भी माफी मांगने भी पड़ी। इसके बाद मार्क जकरबर्ग ने दूसरी वेबसाइट पर काम करना शुरू कर दिया जिसका नाम उन्होंने फेसबुक डॉटकॉम रखा साथ, जब उन्होंने इस वेबसाइट को इंटरनेट पर ऑनलाइन करा तो उसके छे: दिन के बाद हार्वर्ड के सीनियर जिनका नाम टाइलर विन्क्लेवोस और कैमेरॉन विन्क्लेवोस ने मार्क ज़ुकेरबर्ग को उनका आइडिया को चुराने का आरोप लगाया जो वह मार्क के साथ बनाने जा रहे थे, जिसका नाम उन्होंने हार्वर्ड कनेक्शन डॉटकॉम रखा था, और उनके साथ यह तय हुआ था कि अपने सीनियर की मदद करेंगे इस वेबसाइट को तैयार करने के लिए। पर इसके बजाय मार्क खुद ही इस वेबसाइट पर अकेले काम करना शुरू कर दिया और उन लोगों से पहले अपनी वेबसाइट को पूरा कर दिया जिसकी वजह से उन लोगों ने मार्क पर केस दर्ज कर दिया जिसकी वजह से मार्क को 1.1 मिलियन शेयर फेसबुक के अपने हिस्से से देने पड़े थे। 

जल्द ही मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक को हार्वर्ड के अलावा दूसरे विश्वविद्यालयों में भी फैलाना शुरू किया और धीरे-धीरे इसके उपभोगकरता १०० से १००० और १००० से १०००० हो गयी। इसी के साथ मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक को और विशाल बनाने के लिए अपने कुछ हावर्ड के दोस्तों के साथ कैलिफ़ोर्निया आ गए और वहां पर एक छोटे से घर के अंदर अपना एक ऑफिस बना दिया। और ये भी कहते की जब मार्क जकरबर्ग अपने आसपास के घरों से आने वाली आवाज़ों से परेशान हो गए थे तब  उन्होंने अपने आसपास के सरे घरों को खरीद लिया, इसी गर्मियों के दौरान मार्क को अपना सबसे पहले निवेशक मिला। उन्होंने मार्क ज़ुकेरबर्ग की कंपनी में पैसा लगाने का निर्णय किया और 2004 के मध्य तक मार्क ज़ुकेरबर्ग अपने दोस्तों के साथ अपने नए ऑफिस में आ गए। मार्क ज़ुकेरबर्ग सोच रहे थे कि वह अपनी डिग्री को प्राप्त करने के लिए वापस चले जाए परंतु इतनी बड़ी कंपनी उनका एक जुनून बन चुका था और वहां जाकर अपना समय व्यर्थ नहीं करना चाहते थे फेसबुक को खरीदने के लिए बहुत सारी कंपनियों ने मार्क को काफी अच्छे पैसे भी देने के लिए तैयार हो गई थी परंतु मार्क ज़ुकेरबर्ग ने किसी को भी फेसबुक को भी बेचने नहीं दिया।  2007 के इंटरव्यू ने मार्क ज़ुकेरबर्ग ने बताया कि यह इसलिए नहीं था कि पैसे उतना महत्पूर्ण नहीं था मेरे दोस्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज ये थी कि हम एक ऐसा सिस्टम बना सके जो ज्ञान का आदान-प्रदान लोगों के बीच बहुत ही आसानी से हो सके और यह क्षमता सिर्फ बड़ी कंपनियों के हाथों में होना बिल्कुल भी आम लोगों के लिए अच्छा नहीं था। 

मार्क जकरबर्ग बताते हैं कि कंपनी ने 5000 मिलियन उपभोक्ताओं को 21 जुलाई 2010 तक बना लिया था और वह फेसबुक के एडवर्टाइजमेंट से कई ज्यादा रकम कमा सकते थे क्योंकि फेसबुक इतनी तेज रफ्तार से बढ़ रहा था। 

फेसबुक के अंदर है हैकथॉन नाम का एक समारोह हर समय होता रहता है जिसमें उनके कर्मचारियों को फेसबुक के हेडक्वार्टर में करना होता है, इसमें इस इवेंट का एक ही काम होता है कि आप एक रात में बैठकर एक ऐसी कोई चीज बना सके जो काफी मजेदार हो और इससे इवेंट के दौरान कंपनी सब चीजों का इंतजाम करती है चाहे वह खाने से लेकर म्यूजिक तक क्यों ना हो और इसके साथ मार्क ज़ुकेरबर्ग खुद भी इस इवेंट में हिस्सा लेता हैं यह बताता है कि उनके आत्म चरित्र का एक बहुत बड़ा हिस्सा है। इस वजह से वह इस इवेंट को काफी पसंद करते हैं इसी के साथ 2010 में मार्क को सबसे ज्यादा इनफ्लुएंशल पीपल फॉर द फॉरमेशन का दर्जा दिया गया और और इसी के साथ बिजनेस इंसाइडर के द्वारा मार्क जकरबर्ग को टॉप टेन बिजनेस विजनरी क्रिएटिंग वैल्यू फॉर द वर्ल्ड का नाम भी पेश किया गया एलोन मस्क और साल खान के अलावा क्योंकि उनकी पत्नी ने 99% आप अपने जीवन की कमाई को देने का फैसला किया है जो लगभग 55 बिलियन डॉलर के करीब हो सकती है।

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