माइक टॉयसन की जीवनी – दूसरा भाग

माइक टायसन प्रोफेशनल बॉक्सिंग में उतरने के लिए पूरे तरीके से तैयार हो चुके थे और उनका सबसे पहली लड़ाई 18 साल की उम्र में 6 मार्च 1985 में अल्बानी, न्यूयॉर्क में हुई। माइक टायसन जिस से लड़ने वाले थे वह काफी जाने-माने बॉक्सर थे जिनका नाम हेक्टर मर्सिडीज था। किसी ने भी नहीं सोचा था कि माइक टायसन हेक्टर मर्सिडीज को हरा देंगे जब माइक टायसन ने हेक्टर मर्सिडीज को कुछ ही राउंड में अपने मुक्को से गिरा दिया, तब पूरीबॉक्सिंग की दुनिया माइक टायसन की खबरों से चकाचौंध होने लगी और माइक टायसन का काफी नाम होने लगा। 

अपने प्रोफेशनल बॉक्सिंग के पहले साल के अंदर माइक टायसन ने 15 लड़ाइयां लड़ी और कोई उन्हें नहीं हरा पाया। साथ ही उनकी पहली 28 लड़ाईयों के अंदर उनकी 26 लड़ाइयां पहले नॉक आउट से ही जीत ली थी और उसमें से 16 लड़ाईया में उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को पहले ही राउंड में गिरा दिया था इसके बाद माइक टायसन को काफी नाम और शोहरत मिली और सभी अखबारों में उनका नाम आने लगा। 

माइक टायसन और कस डी अमाटो का अगला लक्ष्य वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियनशिप का था परंतु कस डी अमाटो की तबीयत खराब होने लगी और जिसके कारण से उनकी मौत नवंबर 1985 में हो गई जिसके कारण यह सफर अब माइक को अकेले ही तय करना था।

अब माइक टायसन का वक्त आ गया था कि वह अपनी सबसे पहली हैवीवेट चैंपियनशिप की लड़ाई लड़े और माइक टायसन अभी सिर्फ 20 साल के थे उनकी हैवीवेट चैंपियनशिप नवंबर 22, 1986 में तय हुई और उनकी लड़ाई ट्रेवर बर्बिक के साथ होने वाली थी।  माइक टायसन ने ट्रेवर बर्बिक को दूसरे ही राउंड में नॉक आउट कर दिया। वह माइक टायसन के मुक्के को सह ना सके जिसके कारण उन्हें दूसरे राउंड में ढेर हो गए और यह बात बॉक्सिंग की दुनिया की सबसे बड़ी खबर बन गई। माइक टायसन सबसे छोटे बॉक्सिंग हैवीवेट चैंपियन बन गए और माइक टायसन का नाम मोहम्मद अली जैसे महान शख्सियत वाले लोगों के साथ रखने जाने लगा।  इतनी छोटी सी उम्र में इतने बड़े उलब्धि को जीतना कोई आसान बात नहीं थी लेकिन माइक टायसन ने से इतनी आसानी से जीत लिया था कि दूसरे इसे देखकर  हैरान हो गए थे और बॉक्सिंग की दुनिया में  यह लड़ाई इतिहास बन गया। 

1997 आते-आते माइक टायसन ने बॉक्सिंग की दुनिया की 3 सबसे बड़ी पदवी को अपने नाम कर लिया – WBA, WBC और IBF ख़िताब को एक ही समय पर जीत लिया और सबसे  पहले बॉक्सर बन गए जिन्होंने इन तीनों को एक साथ जीता हो।

इसी के साथ माइक टायसन को काफी ऐशो आराम और पैसा मिलने लगा माइक टायसन सिर्फ $100000 तो अपने कपड़ों पर ही खर्च कर दिया करते थे।   माइक टायसन की जिंदगी पूरी तरीके से बदल चुकी थी। उनका  रहना खाना-पीना बिल्कुल बदलने लग गया, आलीशान और अमीर लोगों की जिंदगी में आ गए और क्योंकि कस डी अमाटो का माइक टायसन के ऊपर से अब साथ नहीं था तो उनको अब सही राह दिखाने वाला भी कोई नहीं रहा इसके बाद माइक टायसन की जिंदगी में काफी तकलीफ भी आई। 

इसके बाद माइक टायसन के जिंदगी में रॉबिन गिब्बन आयी। जिन्होंने माइक टायसन की जिंदगी को पूरा बर्बाद करके रख दिया। रॉबिन गिब्बन एक मॉडल और एक काफी पढ़ी-लिखी इंसान थी। माइक टायसन रॉबिन गिब्बन से अपने किसी दोस्त के माध्यम से मिले थे और इसके बाद रॉबिन गिब्बन और माइक टायसन साथ में रहने लगे पहले साल तो सब कुछ बढ़िया जा रहा था। माइक टायसन और रॉबिन की  तस्वीरें मैगजीन और अखबारों में छपती थी। परंतु जैसे-जैसे वक्त बीतता गया रॉबिन  ने माइक टायसन पर बेबुनियाद आरोप लगाने लगी वह कहती थी कि माइक टायसन उन्हें मारा करते थे और वे स्वयं डिप्रेशन का शिकार थे।  यह सब आरोप बाद में फर्जी साबित हुए लेकीन इस कारण से माइक टायसन की पारिवारिक जिंदगी काफी खराब हो गई थी और उन्हें घर पर कभी सुकून नहीं मिलता था। 

कस डी अमाटो की सही दिशा ना दिखाने के कारण और रॉबिन गिवेन से पारिवारिक सुख ना पाने के कारण माइक टायसन के बुरे दिन आने वाले थे।  1990 तक माइक टायसन दुनिया के निर्विवादित हैवीवेट चैंपियन थे और किसी को भी नहीं लगता था कि माइक टायसन को कभी हराया जा सकता है लोग रिंग में आने से डरते थे।  परंतु माइक टायसन की सही से तैयारी के ना कारण उन्होंने अपना सबसे  पहली हार  जेम्स “बस्टर” डगलस से हुई 11 फरवरी 1990 में। 

 जेम्स “बस्टर” डगलस को माइक टायसन के हरानी की एक और कहानी जुड़ी है।  माइक टायसन से लड़ने से पहले बताया जाता है कि डगलस अपने बीमार मां के पास थे। और उनकी माँ की बीमारी की वजह से लड़ाई के एक दिन पहले ही उसकी मां की मृत्यु हो गई और मृत्यु से पहले उनकी माँ से एक चीज डगलस से चाहती थी और वह था माइक टाइसन को हराना।  डगलस ने अपना सब कुछ लगा दिया माइक टायसन को हराने के लिए माइक टायसन को टोटल नॉकआउट से ढेर कर दिया यह बॉक्सिंग की दुनिया में एक बहुत बड़ा झटका बन गया था। 

अगले 5 से 6 साल माइक टायसन के लिए बहुत बुरे साबित होने वाले थे  माइक टायसन ने अपने सारे पैसे को खत्म करना शुरू कर दिया और अपनी ट्रेनिंग को छोड़कर उन्होंने पार्टियां करना शुरू कर दी। माइक टायसन को काफी बार जेल भी जाना पड़ा लड़ाई और ड्रग्स के कारण। 

परंतु सबसे बड़ी गिरफ्तारी माइक टायसन की तब हुई जन 1991 में 18 वर्षीय एक लड़की से जबरदस्ती के आरोप में गिरफ्तार कर दिया गया और माइक टायसन को 6 साल की सजा दी गई।  उनके अच्छे व्यवहार के कारण माइक टायसन  की सजा ३ साल की बना दी गई और वहीं पर माइक टायसन इस्लाम में परिवर्तित भी हो गए माइक टायसन ने अपना नाम बदलकर अब्दुल अजीज रख दिया। 

माइक टॉयसन की जीवनी – तीसरा भाग

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