नीम के पत्ते के फायदे ( neem ke patte ke labh )

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

नीम पर्यावरण के लिए जितना अच्छा है, उतना ही स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माना जाता है। मनुष्य जाति नीम का उपयोग कई वर्षों से आयुर्वेदिक औषधि और घरेलू उपाय के रूप में करते आ रहे हैं। शरीर से जुड़ी कई छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए नीम के पत्तों से लेकर इसकी छाल तक इस्तेमाल किया जाता रहा है।  कई लोग नीम की पत्तियों का उपयोग खाने में भी शामिल करते हैं। इस लेख में हम आपको नीम के फायदे और नुकसान के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे। स्वाद में कड़वी होने वाली नीम की छोटी-छोटी लंबी पत्तियां एंटीबायोटिक गुणों से भरपूर हैं। इसके लाभ अमृत समान हैं। यह मनुष्य के लगभग हर समस्या का इलाज कर सकता है। सेहत के लिए बहुत उपयोगी और रामबाण होती हैं नीम की पत्तियां।

 

क्या है नीम?

नीम औषधीय गुणों से भरपूर एक पेड़ है, जिसके लगभग सभी भागों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इसका संबंध महोगनी परिवार से है और नीम का वानस्पतिक नाम अजादिरछा इंडिका (Azadirachta Indica) है।

इस पेड़ का जीवनकाल लगभग 150-200 साल तक का हो सकता है। अनुमान यह है कि भारत में लगभग लाखों नीम के पेड़  हैं। आयुर्वेद में नीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसका इस्तेमाल त्वचा संबंधी परेशानियों से लेकर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए किया जाता रहा है। इस लेख में आगे हम नीम के औषधीय गुण से लेकर नीम खाने के फायदे से जुड़ी कई सारी जानकारियों से आपको अवगत करावायेंगे।

 

एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर

आजकल एलर्जी और इंफेक्शन का खतरा हर किसी को हो सकता है और इसके पीछे का एक कारण नजर न आने वाले छोटे-छोटे बैक्टीरिया भी होते हैं। खासकर, यह समस्या बारिश के दिनों में और ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में नीम का उपयोग इससे बचाव में मदद कर सकता है। दरअसल, रिसर्च के मुताबिक, नीम एंटी बैक्टीरियल गुणों से समृद्ध होता है। एक अध्ययन से यह बात सामने आई है कि नीम पैथोजेनिक बैक्टीरिया के कारण होने वाले संक्रमण के उपचार के लिए एक प्रभावी एंटीबैक्टीरियल एजेंट के रूप में काम कर सकता है। नीम की पत्तियों में मौजूद क्वेरसेटिन और बी-साइटोस्टरोल पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड आदि में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों की पुष्टि हुई है। ऐसे में बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव के लिए नीम का उपयोग बेहद लाभकारी हो सकता है।

 

अल्सर के लिए नीम है बेहद उपयोगी

एक शोध के अनुसार, नीम के छाल का अर्क गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी और अल्सर पर सकारात्मक प्रभाव कर सकता है। नीम के छाल का अर्क औषधि की तरह काम करता है। एनसीबीआई के एक शोध के अनुसार नीम में एंटीअल्सर गुणों के होने का जिक्र किया गया है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि नीम का एंटीअल्सर गुण अल्सर से बचाव में एक महत्वपूर्ण सहायक भूमिका निभा सकता है। अगर किसी को अल्सर की समस्या है, तो बेहतर है व्यक्ति पहले डॉक्टर के परामर्श के अनुसार ही इलाज कराएं। साथ ही डॉक्टर के सलाह से ही नीम या नीम युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करना शुरू करे।

 

ओरल हेल्थ में भी नीम के कई फायदे

मुंह से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नीम का उपयोग किया जा सकता है। माना जाता है कि माउथ क्लीनर प्रोडक्ट, जिनमें नीम मौजूद होता है, वह प्रोडक्ट मुंह के स्वास्थ्य के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है। साथ ही नीम में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल गुण दांतों में प्लाक को बढ़ाने वाले स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन जैसे बैक्टीरिया को पनपने से रोक सकता है। इसके अलावा, एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर नीम की पत्तियां मुंह और मसूड़ों में सूजन की स्थिति को ठीक करने में मदद कर सकती हैं। साथ ही नीम मसूड़ों से ब्लीडिंग, दांतों की सड़न की समस्या से भी बचाव करता है । आज भी स्वस्थ दांत के लिए कई लोग नीम के दातून का उपयोग करते हैं। ऐसे में आप भी दांतों को मजबूत बनाने के लिए नीम के दातून का विकल्प आसानी से चुन सकते हैं।

 

मलेरिया रोग के उपचार में नीम का उपयोग

मलेरिया के प्रभाव और इसके लक्षणों को कम करने में नीम के पत्ते बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं। दरअसल, नीम की पत्तियां एंटीमलेरियल गुणों से भरी होती है, जो मलेरिया की दवा के रूप में काम करती है और इस समस्या से उबरने में मदद करती हैं । ऐसे में मलेरिया के उपचार के लिए डॉक्टरी इलाज के साथ-साथ नीम का घरेलू उपाय भी आजमाया जा सकता है। हालांकि, मलेरिया में नीम का उपयोग कैसे और कितनी मात्रा में करना है, इस बारे में डॉक्टर की परामर्श अवश्य ले लें।

 

पेट को स्वास्थ रखने के लिए नीम है उपयोगी

पेट के स्वास्थ्य के लिए भी नीम के पत्ते के बहुत फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, नीम का इस्तेमाल कई सालों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में अल्सर और अन्य प्रकार की पेट के गैस्ट्रिक समस्याओं के लिए एक किया जाता रहा है। एनसीबीआई की एक वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध में यह बात बताया गया है कि नीम शरीर से विषाक्त पदार्थों और हानिकारक जीवाणुओं को बाहर निकालता है। नीम का यह गुण स्वस्थ पाचन तंत्र में सुधार करने में बेहद सहायक हो सकता है। साथ ही यह पेट को स्वस्थ रखने में काफी अधिक मदद कर सकता है।

 

कोलेस्ट्रॉल स्तर को कम करता है नीम

नीम के पत्तियों का नियमित उपयोग कोलेस्ट्रॉल के लिए भी बेहद लाभकारी हो सकता है। दरअसल, एनसीबीआई ने इस संबंध में भी एक रिसर्च को प्रकाशित किया था। इस रिसर्च के अनुसार, नीम की पत्तियों का रस(अर्क) खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने में सहायक पाया गया है। फिलहाल, यह शोध चूहों पर किया जा रहा है। मनुष्यों पर इसके प्रभाव को जानने के लिए और अधिक शोध करने की आवश्यकता है। हालांकि, कोलेस्ट्रॉल की समस्या से बचाव के लिए नीम का उपयोग किया जाता है। अगर किसी को कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो वह डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा और कोलेस्ट्रॉल कम करने की डाइट में नीम के उपयोग करने की सलाह जरूर लें।

 

घाव और रैशेज में नीम है फायदेमंद

त्वचा के लिए भी नीम के कई लाभ देखे जा सकते है। एनसीबीआई की एक शोध के मुताबिक, नीम का उपयोग घावों के उपचार के लिए प्राचीन काल से किया जाता रहा है। दरअसल, इसमें वूंड हिलिंग और एंटी बैक्टिरियल गुण मौजूद होते हैं, जो घावों को भरने में काफी हद तक मदद करते हैं। एक अन्य शोध में इस बात का साफ तौर से जिक्र मिलता है कि नीम या नीम के तेल का इस्तेमाल घाव के साथ-साथ रैशेज की समस्या को कम करने में बेहद प्रभावी हो सकता है। ऐसे में सामान्य घाव या कटने-छिलने पर नीम का लेप उपयोगी हो सकता है। वहीं, अगर जख्म गहरा हो, तो डॉक्टर से इलाज को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

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