निकोला टेस्ला की जीवनी – चौथा भाग

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

1901 में मारकोनी ने रेडियो का आविष्कार कर लिया था जिस कारण से निकोला टेस्ला को काफी धक्का भी मिला था और यही नहीं निकोला टेस्ला की लैब भी आग में ध्वस्त हो गई थी यह सब होने के बाद निकला टेस्ला नर्वस ब्रेकडाउन होने लग इतना सब निकोला टेस्ला झेल न सके। 

 निकोला टेस्ला निवेशकों के पास जाकर बस यही मांगे थे कि वह अपने अविष्कार को किसी प्रकार से पूरा करने के लिए पैसे की जरूरत थी और निकोला टेस्ला चाहे जितने भी बड़े जाने-माने इंसान क्यों ना बनने लग गए हो परंतु वह अपना अविष्कार को पूरा नहीं कर पा रहे थे। उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी साबित हो रही थी। जिस प्रकार से हम एक वैज्ञानिक को देखते हैं और उनको देखते हैं और जितना उनको सम्मान मिलता है उस प्रकार से निकोला टेस्ला को उतना सम्मान नहीं मिला निवेशकों के द्वारा उन्हें आविष्कार के लिए पैसे भी नहीं मिल पाए। 

जो निकोला टेस्ला के साथ कार्य करते थे हमेशा यह बताते हैं कि निकोला टेस्ला एक बहुत ही अच्छे इंसान थे और वह दूसरों से बहुत अच्छे तरीके से और सहजता से बात करते थे। निकोला टेस्ला लोगों से बात करने में थोड़ा घबराते थे जिसके कारण से वह अपने असिस्टेंट को ही लोगों के पास भेज कर उन्हें समझाने का कार्य करवाते थे और वे ज्यादातर समय अपना अकेले ही बताया करते थे और ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिलने से कतराते थे। 

निकोला टेस्ला ने पूरी भरपूर कोशिश करी कि निकोला टेस्ला किसी प्रकार से आविष्कारों से फंडिंग जुटा पाए और अपने आविष्कारों को में जान डाल पाए परंतु ऐसा हुआ नहीं रखता है और निकला टेस्ला एक होटल से दूसरे होटल जाते रहते थे। 

और कई ऑफिस खोल दें परंतु कुछ भी नहीं होता था है तो उन सब को बंद करना पड़ जाता है। 

निकोला टेस्ला को प्रकृति से बहुत ही ज्यादा प्यार था और जानवरों से वह बहुत ही ज्यादा प्यार करते थे खास करके उनका प्यार जो चिड़ियों के प्रति था । जब भी किसी घायल चिड़िया को देखते थे तो वह अपने वह कमरे में लाकर उसको सर्जरी करके फिर से सही कर देते थे और वापस उन्हें खुले आसमान में छोड़ देते थे इसी प्रकार से वह हर पक्षी को खाना खिलाने के लिए पूरी प्रयास करते थे जो भी उनके पास आती थी। 

निकोला टेस्ला को कबूतरों से बहुत ज्यादा प्रेम था और और वह उनका इतना ज्यादा ख्याल रखते थे कि वह जहां भी रहते थे वह कबूतरों को खाना खिलाने के लिए कोई तरीका निकाल लेते थे।  इस वजह से होटल वाले थोड़ा ज्यादा परेशान हो जाते थे क्योंकि कबूतरों की वजह से काफी ज्यादा गंदगी होने लगती थी। निकोला टेस्ला अपने कमरे में उन पक्षियों को जब लाकर रखने लगते थे तोह होटल वाले बहोत परेशान होजाते थे। 

निकोला टेस्ला बहुत ही ज्यादा कर्जे में आ चुके थे और उनके पास बिल्कुल भी पैसा नहीं था कि वह होटलों का रेंट चुका सके। इस कारण से और साथ ही साथ उनकी काफी शिकायतें भी आती थी उनके कबूतरों की गंदगी की वजह से इस कारण से उन्हें होटलों से निकाल दिया जाता था इतने बड़े महान साइंटिस्ट के साथ ऐसी चीजें हो होने के कारण ही निकोला टेस्ला थोड़ा परेशान भी राहते थे। 

उस समय तक वेस्टिंगहाउस भी काफी अच्छे मुकाम तक पहुंच गए थे और निकोला टेस्ला के हर खर्चे को वह संभालते लग गए थे। उनके होटलों के खर्चा वेस्टिंगहाउस द्वारा संभाला जाता था और साथ ही उनको $125 प्रतिमाह वेस्टिंगहाउस की तरफ से पूरी जिंदगी भर मिलता रहा। 

जितने भी यंत्र हमारे आसपास मौजूद हैं वह निकोला टेस्ला के आविष्कारों के कारण ही उपलब्ध है अगर निकोला टेस्ला अपनी जिंदगी में इतने बड़े आविष्कारों का जन्म नहीं दिया होता तो आज हमारी दुनिया में बहुत सारे यंत्र होते भी ना और निकोला टेस्ला की मृत्यु जनवरी 7 1943 में हो गई और उनका शरीर उनके होटल में पाया गया इस कारण से कोई यह सही से बता नहीं पाया कि उनकी मृत्यु किस दिन हुई थी जगह पाए गए उस दिन जनवरी 7 वह अपने कमरे में अकेले मिले थे। 

निकला टेस्ला का जीवन बहुत ही बड़े आविष्कारों से भरा हुआ हैं और उसका इस्तेमाल करके लोगों ने लाखों में पैसे कमाया है। आज अगर निकले टकला नहीं होते तो काफी सारे यंत्र बनने में कई और साल लग चुके होते हैं। परंतु निकोला टेस्ला ने हमारे जीवन को बिल्कुल ही बदल कर रख दिया था। एक बार जब आइंस्टाइन से पूछा गया कि आप को सबसे दुनिया का समझदार इंसान होने में कैसा लगता है आइंस्टाइन ने जवाब में यह कहा था कि आप निकोला टेस्ला से जाकर पूछिए और पूछिए कि उन्हें कैसा लगता है , यह बात साफ कर देती है कि निकोला टेस्ला कितने बड़े बुद्धिमान व्यक्ति थे। 

Leave a Comment