निकोला टेस्ला की जीवनी – पहला भाग

निकोला टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 में हुआ था टेस्ला के पिता एक पुजारी थे और बेटा इसका से यही चाहते थे कि बड़े होकर वह भी एक पुजारी बने। निकोला टेस्ला की माँ एक गृहणी थी। 

टेस्ला के पिता को किसी भी हालत में निकोला टेस्ला को एक पुजारी बनाना चाहते थे परंतु निकोला टेस्ला बचपन से ही विज्ञान से ज़्यादा प्रभाबित थे। निकोला टेस्ला का दिमाग विज्ञान में ज्यादा लगता था टेस्ला के पिता की एक छोटी सी पुस्तकालय थी वहां पर टेस्ला जाकर काफी समय बिताते थे और ज्यादातर किताबे वहां पर पढ़ चुके हैं।

एक बार निकोला टेस्ला के भाई देना टेस्ला के साथ एक बड़ा दुर्भाग्य होता है। देना टेस्ला एक बार कहीं घूमने जा रहे होते हैं और वह घोड़े के ऊपर बैठकर सवारी कर रहे होते हैं तभी कुछ लोमड़ी उनके घोड़े पर पीछे से वार कर देते है और देना टेस्ला घोड़े से गिरकर जख्मी हो जाते हैं और काफी समय तक यूं ही पड़े रहते हैं जिसकी वजह से उनकी तुरंत अंत भी हो जाती है। देना टेस्ला भी अपने भाई निकोला टेस्ला के तरह ही बड़े विद्वान थे और उनके अंदर भी वैसी ही जिज्ञासा थी जिस तरीके से निकोला टेस्ला में थी। 

इस दुर्घटना की वजह से हैं निकोला टेस्ला को आपने सपनों में बहुत ही बड़े भयानक दृश्य आते थे जिसमें वे बताते हैं कि एक रोशनी उनके सपनो में आती थी और फिर उनको रह दिखाती थी निकोला टेस्ला इस पर काफी काबू करना चाहते थे परंतु  कर नहीं पा रहे थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपने सपनों पर रोक लगाने शुरू करें परंतु तभी वह उन्हें कई समय तक परेशान करने वाली थी। 

1873 के दौरान निकोला टेस्ला को हैज़ा हो गया था और उनकी तबीयत इतनी ज्यादा खराब हो गयी थी कि लगभग निकोला टेस्ला अंत की कगार पर आ गए थे। निकोला अपनी आत्मकथा में बताते हैं कि उनके पिताजी जो उनको पुजारी बनाना चाहते थे वह कहते हैं कि अगर निकोला टेस्ला ठीक हो जाते हैं  तब वह निकोला टेस्ला को सबसे अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में भेजेंगे और वहां पर जाकर निकोला टेस्ला अपने आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। निकोला टेस्ला लगभग अंत की कगार पर होते है और उनकी तबियत बहुत करब हो जाती है लेकिन धीरे धीरे फिर उनकी हो जाते हैं और फिर इंजीनियर डिग्री लेने के लिए पढ़ने के लिए निकल जाते हैं। 

1874 मैं कंस्क्रिप्शन लॉ के तहत निकोला टेस्ला को कुछ साल अपने जिंदगी के सेना में बिताने होते हैं परंतु निकला टेस्ला वहां से भाग जाते हैं और निकोला टेस्ला टॉम इन गज के पहाड़ों में रहने के लिए चले जाते हैं और वहां जाकर निकोला टेस्ला बहुत पढ़ाई करते हैं और कई सारी किताबो का भी अध्ययन करते हैं। अपने आत्मकथा में निकोला टेस्ला यह बताते हैं कि प्रकृति के पास रहने की वजह से उनको मन और शरीर में पहले से ज्यादा ताकत लगने लग गई। निकोला टेस्ला जब पहाड़ों पर थे तो उनको अपना खाना खाने के लिए शिकार भी करना पड़ता था। काफी लंबे समय तक   पहाड़ो में रहकर इतनी सारी किताबें पढ़कर निकला टेस्ला को अपने मानसिक बीमारियों से बाहर निकलने में भी काफी मदद मिली। 

निकोला टेस्ला हर काम को तीन के गुणक में करते थे इसलिए कई बार इन्हें लोग पागल के नज़र से देखा करते थे। जिस होटल में निकोला टेस्ला आखिरी बार रह रहे थे उस होटल का नंबर भी ३३२७ था और निकोला टेस्ला खाना खाने से लेकर पढ़ाई करने तक हर कार्य को तीन के गुणक में किया करते थे। और तीन को अपना लकी नंबर मानते थे वे बताते हैं कि यह पूरा ब्रह्मांड तीन नंबर के पैटर्न पर ही बना है और हर चीज इस ब्रह्मांड के अंदर ३ के ही गुण में है। 

निकोला टेस्ला ऑस्ट्रेलियन पॉलिटेक्निक में अपने आगे की पढाई शुरू कर दी वहां पर वह बहुत ही मेहनत से पढ़ाई में लग जाते हैं जो लोग निकोला टेस्ला के साथ पढ़ते थे वह बताते हैं कि निकोला टेस्ला से 2 घंटे सोया करते थे और बाकी समय में पढ़ाई कर रहे होते थे। निकोला टेस्ला बहुत ही ज्यादा पढ़ाई करने लग गए थे और अपने सभी विषय में काफी अच्छे आंक लाते थे।  उन्होंने अपने यूनिवर्सिटी की सबसे ज्यादा ग्रेड हर सब्जेक्ट में हासिल किये और अपने नौ सब्जेक्ट बहुत ही अच्छे अंकों के साथ पास कर लिए थे। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निकोला टेस्ला की इतनी कड़ी मेहनत को देखकर और उन्हें ना आराम करते हुए को देखकर काफी परेशान भी हो गए थे इसके लिए निकोला टेस्ला के प्रोफेसरों ने उनके निकोला टेस्ला के पिताजी को खत भी लिखा था कि यदि टकला इसी तरीके से बिना रुके कार्य करते रहेंगे तो उनके मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार हो जाएंगे। 

पहले अपने कॉलेज के एक – दो सालो के अंदर निकोला टेस्ला ने बहुत ही ज्यादा कठोर मेहनत करी। निकोला टेस्ला कमयुटेटर जोकि मोटर्स के अंदर इस्तमाल होता है उसके बिल्कुल खिलाफ हैं और आगे भी हम यह देख सकते हैं कि निकोला टेस्ला ने जब भी ट्रांसफार्मर या जनरेटर बनाई थी उसके अंदर उन्होंने कभी भी कम्यूटेटर  का अपमान नहीं किया बताते हैं कि कमयुटेटर से बहुत बड़ी दिक्कत हो जाती है जैसे कि वह बहुत सारी एनर्जीव्यर्थ कर देते हैं और साथ ही साथ में बिजली की ही इस कारण से बर्बादी भी होने लगती है इस वजह से कम्यूटेटर बहुत ही बेकार होते हैं। निकोला टेस्ला इस बात को अपने प्रोफेसर को बताते थे परंतु वह इनकी बात को नहीं मानते थे इसी कारण से निकला टेस्ला अपने प्रोफेसरों से कई बार भीड़ भी जाते थे और उनके प्रोफेसर उनसे काफी नाराज भी रहा करते थे कई बार निकोला टेस्ला कक्षा से निकाल भी दिया जाता था क्योंकि वह प्रोफेसर से अपनी बात को साबित करने के लिए काफी आगे तक भी चले जाते थे। 

इसी बीच में दौरान  निकोला टेस्ला के पिता की मौत भी हो जाती है और अपने सेकंड ईयर ऑफ कॉलेज में  निकोला टेस्ला का अपने पिता की मौत की वजह से काफी टूट सा जाते है और वह पढ़ाई करना छोड़ देते हैं और जुएं और शराब की आदी हो जाते हैं वह अपना दर्द को बचाने के लिए गलत आदतों में पड़ने लग जाते हैं। इस कारण से उनकी स्कॉलरशिप जो को मिली होती है कॉलेज की तरफ से वह भी चली जाती है क्योंकि  निकोला टेस्ला बिल्कुल भी कॉलेज आया नहीं करते थे पढ़ाई तो दूर की बात हो गई थी  निकोला टेस्ला को अपने आखिरी साल ग्रेड तक मिले ही नहीं और दूसरे साल ही  निकोला टेस्ला को कॉलेज से बाहर कर दिया जाता है। 

निकोला टेस्ला की जीवनी – दूसरा भाग

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