ॐ नमः शिवाय मंत्र जाप के लाभ ( om namah shivay mantra ke labh )

ओम नमः शिवाय मंत्र जाप करने से अद्भुत लाभों के बारे में आपको अवगत कराने वाले हैं। ओम नमः शिवाय सनातन धर्म में भगवान शिव के सबसे अधिक जाप किए जाने वाले मंत्रों में से एक है। ये मंत्र महादेव को समर्पित है जिन्हें महाकाल के नाम से भी जाना जाता है।

 

इस मंत्र का शाब्दिक अर्थ

‘ॐ नम: शिवाय’ का शाब्दिक अर्थ यह है कि – आत्मा घृणा, तृष्णा, स्वार्थ, ईष्र्या, काम, क्रोध, लोभ, मोह और माया से रहित होकर प्रेम और आनंद से परिपूर्ण हो ईश्वर से मिलन।

इस मंत्र का जाप से मनुष्य की हर कामान पूरी हो जाती है। जो लोग रोज इस मंत्र का जाप करते हैं, उन लोगों को वो सब शीघ्र ही मिल जाता है जिनकी वो कामना करते हैं।

सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए अगर इस मंत्र का जाप किया जाए, तो माना जाता है की मन चाहा जीवनसाथी की प्राप्ति है। इसलिए अविवाहित लोग ओम नमः शिवाय का जाप अवश्य करें।

ॐ नमः शिवाय मंत्र के लाभ कई प्रकार से सेहत के संग भी जुड़े हुए हैं। इस मंत्र का जाप करने से शरीर की रक्षा कई रोगों से होती है। साथ में जो लोग किसी रोग से ग्रस्त हैं अगर वो लोग इस मंत्र का जाप करें। तो वो शीघ्र निरोगी हो जाते हैं।

यदि आप पर शनि देव की साढ़े साती शुरू हो जाती है तो आप भी इस मंत्र का जाप करना शुरू कर दें। इस मंत्र का जाप करने से शनि की साढ़े साती ज्यादा तकलीफदायक नही होगी।

जिन लोगों का मन शांत नहीं रहता है वो लोग रोज रात को निद्रा लेने से पहले इस मंत्र का अवश्य जाप करें। इस मंत्र का जाप करने से चित शांत हो जाता है और तनाव जल्दी दूर हो जाता है।

ओम नमः शिवाय मंत्र के लाभ भय से भी जुड़े हुए हैं। इस मंत्र को पढ़ने से भय दूर हो जाता है। इसलिए जिन लोगों को बहुत ज्यादा डर लगाता है उनको यह मंत्र अवश्य जपना चाहिए।

शैव परंपरा के अनुसार, महादेव सुप्रीम लॉर्ड हैं। जिसके पास ब्रह्मांड को बनाने, उसकी रक्षा करने और बदलने की और विनाश करने की शक्ति है।

ओम को सम्पूर्ण ब्रह्मांड की ध्वनि माना जाता है। इसका अर्थ है प्रेम और शांति ‘नमः’ और ‘शिवाय’ का एक साथ अर्थ है पांच तत्व (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश)। सनातन के अनुसार ये पंच तत्व विश्व में मौजूद हर रचना के निर्माण खंड हैं। महादेव को सभी पांच तत्वों का स्वामी माना जाता है।

 

नकारात्मकता को करे दूर

ओम नमः शिवाय हमारे दैनिक जीवन चर्या में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। जब आप इस मंत्र का जाप करते हैं, तो आप अपने आस-पास की सारी नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर रहे होते हैं और सकारात्मकता को अपनी और आकर्षित करते हैं।

 

मानसिक अशांत से दिलाए छुटकारा

जिस दिन भी आप बहुत अधिक तनाव महसूस कर रहे हों, उस दिन आपको ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप अवश्य करना चाहि।. ये एक स्ट्रेस बुस्टर के रूप में कार्य करता है और आपके मस्तिष्क को शांत करने में आपकी सहायता करता है तथा आराम करने में भी मदद करता है।

 

ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को करे कम

‘ ओम नमः शिवाय ‘ का जाप करने से आप बहुत हद तक ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं। हमारे यहां नौ ग्रह और 27 नक्षत्रों को माना जाता है। चूंकि शिव तत्व एक पीठासीन ऊर्जा है और ग्रहों को भी नियंत्रित करता है, ‘ ओम नमः शिवाय ‘ का जाप कुछ हद तक हानिकारक ग्रहों के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है।

 

वातावरण में चारो ओर आनंद का अनुभव

ऋषि मुनियों में ग्रंथो में इसकी व्याख्या की है कि ‘ ओम नमः शिवाय ‘ का जाप करने से पर्यावरण में पाच तत्वों का सामंजस्य स्थापित होता है। हर दिन इस मंत्र के जाप करने से सभी 5 तत्वों में शांति, प्रेम और सद्भाव की भावना आती है। इसलिए, जब आप इस मंत्र का जाप करते हैं, तो आप न केवल अपने भीतर बल्कि अपने आस-पास भी आनंद के महौल का अनुभव कर पाते हैं।

 

बाधाओं को करे दूर

इस मंत्र के जप करने से काम, क्रोध, घृणा, मोह, लोभ, भय, विषाद आदि सब खत्म होने लगते है। घर में अत्यधिक कलह होने पर इस मंत्र के जाप से घर की कलह को दूर किया जा सकता है और घर में शांति स्थापित को जा सकती है। छात्र अगर इस मंत्र का जाप करते हैं उनका मन शांत होता है और वो अच्छे से पढ़ाई कर पाते हैं और उनके अंक अच्छे आने लगते हैं।

 

इंद्रियों को नियंतत्रित करे

ओम नमः शिवाय एक बेहद शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इसका जाप करने से मनुष्य को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करने में मदद मिलती है। यह मंत्र मनुष्य को अपने जीवन के लिए एक बेहतर दिशा भी देता है और अपने-आप को बेहतर ढंग से समझने में मदद भी करता है।

 

 

ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप कैसे करें?

ओम नम शिवाय वह मूल मंत्र है, जिसे सिंधु घाटी की  सभ्यता से ही महामंत्र माना जाता रहा है। इस मंत्र का अभ्यास विभिन्न प्रकार के आयामों में किया जाता रहा है। इन्हें पंचाक्षर कहा गया है। इसमें कुल पांच मंत्र हैं। ये पंचाक्षर प्रकृति में मौजूद सभी पंचतत्वों के प्रतीक हैं और शरीर के पांच मुख्य केंद्रों के भी प्रतीक हैं। इन पंचाक्षरों से इन पांच केंद्रों को जाग्रत किया जाता है। ये पूरे शारीरिक तंत्र के शुद्धीकरण के लिए बहुत शक्तिशाली माध्यम हैं।यह मंत्र के मौखिक या मानसिक रूप से दोहराया जाते समय मन में भगवान शिव की अनंत व सर्वव्यापक उपस्थिति पर ध्यान केन्द्रित करना होता है। परंपरागत रूप से इसे रुद्राक्ष माला पर 108 बार जपा जाता है। इसे जप योग कहते हैं। इसे कोई भी जप सकता है, परन्तु गुरु द्वारा मंत्र दीक्षा के बाद इस मंत्र का प्रभाव अधिक बढ़ जाता है। मंत्र दीक्षा के पहले गुरु आमतौर पर कुछ अवधि के लिए अध्ययन करता है। मंत्र दीक्षा अक्सर मंदिर अनुष्ठान जैसे कि पूजा, जप, हवन, ध्यान और विभूति लगाने का हिस्सा होता है। गुरु मंत्र को शिष्य के दाहिने कान में बोलतें हैं और कब और कैसे दोहराने की सारी विधियों को भी बताते हैं।

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