padmasan aur sirsasan ke labh ( पद्मासन और शीर्षासन के फायदे )

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

पद्मासन को संस्कृत के पद्म शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ कमल होता है, यह आसन बैठने पर कमल जैसा दिखता है इस लिए इसे Lotus pose भी कहा जाता है। पद्मासन करने से भौतिक और आध्यात्मिक लाभ मिलते है। हिंदू धर्म के भगवान शिव, बौद्ध धर्म के भगवान गौतम बुद्ध भी यह आसन किया करते था, उनकी मूर्तियां इस बात की साक्षी हैं। जबकि शीर्षासन को योगासनों का राजा कहा जाता है ये हठ योगा में आता है। शीर्ष आसान सर के बल किया जाता है इस लिए इसे शीर्षासन कहा जाता है। शीर्षासन मुख्यतः मस्तिष्क संबंधित फायदे पहुंचाता है। पद्मासन शरीर के नीचे के हिस्सों के लिए, कमर से नीचे पैरो तक काफी फायदेमंद है जबकि शीर्षासन शरीर के ऊपरी हिस्सों के लिए, कमर से लेकर मस्तिस्क तक फायदेमंद है।

 

( 1 ) शरीर की विविध अंगो पर असर :

शीर्षासन करने से मस्तिष्क, कंधा, बाहों, रीढ, जांघ पर असर पड़ता हैं। जबकि पद्मासन करने से कूल्हे, कमर, पेट, रीढ को फायदा पहुंचाता है साथ ही शरीर की सारी संधियां ठीक से काम करने लगती है।

 

( 2 ) मांशपेशियों और हड्डियों पर असर :

पद्मासन करने से शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है और मांशपेशियां मजबूत होती है। पद्मासन करने से शरीर की रीढ़ की हड्डी, पैरों की हड्डी में लचीलापन आता है। जबकि शीर्षासन करने से शरीर के ऊपरी हिस्सों की हड्डियां मजबूत होती है, खास कर जांघ की मांशपेशियां मजबूत होती है। दोनो ही आसान मांशपेशियों को मजबूत करते है और हड्डियों को मजबूत करने के साथ ही हड्डियों के जोड़ की समस्याएं भी दूर करते है।

 

( 3 ) मानसिक स्वास्थ्य में सुधार :

पद्मासन करने से हमे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ होते है, व्यक्ति सात्विक जीवन की ओर अग्रसर होता है, एकाग्रता बढ़ती है, तनाव को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, इंद्रियां जागृत होती है और बुद्धि तेज होने लगती है, चीत स्थिर होने लगता है बैचेनी से बचाव होता है, स्मरण शक्ति बढ़ती है, व्यक्ति के विचार शुद्ध होते है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है, धैर्य रखने की क्षमता बढ़ती है, व्यक्ति ब्रम्हचर्य का पालन करने लगता है। जबकि शीर्षासन का नाम ही सर से संबंधित है मस्तिष्क से संबंधित है जिसे सर के बल किया जाता है। शीर्षासन करने से मस्तिष्क की सारी नशों में रक्त का संचार ठीक से होने लगता है, व्यक्ति की सरदर्द की समस्या दूर होती है, चक्कर आने की समस्या दूर होती है, तनाव व चिंता खत्म होता है, मन शांत होता है, व्यक्ति अवसाद से बाहर आता है। शीर्षासन खास कर के मानसिक समस्याओं का निवारण करता है।

 

( 4 ) ऑक्सीजन की कमी दूर करता है :

पद्मासन से श्वसन प्रणाली ठीक से कार्य करने लगता है। व्यक्ति की सांस फूलने की समस्या दूर होती है, मिर्गी की समस्या दूर होती है, शरीर के हर अंग में ऑक्सीजन की कमी दूर होती है। मस्तिष्क से ले कर तल तक नसों में, चमड़ी में, मांशपेशियों में, हृदय में, हड्डियों की संधियों में ऑक्सीजन की कमी दूर करता है। ऑक्सीजन की जरूरी मात्रा होने से कमी न होने से कई अन्य समस्याएं अपने-आप दूर हो जाती है।

 

( 5 ) हृदय रोग का समाधान करता है :

पद्मासन करने से हृदय संबंधित सारी समस्याएं दूर होती है, इस आसन को नियमित रूप से करने से हृदय की सारी नसे ठीक तरह से काम करने लगती है और हृदय तक ऑक्सीजन भी ठीक से पहुंचने लगता है। आज कल जब हृदयाघात से मौत की संख्या बढ़ती ही जा रही है तब व्यक्ति के लिए पद्मासन एक जड़ी-बूटी के समान ही कारगर उपाय है।

 

( 6 ) वजन घटाने के लिए कारगर आसान :

आज हर पांचवा व्यक्ति मोटापे की समस्या से जूझ रहा है जबकि पद्मासन करने से बढ़ते वजन को आसानी से घटाया जा सकता है, खास कर के पेट की चर्बी कम करी जा सकती है। अपने भारत देश में ही मोटे लोगो की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है जबकि योग और व्यायाम जैसी चीजें हमें हमारे वसीयत में मिली है। पद्मासन करने से व्यक्ति ब्रम्हाचार्य का पालन करने लगता है और सात्विक हो जाता इस लिए उसके भोजन में विकार नहीं होता और वजन आसानी से घटने लगता है।

 

( 7 ) अपच की समस्या से छुटकारा मिलता है:

पद्मासन करने से अपच की समस्याओं से निजात मिलता है, पाचनतंत्र अपना कार्य ठीक से करने लगता है, पाचन शक्ति बढ़ती है, अपच की समस्याओं से छुटकारा मिलने से एसिडिटी और गैस की समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है, कब्ज की नही होता पेट ठीक से साफ होता है, तोंद नही निकलती पेट स्वस्थ होता है।

 

( 8 ) स्त्रीयों की समस्याओं के लिए जड़ी बूटी समान :

पद्मासन करने से गर्भवती कन्या को प्रसूति के समय लाभ होता है। शीर्षासन करने से महिलाओं की राजनोवृति की समस्या दूर होती है, मासिक धर्म चक्र ठीक से कार्य करने लगता है, हार्मोंस नॉर्मल रहते है।

 

( 9 ) लंबे समय तक जवान रहें :

नियमित रूप से पद्मासन करने से बाल जल्दी सफेद नही होते, बाल झड़ने बंद होते है, चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है, मांशपेशियां ढीली नही पड़ती, व्यक्ति लंबे समय तक जवान रहता हैं।

 

( 10 ) पैरों की समस्या का निदान :

शीर्षासन करने से जांघो की चर्बी घटती है और पद्मासन करने से पैरो के जोड़ ठीक से काम करने लगते है, पैरों में से दुगंध आना बंद हो जाता है, पसीना आने की समस्या दूर होती है।

 

( 11 ) शरीर शेप में लाने के लिए कारगर :

नियमित रूप से शीर्षासन करने से व्यक्ति अपने शरीर को मन चाहे शेप में ला सकता है, आज के युवा एब्स बनाना काफी पसंद करते है शीर्षासन करने से व्यक्ति मन चाहे एब्स बना सकता हैं।

 

( 12 ) रोग प्रतिकारक क्षमता में बढ़ोतरी:

रोज पद्मासन करने से व्यक्ति की रोग से लड़ने की सहनशीलता बढ़ती है। जिससे बदलते मौसम की असर के प्रभाव से बचा जा सकता है, जैसे सर्द गर्म हवाओं की वजह से तबियत बिगड़ना।

 

यूं तो पद्मासन और शीर्षासन के अनगिनत लाभ है कोई नुकसान भी नही है किंतु जब व्यक्ति की रीढ़ में दर्द हो तब डॉक्टर की सलाह लेकर ही ये आसन करना चाहिए। गर्भवती महिला को शीर्षासन नही करना चाहिए, महावरी के समय में भी ये दोनो आसन नही करने चाहिए।

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