पुस्तकालय का सबसे बड़ा लाभ ( pustakalaya ke labh in hindi nibandh )

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

पुस्तकाल का दैनिक जीवन में महत्व पुस्तकालय शब्द का संधि विच्छेद करने पर हम “पुस्तक” और “आलय” दो अलग शब्द पाते हैं। जहां पुस्तक का अर्थ किताबों से है और आलय का अर्थ घर से, अर्थात पुस्तकालय किताबों का घर है।

पुस्तकें इंसान को सच्चे और अच्छे पथ पर अग्रसर होने की सिख देकर उन्हें पथभ्रष्ट होने से बचाती हैं। श्रेष्ठ पुस्तकें श्रेष्ठ व्यक्ति, श्रेष्ठ समाज और श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण करने में बहुत बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वह स्थान जहाँ अनेकों प्रकार के ज्ञान, स्रोतों, सेवाओं, सूचनाओं आदि का संग्रह हो पुस्तकालय कहलाता है।

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने कहा था की:

“मै नरक में भी पुस्तकों का स्वागत करूँगा क्योंकि इनमें वह शक्ति है कि जहाँ ये होगी वहाँ आप ही स्वर्ग बन जाएगा”

मनुष्य के जीवन में पुस्तकों का महत्त्व किसी भी मूल्यवान् वस्तु से कहीं ज्यादा अधिक है। मूल्यवान गहने जेवर हमारे शरीर को ऊपर से आकर्षक कर सकते हैं लेकिन पुस्तकें हमारे व्यक्तित्व और चरित्र को बेहतर बनाती हैं। ज्ञानवर्द्धक पुस्तकें हमें नैतिकता की ओर ले जाती हैं तथा हमारी पशुओं वाली वृति का नाश करती हैं। हम इस प्रकार पुस्ताकालय के महत्त्व को जान पाते हैं।

पुस्तकालय एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में होते है क्योंकि यहां पर हमारे पूर्वजों के द्वारा और हमारे इतिहास की लिखी हुई अच्छी किताबों का संग्रहण किया जाता है जिसका उपयोग हम आगे आने वाले जीवन को बेहतर बनाने के लिए कर सकते है, जिससे हम ये सिख सकते हैं की हमें भविष्य में किन-किन गलतियों से बचना चाहिए।

जो भी व्यक्ति अच्छी और अधिक मूल्य वाली पुस्तके नहीं खरीद सकता है वह यहां पर आकर आराम से शांत माहौल में पुस्तकें पढ़ सकता है और अपने ज्ञान और मन के जिज्ञासा को शांत कर सकता है।

पुस्तकालय हमारे जीवन का अभिन्न अंग होते है क्योंकि पुस्तकालय में हम शांतिपूर्वक विभिन्न ज्ञानवर्धक किताबें पढ़कर ज्ञान का अर्जन कर सकते है जो कि हमारे जीवन को खुशहाल बनाता है और यह हमें सोचने समझने की शक्ति भी प्रदान करता है।

पुस्तकालय की भूमिका मानव जीवन में प्राचीन काल से ही बहुत अधिक रही है , क्योंकि प्राचीन काल में प्रिंटिंग मशीन नहीं होने के कारण हस्तलिखित किताबे ही मिल पाती थी जिस कारण उनका मूल्य भी बहुत अधिक होता था और किताबें भी बहुत कम ही उपलब्ध हो पाती थी इसीलिए पुस्तकालय की स्थापना की गई ।

पुस्तकालय की स्थापना से जो भी व्यक्ति किताबें पढ़ने का इच्छुक होता था वह पुस्तकालय में जाकर शांत माहौल में किताबें पढ़ सकता था इससे गरीब वर्ग के लोगों को अधिक फायदा हुआ है, क्योंकि वे लोग अधिक मूल्य की किताबें बार-बार खरीद कर पढ़ नहीं सकते थे ।

एक पुस्तकालय में लगभग सभी प्रकार की पुस्तके जैसे कला, धर्म, जाति, राजनीतिक, विज्ञान, कृषि, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय पुस्तके मिल जाती है जिनकी सहायता से सभी लोग अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकते है कुछ बड़े पुस्तकालयों में अलग-अलग भाषा और अलग प्रांतो की पुस्तकें भी उपलब्ध होती है ।

वर्तमान में पुस्तकालय विभिन्न प्रकार के होते है जैसे विद्यालय के पुस्तकालय जहां पर छात्र-छात्राएं और शिक्षक जाकर किताबें और पत्र पत्रिकाएं पढ़ सकते है। दूसरे पुस्तकालय विश्वविद्यालयों के होते है , जहां पर केवल वहां के विद्यार्थी जाकर पढ़ सकते है ।

कुछ पुस्तकालय ट्रस्ट द्वारा भी संचालित किए जाते है जिनका मूल उद्देश्य गरीब एवं पिछड़े वर्ग के लोगों को शिक्षा प्रदान करना होता है , क्योंकि गरीब विद्यार्थी के पास मूल्यवान पुस्तकों को खरीदने के लिए धन नहीं होता है। इन पुस्तकालयों में महीने की बेहद ही न्यूनतम फीस रखी जाती है ।

चौथे नंबर पर सार्वजनिक पुस्तकालय आते है जो कि सरकार द्वारा संचालित किए जाते है जिसमें सभी लेखकों और कवियों की प्रमुख किताबें होती है । साथ ही देश और विदेश की पत्र-पत्रिकाएं भी होती है जिन्हें कोई भी व्यक्ति या विद्यार्थी पुस्तकालय में जाकर पढ़ सकता है ।

पुस्तकालय हमारे देश में प्राचीन युग से ही प्रचलन में रहा है जिसका सबसे बड़ा उदाहरण नालंदा विश्वविद्यालय का पुस्तकालय जो कि विदेशी आक्रमणकारियों ने एकदम नष्ट कर दिया था लेकिन अब उसे पुन: स्थापित कर दिया गया है ।

पुस्तकालयों की भूमिका मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण रही है इसी कारण आज हमारी शिक्षा पद्धति इतनी सुदृढ़ हो पाई है। पुस्तकालयों के कारण गरीब विद्यार्थियों को भी अच्छी किताबें पढ़ने को मिली है । इसके कारण सामाजिक और आर्थिक विकास भी हुआ है।

वर्तमान में भी पुस्तकालयों की महत्वता कम नहीं हुई है आज भी विद्यार्थी शिक्षक और अन्य व्यक्ति उच्च स्तर की किताबें पढ़ने के लिए पुस्तकालय में ही जाते है ।

 

पुस्तकालय के प्रकार

व्यक्तिगत पुस्तकालय

व्यक्तिगत पुस्तकालयों की श्रेणी में व पुस्तकालय आते हैं जो लोग अपने घरों मैं एक अलग कमरे की व्यवस्था करके उसमें अपनी रुचि की किताबें रखते हैं और उन्हें पढ़ते हैं इन पुस्तकालय उसे सिर्फ उस घर के व्यक्ति ही शिक्षा ग्रहण कर सकते है।

विद्यालय, विश्वविद्यालय का पुस्तकालय 

विद्यालय और विश्वविद्यालय के पुस्तकालय वहां के विद्यार्थी और शिक्षकों के लिए होते है जहां पर कई प्रकार की भाषाओं और ज्ञान वाली पुस्तकें पत्र पत्रिकाएं उपलब्ध होती है । यह पर छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए चुटकुलों वाली किताबें भी उपलब्ध होती हैं । वही शिक्षकों के लिए दैनिक अखबार भी उपलब्ध होता है ।

सार्वजनिक पुस्तकालय

सार्वजनिक पुस्तकालय में दो श्रेणी के पुस्तकालय आते है जिसमें कुछ पुस्तकालय समाजसेवी ट्रस्ट द्वारा चलाए जाते हैं और कुछ सरकार के अनुदान द्वारा चलाए जाते हैं यहां पर कोई भी व्यक्ति आकर पुस्तके पढ़ सकता है।

चल-पुस्तकालय

चल पुस्तकालय वे पुस्तकालय होते है जो की मोटर वाहनों में संचालित होते हैं इन्हीं संचालित करने के लिए मोटर वाहनों में किताबे रखी जाती हैं , और प्रतिदिन गांव गांव जाकर पुस्तकालय संचालित किए जाते है इन पुस्तकालय से किताबे कम मूल्य पर खरीदी भी जा सकती है ।

डिजिटल पुस्तकालय

वर्तमान में इंटरनेट व्यवस्था और मोबाइल के सस्ते होने के कारण ज्यादातर लोग किताबों को मोबाइल और कंप्यूटर पर पढ़ना पसंद करते है। इसीलिए अब किताबों को पीडीएफ के रूप में बनाकर लोगों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया जाता है यह विभिन्न वेबसाइटों की माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है जिनमें से एक हिंदी यात्रा भी है जिसे आप अभी पढ़ रहे है।

 

पुस्तकालय का सबसे बड़ा लाभ ( pustakalaya ke labh in hindi nibandh )

व्यक्ति के मानसिक स्थिति का विस्तार करने के लिए पुस्तकालय एक बेहतर माध्यम है। पुस्तकें ही मनुष्य की एक सबसे सच्ची मित्र होती है। पुस्तकालय एक अध्ययन स्थान है, जहां हम शांति से बैठकर ज्ञानार्जन कर सकते हैं।

स्वाध्ययन की आदत का विकास होना

पुस्तकालय एक ऐसा शांत माहौल वाला स्थान होता है, जहाँ बालक खुद जाकर पुस्तकें आदि को लेकर स्वयं अध्ययन करते है। परिणामतः विद्यार्थियों में स्वाध्याय की आदतों का विकास होता है। पुस्तकालयों में विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की किताबों को अध्ययन का अच्छा अवसर मिलता है।

ग्रुप शिक्षण के दोषों को दूर करे

ग्रुपिंग में शिक्षण की विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न प्रकार के विद्यार्थी जिनकी रुचि, बुद्धि, योग्यता आदि अलग होते हैं और यहां सब एक साथ अध्ययन करते हैं तो इस कारण सभी विद्यार्थियों को एक प्रकार की शिक्षा नहीं मिल पाती है। इस दोष को दूर करने में पुस्तकालय की अहम् भूमिका निभा सकती है। वहाँ जाकर छात्र अपनी पसंद की पाठ्य-पुस्तक को ले कर अध्ययन करता है।

छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए उपयोगी

लाइब्रेरी न केवल विद्यार्थियों के खाली समय के उपयोग के लिए उपयोगी है, वरन् यह छात्रों,कामकाजी पुरुष और महिलाओं के लिए भी समान रूप से उपयोगी होता है। लाइब्रेरी व्यक्तियों को अपनी रुचि, योग्यता, कार्यक्षमता और कार्यकुशलता को भी आगे बढ़ाता है। यहाँ आकर लोग अपने ज्ञान का विस्तार करते हैं। विद्यार्थी यहीं अपने मानसिक शक्तियों का विकास करते हुए हर प्रकार के राजनीतिक, आर्थिक, पारिवारिक आदि स्थितियों के लिए अपने दृष्टिकोण का विस्तार करते हैं।

पुस्तकालयों के द्वारा सामान्य ज्ञान की वृद्धि में विस्तार होना

लाइब्रेरी एक ऐसा स्थान है, जहाँ विद्यार्थी केवल अपने मन पसन्द के विषय का स्वेच्छा से अध्ययन करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि इनके माध्यम से छात्रों के जनरल नॉलेज में भी वृद्धि होती है। विद्यार्थी बिना किसी व्यय के ही यहाँ पर पुस्तकों का अध्ययन करते हुए अपने शब्द-भण्डार में वृद्धि करते हैं।

मौन वाचन की आदत का विकास होना

लाइब्रेरी का एक महत्त्व यह भी है कि इसके द्वारा विद्यार्थियों में मौन वाचन की आदत बढ़ती है, क्योंकि पुस्तकालय में एक साथ बहुत से बच्चे बैठकर पढ़ते हैं, इस स्थिति में वहाँ पर एक साथ बोल-बोल कर पढ़ पाना सम्भव नहीं हो पाता है।

गरीब विद्यार्थियों को लाभ

हमारे देश में बहुत अभिभावक ऐसे हैं जिनके पास रहने खाने का कोई ठिकाना नहीं है, तो उनके बच्चे स्कूल की पढ़ाई भी बहुत मुश्किल से ही कर पाते हैं। जिनके बच्चों में पढ़ाई की लालसा होती है उनके पास इतने पैसे नहीं होते हैं कि वह अपने बच्चों को पढ़ा सकें

ऐसे गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए पुस्तकालय बहुत ही फायदेमंद साबित होती है। यहां पर बच्चों को पढ़ने की पूरी आजादी मिलती है और इस प्रकार वह आसानी से हर प्रकार की किताबों से अपनी जानकारी में वृद्धि कर सकते हैं। जिनके पास किताबें खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं उन्हें पुस्तकालय हर प्रकार की किताबों को मुफ्त में उपलब्ध करा देती है। जिन विद्यार्थियों को घर में पढ़ाई करना पसंद है वो पुस्तकालय से बहुत कम रुपयों में कुछ दिनों के लिए पुस्तकों को ले जाकर आराम से पढ़ सकते हैं।

संसार के लगभग सभी किताबों का उपलब्ध होना

भारत में अनेकों भाषाएं हैं और यहां कई प्रकार की भाषा का ज्ञान रखने वाले लोग हैं। अलग-अलग भाषाओं की किताब को पढ़ने का शौक भी बहुत लोग रखते हैं। लाइब्रेरी में हर प्रकार के विषय और भाषा की किताबें उपलब्ध होती है।

इस तरह जो लोग विदेशी भाषा के किताबों का अध्ययन करने के शौकीन होते हैं लेकिन उन्हें मिल नहीं पाता है तो उनके लिए पुस्तकालय ही एकमात्र ऐसा स्थान है जहां पर यह संभव हो सकता है।

भाषा शिक्षण में पुस्तकालय का महत्वपूर्ण उपयोग

भाषा शिक्षण का उपयोग अब सिर्फ पढ़ने-लिखने तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि पढ़कर तर्क देना, समझना, विचारना, चर्चा-परिचर्चा में प्रतिभाग करना, योजना बनाना, कल्पना करना, अपने मन की बात साझा करना आदि बहुत-सी अन्य दक्षताएँ भी भाषा शिक्षण का ही अंग होती हैं। जिन पर हम कभी अपना ध्यान केन्द्रित नहीं करते हैं। सही शब्द, भावनाएं, भाव सम्‍प्रेषण के अभाव में हम अपनी बात सही से सामने वाले इंसान तक पहुँचा नहीं पाते हैं।  हम अपने अनुभवों के आधार पर हर चीज को देखते हैं परखते हैं और सामने वाले लोग तक पहुंचाते हैं, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम किसी स्थिति या विषय पर अधिक-से-अधिक विचार करके अनुभव करना चाहिए और किसी विषय को विभिन्न दृष्टिकोणों से देखते हुए उसके बारे में अपनी एक अलग समझ बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

इतिहास को संभाले रखना

आज इंसान जो भी इतिहास के बारे में जानते हैं वो सिर्फ किताबों के बदौलत ही जानते हैं। यह सब सिर्फ-और-सिर्फ पुस्तालयों की वजह से ही संभव हो पाया है।

हमे अपने पुराने सभ्यताओं और संस्कृतियों के बारे में किताबों के जरिए ही जानने को मिलता है। इतने लंबे वक्त से हर प्रकार की जानकारी को संजोकर रखने की श्रेय सिर्फ पुस्तकालयों को ही दिया जाना चाहिए।

 

पुस्तकालय के नियम 

पुस्तकालय में पढ़ने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

  • पुस्तकालय में पुस्तक पढ़ाई के समय शांति व्यवस्था बनाए रखना होता है ।
  • पुस्तकालय की किताबों और पत्र-पत्रिकाओं को फाड़ना एवं उस पर लिखना सख्त मना होता है ।
  • पुस्तकालय में शोर शराबा मचाने पर आपको  निलंबित भी किया जा सकता है ।
  • यहां से ली गई किताबों को एक नियमित अवधि में वापस लौटाना आवश्यक होता है।
  • पुस्तकालय में किसी भी प्रकार का कचरा फैलाने या फिर थूकना , गंदगी फैलाने की सख्त मनाही होती है।

 

वर्तमान में पुस्तकालयों की आवश्यकता

वर्तमान में भी पुस्तकालय उतनी ही अहमियत रखते हैं जितनी कि वह पुराने जमाने में रखा करते थे । खासकर हमारे भारत देश में आज भी पुस्तकालयों की कमी है, जिसके वजह से हमारे देश में आज भी कई लोगों को शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पाता है । जिसका एक अहम कारण शिक्षा का वाणिज्य करण भी है । इसके कारण शिक्षा दिन-प्रतिदिन महंगी होती जा रही है ।

इसीलिए पुस्तकालयों की महत्वता दिन प्रतिदिन के हिसाब से और अधिक बढ़ती जा रही है आज भी हमारे देश के गांव में पुस्तकालय देखने को नहीं मिलते है । जिसके कारण वहां के गरीब लोग पढ़ लिख नहीं पाते हैं , और अपना पूरा जीवन गरीबी में व्यतीत करने को मजबूर हो जाते है।

अगर हमें हमारे देश के प्रत्येक बच्चे को अच्छी शिक्षा देनी है तो हमें अच्छे पुस्तकालयों का विकास करना होगा। विदेशों में शिक्षा व्यवस्था इसीलिए सुदृढ़ है क्योंकि वहां के प्रत्येक गांव और शहर में एक पुस्तकालय जरूर होता है ।

हमें भी प्रत्येक गांव में पुस्तकालय खोलने चाहिए जिससे हमारे देश का प्रत्येक बच्चा पढ़ लिख कर एक अच्छा व्यक्ति बनेगा और सामाजिक विकास के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास में भी सहयोग कर सकेगा ।

Leave a Comment