सर्वनाम कितने प्रकार के होते हैं | Sarvnam kitne prakar ke hote hain?

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किये जाते हैं, उनके सर्वनाम कहते हैं, जैसे कि – हम, तुम, मैं, आप, उसका, उसकी, वह, इत्यादि। सर्वनाम शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है, सर्व + नाम।  इसका मतलब कि जो नाम सबके  स्थान पर प्रयोग हो, उसको सर्वनाम कहा जाता है। जैसे कि अगर हम गाय बोलते हैं तो बस हमें गाय के बारे में पता चलता है, बाकि किसी और जानवर जैसे कि शेर,  बिल्ली इत्यादि के बारे में नहीं। लेकिन अगर हम इसकी जगह “वह” शब्द का इस्तेमाल करेंगे तो वो सब जानवर के बारे में बात होगी।

 

सर्वनाम किसे कहते हैं ? (Sarvanam Kise Kahate Hain)

संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं। सर्वनाम शब्द ‘सर्व’ और ‘नाम’ शब्दों से मिलकर बना है, जहाँ ‘सर्व’ शब्द का अर्थ ‘सभी’ या ‘सब’ तथा ‘नाम’ का अर्थ हिंदी व्याकरण में ‘संज्ञा’ से लिया जाता है। अतः हम कह सकते हैं कि- वे सभी शब्द सर्वनाम हैं, जिनका प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है। जैसे:-

  • मैं – इसका इस्तेमाल वक्ता स्वयं के लिए करता है।
  • तू – इसका इस्तेमाल वक्ता की बात सुनने वाले के लिए किया जाता है।
  • यह – आस-पास की किसी वस्तु को इंगित करने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  • वह – दूर की किसी वस्तु को इंगित करने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया जाता है।

हम ये बात एक उदाहरण दे कर समझते हैं : रीना ने कहा कि मैं जा रही हूँ।

यहाँ पर रीना एक संज्ञा है, तथा वह एक सर्वनाम है जोकि संज्ञा के स्थान पर प्रयोग हुआ है।

सर्वनाम कौन-कौन से होते हैं?

मैं, तू, आप, यह, वह, सो, जो, कोई, कुछ, कौन, क्या सर्वनाम होते हैं. हिंदी में 11 सर्वनाम होते हैं। इन ग्यारह सर्वनामों को मूल सर्वनाम कहते हैं। यही ग्यारह सर्वनाम पुरुष, वचन और कारक के आधार पर अपना रूपांतरण करके अन्य सर्वनाम बनाते हैं, जिन्हें यौगिक सर्वनाम कहते हैं।

सर्वनाम का प्रयोग क्यों किया जाता है?

सर्वनाम का उपयोग भाषा को सुंदर बनाने के लिए तथा संज्ञा शब्दों की पुनरावृत्ति को कम करने के लिए सर्वनाम शब्दों का प्रयोग किया जाता है। जैसे: मोहन एक चालाक आदमी है। मोहन दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है। मोहन की एक बेटी है। मोहन अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है। यहाँ मोहन शब्द की पुनरावृत्ति हो रही है। इस तरह एक शब्द कि बार-बार पुनरावृत्ति होने से भाषा की सुंदरता में कमी आती है। सर्वनाम शब्दों का प्रयोग इसी पुनरावृत्ति को ख़त्म करने के लिए किया जाता है।

अब यदि इस उदाहरण में हम सर्वनाम शब्दों का प्रयोग करते हैं तो, वाक्य कुछ इस तरह बनेंगे-

मोहन एक चालाक आदमी है। वह दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है। उसकी एक बेटी है। वह अपनी बेटी से बहुत प्यार करता है।

इस तरह आप देख सकते हैं कि मोहन की जगह अलग-अलग सर्वनाम शब्दों का प्रयोग करने से वाक्य किस तरह बदल गए.

हिंदी व्याकरण में सर्वनाम को संज्ञा का ही उपभेद माना जा सकता है क्योंकि जो शब्द हमें संज्ञा का बोध करवाते हैं उन्ही शब्दों के स्थान पर सर्वनाम शब्दों का प्रयोग होता है। अतः सर्वनाम एक प्रकार से “संज्ञा” ही हो सकती है।

लेकिन, संज्ञा और सर्वनाम में एक अंतर होता है। संज्ञा हमें उसी वस्तु का बोध करवाती है जिसका वह नाम (संज्ञा) है, जबकि सर्वनाम से किसी भी वस्तु का बोध हो सकता है। सर्वनाम के इसी गुण की वजह से उसे संज्ञा का एक भेद न मानकर अलग भेद माना जाता है।

‘किताब’ शब्द से हमें यह पता चलता है कि यहाँ ‘किताब’ के बारे में बात हो रही है, न कि मकान या कुर्सी के बारे मेें। यदि हम ‘किताब’ (संज्ञा) के स्थान पर सर्वनाम का प्रयोग करें तो हम किताब को ‘यह’ या ‘वह’ से संबोधित कर सकते हैं। ‘यह’ और ‘वह’ कहने में हमें किताब के अलावा भी किसी वस्तु का बोध हो सकता है क्योंकि ‘यह’ या ‘वह’ किसी भी वस्तु के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

 

सर्वनाम कितने प्रकार के होते हैं | Sarvnam kitne prakar ke hote hain?

प्रयोग के हिसाब से सर्वनाम ६ प्रकार के होते हैं:

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम
  3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  4. सम्बन्धवाचक सर्वनाम
  5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
  6. निजवाचक सर्वनाम

अब हम आपको इन सबके बारे में विस्तार से समझायेंगे।

पुरुषवाचक सर्वनाम

पुरुषवाचक सर्वनाम वो होते हैं, जोकि स्त्री या पुरुष के नाम के स्थान पर प्रयोग होता है, जिसका प्रयोग करने से किसी बोलने वाले , सुनने वाले या किसी और व्यक्ति के होने का बोध होता है। जैसे कि मैं, तू, वह इत्यादि।

उदाहरण  – मैंने उससे कहा कि वो जा रही है।

इस उदाहरण में तीन सर्वनाम का प्रयोग हो रहा है – मैंने, उससे तथा वो।

पुरुषवाचक सर्वनाम ३ प्रकार के होते हैं

उत्तम पुरुषवाचक सर्वनाम

बोलने या लिखने वाला व्यक्ति जिन शब्दों का प्रयोग अपने लिए करता है, उन्हें उत्तम पुरुष कहते हैं, जैसे कि मैं, मुझे, मेरा इत्यादि।

उदाहरण

यह काम मैंने किया है।

यहाँ पर बोलने वाला व्यक्ति अपने बारे में बात कर रहा है, तो यह उत्तम  पुरुषवाचक सर्वनाम है।

मध्यम पुरुषवाचक सर्वनाम

सुनने वाला व्यक्ति के लिए जिन शब्दों का प्रयोग होता है, उन्हें मध्यम पुरुष कहते हैं, जैसे कि तू, तुझे, तेरा, आपका  इत्यादि।

उदाहरण

आप हमारे गुरु हैं।

यहाँ पर सुनने वाले व्यक्ति को गुरु बताया जा रहा है, तो यह मध्यम  पुरुषवाचक सर्वनाम है।

अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम

जिन शब्दों का प्रयोग बोलने वाले या सुनने वाले का न हो कर किसी अन्य के लिए हो, उन्हें अन्य पुरुष सर्वनाम कहते हैं जैसे कि यह, वह, उनका, उसका, इन्हे, उन्हें इत्यादि।

उदाहरण –

कल वो खेलने नहीं आया था।

यहाँ पर किसी अन्य व्यक्ति का ज़िक्र हो रहा है, तो यह अन्य पुरुषवाचक सर्वनाम है।

निश्चयवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम शब्द किसी दूर या पास कि वस्तु की और इशारा करे, उन्हें निश्चयवाचक या फिर संकेतवाचक सर्वनाम कहते हैं।

उदाहरण

वह पैन मेरा नहीं है।

यह घर मेरे दादाजी ने बनवाया था।

वे सब आज पहुंच जाएंगे।

उस मटके में पानी नहीं है।

यह घड़ी खराब है।

यह भी तो रवि का ही साथी है।

यह कोई आज की बात नहीं है।

ये खाना बासी है।

यहाँ पर खाने का ज़िक्र हो रहा है, तो यह निश्चयवाचक सर्वनाम है।

यह तो कोई नहीं बात नहीं है।

यहाँ पर किसी बात का ज़िक्र हो रहा है, तो यह निश्चयवाचक सर्वनाम है।

निश्चयवाचक सर्वनाम २ तरह के होते हैं

दूरवर्ती

जो शब्द दूर की वस्तु की और इशारा करते हैं, उन्हें दूरवर्ती विश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।

उदाहरण :

वह मेरी किताब है।

वो मेरी कार है, और वो खराब हो गई है।

निकटवर्ती

जो शब्द पास  की वस्तु की और इशारा करते हैं, उन्हें निकटवर्ती विश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।

उदाहरण

ये कार मेरी है।

यह मेरी पेन है, और ये मुझे बहुत पसंद है।

अनिश्चयवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों से किसी भी निश्चित वस्तु का बोध न हो, वो अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहलाते हैं, जैसे कि कोई, किसी का इत्यादि।

उदाहरण

जल में कुछ है।

घी में कुछ गिर गया है।

कोई आ रहा है।

वे कुछ खा रहे हैं।

बाहर कोई खड़ा है।

ऐसा ना हो कि कोई आ जाए।

छत पर कोई है।

कोई सर्वनाम का प्रयोग किसी एकवचन अथवा बहुवचन पुरुष (व्यक्ति) की अनिश्चितता व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

कोई यहाँ आया था।

ऐसा न हो, कि कोई आ जाए।

सम्बन्धवाचक सर्वनाम

जो सर्वनाम शब्द किसी दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से सम्बन्ध दिखने के लिए प्रयुक्त होते हैं , उन्हें सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं।

उदाहरण :

वह कौन है , जो रो रहा हैं।

यह वही आदमी है, जिसका पुत्र परीक्षा में अव्वल आया है।

जो कल आएगा, सो इनाम पावेगा।

जो मेहनत करते हैं, वे सफल होते हैं।

जिसको आना है, वह आ सकता है।

वह कौन है, जो रो रहा है।

जिसका काम उसका नाम।

जो कर्म करेगा, सो फल पावेगा।

प्रश्नवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दों से किसी प्रश्न के पूछे जाने का बोध है, उनके प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं, जैसे कि कौन, क्या इत्यादि।

उदाहरण

क्या है?

कौन है?

क्या हुआ?

वह क्या खा रहा है?

कौन गाना गा रहा है?

वह किसकी पेंसिल पड़ी है?

वह कौन है, जो खेत में घुस रहा है?

पिताजी कल किसकी बात कर रहे थे?

वहाँ खेत में कौन गया है?

तुम्हारा कमरा कौन सा है?

दरवाज़े पर कौन खड़ा था ?

तुम क्या खा रहे हो ?

निजवाचक सर्वनाम

जिन सर्वनाम शब्दो से अपनेपन (खुद )का बोध होता है, उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते है ।

उदाहरण

मैं अपने सब काम स्वयं करती हूँ ।

मैं अपनी कार खुद चलाती हूँ।

मैं अपना काम जानता हूँ।

(इन वाक्यों में ‘अपना’ निजवाचक सर्वनाम है।)

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