सुंदर पिचाई की जीवनी – दूसरा भाग

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

गूगल के अंदर आकर उन्होंने बहुत ही अलग प्रकार के कार्य किया और बहुत ही सफलतापूर्वक उस कार्य को कर दिखाया। उन्होंने गूगल के अंदर कुछ गेम डेवलपमेंट और साथ में टूल बार मैनेजमेंट के कार्य को मिले थे जो सुंदराजन पिचाई ने काफी अच्छे रूप से निभाए। गूगल क्रोम के आने से पहले ज्यादातर कंप्यूटर के अंदर इंटरनेट एक्सप्लोरर चला करता था जिसे माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाया गया था और कुछ चीजें तो ऐसी थी जो इंटरनेट एक्सप्लोरर की बिना खुल ही नहीं सकती थी तो आप समझ ही सकते हैं कि इंटरनेट एक्स्प्लोरर पर उस समय की मार्केट के लिए एक सोना था। 

सुंदर पिचाई ने उस समय यह समझ गए थे कि यदि हम लोगों ने कोई जल्दी एक नया  वेब ब्राउज़र नहीं शुरू किया तो बहुत ही जल्द माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर को एक डिफॉल्ट ब्राउज़र के रूप में बना देगा और जिसके बाद गूगल या फिर कोई नए ब्राउज़र्स के लिए जगह नहीं बचेगी।  

बहुत ही जल्द बिल गेट्स ऐसे प्लान बना रहे थे कि वह किसी प्रकार से इंटरनेट एक्सप्लोरर विंडो के कंप्यूटर के अंदर एक डिफॉल्ट ब्राउजर बना दे उसके बाद कंप्यूटर कभी नहीं पूछेगा कि आपको कौन सी वेब ब्राउज़र का इस्तेमाल करना है वह सीधे इंटरनेट एक्सप्लोरर को खोल कर दे देगा। 

सुंदर पिचाई ने इस बात को सबसे पहले जो समय के गूगल के सीईओ थे उनको इस बात की खबर दी परंतु उन्होंने सुंदर पिचाई की बात को ज्यादा भाव नहीं दिया और उन्होंने यह कहा कि ये प्रोजेक्ट को बंद करे क्योंकि यह बहुत ही महंगा पड़ेगा। लेकिन इसके बाद सुंदर पिचाई लैरी पेज को सेर्गेय ब्रिन को इस बात पर मनाने में तैयार हो गए थे।  इसके बाद गूगल क्रोम ने दुनिया का सबसे बड़ा ब्राउज़र बन गया और अब सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाला भी और हर जगह पाने वाला ब्राउज़र बन गया है और यह सब सुंदर पिचाई के कारण ही हो पाया। 

दोस्तों मैं आपको यह बता दूं की सुंदर परचाई ने यह बहुत ही पहले बता दिया था कि इंटरनेट एक्सप्लोरर बिल गेट डिफॉल्ट ब्राउजर बना देंगे और कुछ समय बाद ऐसे ही हुआ और उन्होंने डिफॉल्ट ब्राउजर बना लिया लेकिन इतनी ज्यादा मार्केट गूगल क्रोम उठा चुका था कि अब इंटरनेट एक्सप्लोरर उतना काम नहीं आ रहा था चाहे उन लोग ने डिफॉल्ट ब्राउजर क्यों नहीं ना बना दिया हो। 

जब माइक्रोसॉफ्ट ने उसे डिफॉल्ट ब्राउजर के रूप में सेट करना शुरू कर दिया तो सुंदर पिचाई ने एक और नया तरीका निकाल लिया था कि वह अपने सर्च इंजन के पेज पर गूगल को डिफॉल्ट ब्राउजर सेट करने का अनुमति देने के लिए ऑप्शन रखेंगे जिस कारण से क्रोम एक और बड़ी सफलता पाने लग गया। 

इतनी सारी सफलता के बाद सुंदराजन पिचाई को गूगल का वाइस प्रेसिडेंट बना दिया गया और फिर उसके 2015 में सुंदराजन पिचाई को गूगल का सीईओ घोषित कर दिया गया। ये फैसला लैरी पेज और सेर्गेय ब्रिन का यह फैसला था कि सुंदर पिचाई सीईओ के रूप में आए और उसके बाद से गूगल एक बहुत ही बड़ी कंपनी बन गई।  

सुंदराजन पिचाई को बहुत सारे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनी से न्योते आने लग गए और  उसमें से एक ट्विटर ने भी सुंदराजन को अपने प्रोडक्ट के हेड के तौर पर नियुक्त करने की कोशिश करी। सुंदराजन पिचाई को कई सारी कंपनियों ने अपना सीईओ बनाना चाहा जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर। 

सुंदर पिचाई की सफलता एक बहुत बड़ी सफलता बन चुकी थी और सुंदर पिचाई गूगल के चेहरे के रूप में सबके सामने आ रहे थे। सुंदर पिचाई कई सारी कॉन्फ्रेंस में वह जाकर गूगल के और ग्रुप को आगे बढ़ावा दिया करते थे उनके अंदर जितनी डेवलपमेंट हो रही थी हुए सभी के हेड हुआ करते थे। 

सुंदर पिचाई जब 2015 में संयोगिता पद संभाल लिया उसके बाद उन्होंने एंड्राइड पर भरपूर तरीके से कार्य करना शुरू कर दिया और सुंदर पिचाई  ऐसे एंड्रॉयड स्मार्टफोन बनाना चाहते हैं कि जो सभी के द्वारा उपयोग करे जा सके। साथ ही साथ में बहुत ही सस्ते हो इसी तरीके से वह भारत की सरकार के साथ मिलकर भारत के हर गांव में इंटरनेट पहुंचाना चाहते हैं और हर इंसान के पास एंड्रॉयड फोन को पहुंचाना चाहते हुए डिजिटल इंडिया को बहुत समर्थन करते हैं। और यह सब सुंदर पिचाई के यही कारण है कि इतनी बड़ी कंपनी इतने लंबे समय तक इतनी अच्छी तरीके से चल सकी। 

सुंदर पिचाई की बीवी का नाम अंजली पिचाई है और वे उनसे वह अपनी पढ़ाई के दौरान मिले थे। अंजली परचाई उस समय केमिकल इंजीनियरिंग कर रही थी और सुंदर पिचाई ने कई सालों तक अंजलि को पसंद करा लेकिन उनकी कभी बात नहीं हुई थी क्योंकि उन्हें लड़कियों से बात करने में थोड़ी हिचकिचाहट होती थी। परंतु उन्होंने अपने पढाई के चौथे साल में अंजलि से बात करी और अंजलि मान गई उसके बाद से उन्होंने सुंदराजन का साथ कभी नहीं छोड़ा। 

सुंदर पिचाई जब पढ़ने के लिए बाहर अमेरिका गए थे और अमेरिका में कार्य करने लगे थे तब उन्हें अंजलि का काफी ख्याल आया करता था और दोनों एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं कर पाते थे क्योंकि इंटरनेशनल रोमिंग चार्जेस बहुत ज्यादा करते थे और सुंदराजन के पास है उस समय बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। इस कारण से जैसे ही सुंदराजन भारत आये तब अंजलि को अंजलि के माता-पिता से उन्हें बात करके अमेरिका ले गए।  फिर उसके बाद उन्होंने वहां पर शादी कर ली इसी के साथ उनके दो बच्चे भी है इनका नाम किरण और काव्या है।

Leave a Comment