सुंदर पिचाई की जीवनी – पहला भाग

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

पिचाई सुंदराजन का जन्म जुलाई १२, १९७२ में मदुरई तमिलनाडु में हुआ था।  उनके पिता रघुनाथ पिचाई एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे जो ब्रिटिश की एक इलेक्ट्रॉनिक कंपनी के लिए कार्य करते थे वहां पर उनको इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स बनाने के लिए निर्धारित किया गया था। 

सुंदर पिचाई और उनके पिता की काफी अच्छे रिश्ते थे और वे हमेशा सुंदराजन को अपने नौकरी के बारे में बताया करते थे कि कैसी उनकी नौकरी थी और किस प्रकार की उनको कार्य करने होते थे और मैं बता दूं आपको दोस्तों की सुंदराजन पिचाई एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते थे और उन्हें कभी भी अमीर जैसे आलीशान जिंदगी नहीं बिताई। उनकी बचपन बहुत आम और सरल जीवन था। सुंदर पिचाई बताते हैं की उनके घर में न तो टीवी था और ना ही फ्रिज और उनको कभी कभी जमीन पर भी सोना पड़ता था। 

सुंदर पिचाई की माँ एक स्टेनोग्राफर थी और सुंदर पिचाई को पढ़ने से काफी लगाव था। और साथ ही उनको क्रिकेट खेलने का बहुत ही बड़ा शौक था सुंदर पिचाई बताते हैं कि वह सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े फैन हैं और वे आगे चलकर एक क्रिकेटर के रूप में अपने आप को देखते थे बचपन में। 

एक बार जब स्कूल के प्रिंसिपल से यह पूछा गया की सुंदर पिचाई स्कूल में कैसे थे तो प्रिंसिपल ने इस बात को बताया कि सुंदर पिचाई एक बहुत ही शांत बच्चे थे और बहुत ही कम बोलते थे और कुछ लोगों को तो पता भी नहीं था कि सुंदर स्कूल में पढ़ते भी थे या नहीं। 

सुंदर पिचाई ने अपनी पढ़ाई जवाहर विद्यालय से की है और क्योंकि सुंदर पिचाई का एक छोटा सा घर था सभी लोगों को उस घर में बहुत ही सामंजस्य के साथ रहना पड़ता था। वह अपने भाई के साथ रहा करते थे और अक्सर अपने भाई के साथ जमीन पर सो जाया करते थे उनके पास ज्यादा पैसा नहीं हुआ करता था और जिस जगह पर सुंदर पिचाई रहते थे वहां पर बहुत सारे किराएदार भी रहा करते थे। सुंदर पिचाई  को काफी बार एंजायटी अटैक भी होते थे रात में और आज भी सुंदर पिचाई अपने पास एक पानी की बोतल लेकर सोते से हैं क्योंकि वह एकाएक रात में उठ जाते हैं एंजायटी अटैक के कारण। 

सुंदर पिचाई बहुत ही ज्यादा परेशान कभी-कभी हो जाते थे कि ना तो उनके घर में टीवी है ना तो फ्रीज परंतु जब सबसे पहली बार सुंदर पिचाई के घर में फोन आया तो उसे देखकर सुंदराजन बहुत ही आश्चर्य चकित रह गए और सोचने लगते थे कि कैसे यह फोन चला करते थे और कई बार सुंदर पिचाई बताते हैं कि वह उस फोन से बहुत समय तक खेला करते थे और कभी-कभी गलत नंबर भी डायल कर देते थे। यह बताते सुंदर पिचाई कि जब भी किसी नंबर को मिला देते तो वह नंबर उन्हें याद हो जाया करता था यह सुंदराजन पिचाई की अनोखी बात थी। 

सुंदर पिचाई से यह पूछा गया कि सुंदर पिचाई के कितने अंक आये थे बारवी कक्षा  में तब सुंदर पिचाई ने यह बताया था कि उनके इतने अंक थे कि उन्हें कोई कॉलेज एडमिशन नहीं देता यदि उन्होंने आई आई टी की  परीक्षा नहीं पास की होती। 

सुंदर पिचाई को यह पता चल गया था कि उन्हें तकनिकी में दिलचस्पी होती है और वे आगे चलकर ऐसी चीजों और यंत्रों के अंदर और खोज और पड़ताल करना चाहते हैं। तो उन्होंने यह सोच लिया था कि वह साइंस और टेक्नोलॉजी में ही अपना आगे कार्य करना चाहेंगे। सुंदर पिचाई ने बहुत ज्यादा कड़ी मेहनत करी और आई आई टी का एग्जाम को पास कर लिया।  सुंदर पिचाई को आई आई टी में दाखिला मिला और वहां पर उन्होंने मेटालर्जिकल डिपार्टमेंट में अपनी आगे की पढ़ाई शुरू कर दी। 

सुंदराजन यह भी बताते हैं कि उन्हें जब शॉक्ली के सेमीकंडक्टर की खोज के बारे में पता चला तो वह इस बात से काफी आश्चर्यचकित रह गए थे कि क्या कोई ऐसी भी चीज हो सकती है। इसी कारण से सुंदराजन को मेटालर्जी में इतना ज्यादा जिज्ञासा होने लग गई कि उन्हें आगे चलकर मेटालर्जी और सॉलि़ड स्टेट फिजिक्स के बारे में और पढ़ने का फैसला किया था। 

सुंदर पिचाई को फिर इसके बाद ऐसा लगा कि यदि उनको एक अच्छा करियर बनाना है तो अमेरिका ही जाना पड़ेगा।  इसके बाद उन्होंने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन को पूरा करने के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए। इसके बाद सुंदराजन ने स्टैनफोर्ड के लिए अपने आगे की पढ़ाई शुरू करने का फैसला कर लिया साथ में स्टैनफोर्ड में सुंदराजन को एक स्कॉलरशिप मिल गई थी जिसकी वजह से उन्हें घर वालों को मनाने में ज्यादा तकलीफ नहीं हुई। सुन्दर पिचाई जी के माता पिता ने कभी भी सुन्दर पिचाई की पढ़ाई के साथ समझौता नहीं किया और उनकी पढ़ाई में उन्होंने अपने सारे बचे हुए पैसों को लगा दिया थे। इसके बाद सुंदराजन एमबीए करते हैं वॉरटन यूनिवर्सिटी से। 

सुंदर पिचाई ने सबसे पहले अपनी जॉब एक प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर अप्लाइड मटेरियल के अंदर करी थी लेकिन उसके बाद उसी ने 2004 में शामिल हो गए। 

सुंदर पिचाई की जीवनी – दूसरा भाग

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