थॉमस अल्वा एडिसन की जीवनी – चौथा भाग

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

इसी के बाद से एडिसन ने बल्ब के ऊपर कार्य करना शुरू कर दिया था बल्ब के साथ एक और परेशानी थी कि उसे बहुत ही ज्यादा बिजली की आवश्यकता होती थी चलने के लिए और इसके कारण बिजली बहुत ही ज्यादा बर्बाद सी होती थी साथ में जब बल्ब जल्दी जाता था तो वह ज्यादा समय तक नहीं चल सकता था मुश्किल से 2 घंटा चलने के बाद उसको वापस से सही करना पड़ता था। 

एडिशन को यह समझ आ गया था कि यहां पर अब रजिस्टेंस की जरूरत है जिसके लिए उन्होंने कई प्रकार के धातु के साथ कार्य किया कि कौन सा वह धातु है जो बल्ब को लंबे समय तक चला सकता है और इस धातु की खोज करने के लिए उन्होंने 1000 अलग अलग तरीके के धातुओ का इस्तेमाल किया था।  परंतु कोई भी चल नहीं पाया था लेकिन आखिरी में जब एडिशन ने कार्बन फिलामेंट का इस्तेमाल किया था तब वह सफलतापूर्वक साडे 13 घंटे अपनी पहली बार में चल पाया था।  इसे देख कर लोग बिल्कुल ही दंग रह गए थे और इस आविष्कार को देखने लोग दूर-दूर से आते थे यह कार्य एडिशन अपनी कंपनी के सारे लोगों के कारण ही कर पाए थे जिन्होंने उस बल्ब को बनाने में पूरा सहयोग दिया था और साथ में और उनकी 1 साल की  मेहनत को सफलता मिली थी। 

 और 1 साल पहले तक थॉमस अल्वा एडीसन ने ग्रामोफोन का भी आविष्कार कर लिया था और जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा भी बुलाया गया था। जिस कारण से एडिसन रातों-रात प्रसिद्ध भी हो गए थे और अपने ग्रामोफोन के बाद एडिसन में जब अपना बल्ब का आविष्कार कर लिया तब तो दुनिया में बिल्कुल ही उनके नाम के चर्चे हो गई क्योंकि बल के कारण काफी सुरक्षित रूप से घर में रोशनी हो सकती थी। पहले घरों में गैस का इस्तमाल किया जाता था और वह भी बहुत ही खतरनाक होती थी यदि गैस गलती से लीक हो जाए तो वह पूरे घर में आग लगा सकती थी परंतु जब एडिशन ने इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल कर लिया और बल्ब को जलाने के लिए तब गैस पूरी तरीकों से घरों से हटने लग गई। बस अब एक ही चीज बज गई थी कि किस प्रकार से एडिशन अपने इलेक्ट्रिसिटी को लोगों के घर तक पहुंचा सके और जिसकी मदद से वह बल्ब जैसी आविष्कार को सभी के हाथों में दे सके और यह करना बिल्कुल भी आसान नहीं था क्योंकि एडिशन डायरेक्ट डायरेक्ट पर विश्वास करते थ, जिसे दूर दूर तक पहुंचाना बहुत ही मुश्किल कार्य हुआ करता था। इसी के दौरान निकोला टेस्ला आये जिन्होंने एडिसन के डायरेक्ट करंट को हटाकर अपने अल्टरनेटिंग करंट से बदल दिया। 

जब बल्ब का आविष्कार हुआ था तो इसका नजारा उठाने के लिए लोग दूर-दूर से आए थे और एडिसन ने भी इसके नजारे का लुफ्त उठाने के लिए एक महोत्सव लगाया था मेंलो पार्क के अंदर जिसमें उन्होंने बल को इस्तेमाल करके और उनके दूसरे प्रकार के बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करके एक ऐसा जगह बनाई जो बिल्कुल उस समय तो किसी जादू से कम नहीं लगती थी, इसलिए एडिशन को मेंलो पार्क का जादूगर के नाम से भी लोग जानते हैं क्योंकि जिस प्रकार के आविष्कार उस समय एडिशन ने लोगों को दिए थे वह किसी जादू से कम नहीं थे। 

अपने बल्ब के निर्माण के बाद एडिसन ने अपनी कंपनी में ज्यादातर समय लोगों को बिजली से चलने वाले आविष्कारों के बारे में खोज करने के लिए कहा था और साथ ही उन्होंने अपने ग्रामोफोन जो उन्होंने पहले आविष्कार किया था उसे भी सुधार के एक अच्छा ग्रामोफोन ले आए थे। इसी के दौरान एडिसन ने सबसे पहला मोशन पिक्चर कैमरा ले आए थे जिसकी मदद से वह चित्रों को एक पर्दे के ऊपर दिखा सकते थे। और फिर इसी कैमरे ने आगे चलकर एक नए फिल्मी जगत को निर्माण दिया है तो यदि आज हम जितनी भी फिल्मे देख पा रहे हैं और इन सभी के पीछे एडिशन का ही हाथ है उन्होंने सबसे पहले एक ऐसी फिल्म बनाई थी जिसे आप पर्दे पर भी देख सकते थे और इसे एक बार में कई लोग देख सकते थे जिससे थिएटर का निर्माण हो गया और धीरे-धीरे स्टेज के शो खत्म होने लग गए। 

यह इसी वक्त के दौरान था कि जब नई गाड़ी भी आना शुरू हो गई थी और हेनरी फोर्ड ने सबसे पहली अपनी कार बनाना शुरू करदी। एडिसन से उनके गाड़ी के लिए बैटरी बनाने की भी बात करी थी, जिसके कारण हेनरी फोर्ड की कार इलेक्ट्रिक कार में परिवर्तित हो गई थी। सब कुछ बिजली से चलने के सपने को देखने के लिए एडिसन ने हेनरी फोर्ड के गाड़ी के नए मॉडल के लिए इलेक्ट्रिक बैटरी की बहुत ही बड़ी रूप से निर्माण शुरू कर दिया था। यह बिल्कुल डायरेक्ट करंट पर चल पाती थी इसके कारण एडिशन का डायरेक्ट करंट बहुत ही ज्यादा प्रचलित होने लग गया था।  

थॉमस अल्वा एडिसन का अक्टूबर 18 1931 में डायबिटीज से अंत हो गया। तब वह 84 साल के थे एडिशन बहुत ही खुश रहने वाले इंसान थे। एक बहुत ही बहुत महान बिजनेसमैन भी थे जिन्होंने लोगों के लिए बहुत सारी चीजों का आविष्कार ही किया जब वे अपने आखिरी सांस ले भी रहे थे तब वह कहते थे यह दुनिया बहुत ही ज्यादा सुंदर है।

Leave a Comment