वज्रासन की विधि और लाभ इन हिंदी ( Vajrasana ke labh in hindi )

मेरा नाम रक्षा कुमारी है, मेरा जन्म बिहार के अरवल जिले में हुआ है। मेरी रुचि शुरुआत से ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में रही है।

अगर आपके पास सुबह सुबह मॉर्निंग पर जाने का वक्त नहीं है तो चिंता की कोई बात नहीं। आपका खाना बैठे-बैठे ही पच जाएगा और पेट भी कंट्रोल में रहेगा और ये  सब आसानी से चुटकी बजाकर ही ‘वज्रासन’ कर सकता है।

वज्र का अर्थ ही होता है कठोर होना। तभी तो इसका नाम वज्रासन है । इसे करने शरीर मजबूत और स्थिर बनता है। यही एक आसन है, जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इसके नियमित अभ्यास से आपके पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद मिलती है। आपकी जठराग्नि प्रदीप्त होती है, उदर वायु विकार दूर होते हैं। रीढ़ की हड्डी और कंधे सीधे होते हैं और शरीर में रक्त-संचार सही तरीके से होता है । यह पैर की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। साथ ही इसे करते रहने से गैस और कब्ज की समस्या भी नहीं होती है।

यह एक ध्यानात्मक आसन हैं। जो मन की चंचलता को दूर करता है। यह भोजन के बाद किया जानेवाला यह एक मात्र आसन हैं।

इसके करने से अपचन, अम्लपित्त, गैस, कब्ज से छुटकारा मिलता है। इस आसन को सबसे पहले 10 सेकेंड करें, फिर 20 सेकेंड तक बढ़ाएँ, ऐसे ही धीरे-धीरे समय बढ़ाने पर  कुछ दिन तक लगातार अभ्यास करने पर आप एक मिनट तक वज्रासन करने लगेंगे। भोजन के बाद 5 से 15 मिनट तक वज्रासन करने से भोजन का पाचन ठीक से हो जाता है। वैसे दैनिक योगाभ्यास मे 1-3 मिनट तक करना चाहिए। घुटनों की पीड़ा को दूर करता है। यह ध्यानात्मक आसन भी है। इसमें कुछ समय तक मनुष्य को अपनी सुविधानुसार बैठना चाहिए। वज्रासन का अर्थ है बलवान स्थिति । बेहतर पाचनशक्ति, वीर्यशक्ति तथा स्नायुशक्ति देनेवाला यह आसन वज्रासन कहलाता है ।

वज्रासन के अभ्यास से शरीर का बीच भाग सीधा रहता है । सांस की गति मन्द पडने से वायु बढती है । आँखों की रौशनी तेज होती है । वज्रनाडी अर्थात्  वीर्यधारा की नाड़ी मजबूत बनती है । वीर्य की ऊध्र्वगति होने से शरीर वज्र जैसा बनता जाता है । लम्बे  समय तक सरलता से  यह आसन कोई भी कर सकता हैं । इससे मन की चंचलता दूर होकर व्यक्ति  स्थिर बुद्धिवाला बनता है ।  शरीर में रक्त का अभिसरण ठीक से होकर शरीर निरोगी एवं सुन्दर बनता जाता है । भोजन के बाद इस आसन में बैठने से मनुष्य की पाचनशक्ति तेज होती है, भोजन जल्दी पच जाता है । पेट की वायु का नाश होता है । कब्ज दूर होकर पेट के सभी रोग नष्ट होते हैं । पाण्डुरोग से मुक्ति मिलती है । रीढ, कमर, जाँघ, घुटने और पैरों में मजबूती बढती है । कमर और पैर का वायु रोग भी दूर होता है । स्मरणशक्ति में तेजी से वृद्धि होती है । स्त्रियों के मासिक धर्म की अनियमितता जैसे रोग दूर होते हैं । शुक्रदोष, वीर्यदोष, घुटनों का दर्द आदि का नाश होता है । स्नायु आदि पुष्ट होते हैं । स्फूर्ति बढाने के लिए एवं मानसिक निराशा दूर करने के लिए यह आसन बहुत उपयोगी साबित होता है । ध्यान के लिए भी यह आसन बहुत उत्तम है । इसके अभ्यास से शारीरिक स्फूर्ति एवं मानसिक प्रसन्नता खुल कर बाहर आती है । रोजाना शक्ति का संचय होता है इसलिए शारीरिक बल में भरपूर वृद्धि होती है । काग का गिरना अर्थात् गले के टॉन्सिल्स, हड्डियों के पोल आदि स्थानों में उत्पन्न होनेवाले श्वेत रक्त कण की संख्या में वृद्धि होने से शरीर में आरोग्य का साम्राज्य स्थापित होता है । फिर व्यक्ति बुखार से सिरदर्द से, कब्ज से, मंदाग्नि या अजीर्ण जैसे छोटे-मोटे किसी भी रोग से ज्यादा दिन पीड़ित नहीं रहता, क्योंकि रोग आरोग्य के साम्राज्य में प्रविष्ट होने का कभी साहस ही नहीं कर पाते ।

 

वज्रासन करने के निम्न फायदे

  1. वज्रासन के नियमित अभ्यास से पेट की पाचन क्रिया ठीक होती है और कब्ज़ को भी दूर करने में मदद मिलती है।
  2. बेहतर पाचन तंत्र से अल्सर और एसिडि​टी जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी मदद मिलती है।
  3. ये आसन मेडि​टेशन करने या ध्यान करने के लिए भी बेस्ट माना जाता है।
  4. वज्रासन के अभ्यास से पीठ और रीढ़ की हड्डीयां भी मजबूत होती है और कमर दर्द के साथ ही साइटिका के मरीजों को भी काफी राहत मिलती है।
  5. ये आसन शरीर में पेल्विक मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है।

 

वज्रासन करने का सटीक तरीके

वैसे तो डॉक्टरों और योग गुरुओं द्वारा हर योग को खाली पेट ही करने की ही सलाह दी जाती है, लेकिन वज्रासन इसका अपवाद है। वज्रासन को हमेशा भोजन करने के बाद ही करने की सलाह दी जाती रही है। अगर भोजन करने के बाद वज्रासन का अभ्यास किया जाए तो ये पेट और पाचनतंत्र से जुड़ी हर बीमारी को धीरे-धीरे ठीक करता है।

वज्रासन करने की विधियां

  1. पैरों को मोड़कर सही से घुटनों के बल बैठ जाएं। फिर अपने पैरों के पंजों को पीछे की तरफ खींचें। उन्हें साथ बनाए रखें और पैर के अंगूठों को एक-दूसरे पर क्रॉस कर लें।
  2. धीरे-धीरे अपने शरीर को इस प्रकार नीचे ले जाएं कि आपके हिप्स, आपकी एड़ियों पर जाकर टिक जाएं। जबकि आपकी जांघें आपके काफ मसल्स पर टिकी रही चाहिए।
  3. अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें, और सिर को एकदम सीधा रखें और आपकी दृष्टि एकदम सामने की ओर रहनी चाहिए।
  4. अपना ध्यान सांसों की गति पर केंद्रित करें। इस बात का पूरा ध्यान रखें कि आप सांस कैसे ले रहे हैं। सांस आने और जाने पर बराबर ध्यान बनाए रखें।
  5. अपनी आंखो को बंद करके अपनी सांस की गति पर ध्यान दें। धीरे-धीरे अपने दिमाग को अन्य सभी बातों से हटाकर सिर्फ सांस आने और जाने पर केंद्रित करने की कोशिश करते रहें।
  6. इस आसन का अभ्यास शुरुआत में कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 10 मिनट तक आप कर सकते हैं। अभ्यस्त हो जाने पर इसे 30 मिनट तक आसानी बढ़ा सकते हैं।

 

ध्यान रखने योग्य कुछ बातें

जिन लोगों को जोड़ों में दर्द हो या गठिया की दिक्कत हो वे इस आसन को करने की कोशिश न करें। जिनके घुटने कमज़ोर हों, जिन्हें गठिया हो या फिर जिनके शरीर की हड्डियां कमज़ोर हों, वे लोग वज्रासन न करें।

दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। पीछे की ओर कभी ज़्यादा न झुकें। शरीर को सीधा रखें ताकि संतुलन बना रहे।

हाथों और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें और कुछ देर के लिए अपनी आँखो को बंद कर लें।

अपना ध्यान साँस की तरफ़ बनाए रखें। धीरे-धीरे आपका मन भी शांत हो जाएगा।

इस आसन में पाँच मिनट तक बैठना चाहिए, ख़ासकर भोजन के बाद।

नया-नया अभ्यास करने वालों के घुटनों, जंघों और टखनों में खिंचाव आएगा,  वो इस आसन को करने से घबराएँगे। लेकिन धीरे-धीरे कुछ समय बाद ऐसे लोग भी आसानी से वज्रासन करने लगते हैं।

वज्रासान में अगर पैरों या घुटनों में अधिक खिंचाव और तनाव हो रहा हो तो दोनों पैरों को सामने की ओर फैलाकर बैठें और पैरों को बारी-बारी से घुटने से ऊपर नीचे हिलाते रहें।

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