vigyan ke hani aur labh ( विज्ञापन के लाभ और हानि पर निबंध )

“सावधानीपूर्वक और क्रमबद्ध तरीके से किए गए प्रकृति में उपस्थित विभिन्न वस्तुओं की प्रकृति और उनके व्यवहार जैसे गुण इत्यादि का अध्ययन करने को ही विज्ञान कहते है।”

सर्वप्रथम विज्ञान से प्राप्त चीजों को अगर तरीके से इस्तमाल किया जाए तो इसका कोई नुकसान नही है,लेकिन इसके गलत उपयोग से इसके नुकसान भी हैं।

विज्ञान का एक पक्ष वरदान है तो वहीं दूसरा पक्ष अभिशाप भी है।

विज्ञान का अर्थ ही है विशेष ज्ञान।”

 मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार जो भी नए-नए वस्तुओं का आविष्कार किया है, वो सब विज्ञान का ही देन हैं। आज का युग विज्ञान का युग है। विज्ञान के अनगिनत आविष्कारों के कारण मनुष्य का जीवन पहले से बहुत अधिक आरामदायक हो गया है।

 

विज्ञान के गुण और दोष

सर्वप्रथम विज्ञान एक वरदान के रूप में

दैनिक जीवन मे विज्ञान का महत्वपूर्ण भूमिका है जिसे दरकिनार नही किया जा सकता है। वर्तमान युग विज्ञान का युग है, व्यक्ति कम-से-कम मेहनत में सुख पाना चाहता है। विज्ञान ने हमारे जीवन में अलग-अलग बदलाव किए हैं। सर्वप्रथम विज्ञान ने दैनिक जीवन को बहुत आरामदायक बनाया है। दैनिक जीवन में काम आने वाले उपकरण जैसे मिक्सर-ग्राइंडर, वाशिंग मशीन, बिजली, रेडियो ,कंप्यूटर, फ्रिज, एयर कंडीशनर, कूलर, एलपीजी कनेक्शन, परिवहन के साधन, मोबाइल फोन, इंटरनेट आदि जीवन को कितना अधिक सुलभ बना दिया है। मोबाइल, इंटरनेट, ईमेल्स, मोबाइल पर 4जी-5जी और इंटरनेट के माध्यम से फेसबुक, ट्‍विटर ने तो वाकई मनुष्य की जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर ही रख दिया है। जितनी जल्दी वह सोच सकता है लगभग उतनी ही देर में जिस व्यक्ति तक चाहे अपनी बात पहुंचा सकता है, उससे बातें कर सकता है। चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न स्थित हो।

विज्ञान की मदद से अब लंबी दूरी तय करना आसान हो गया है। यातायात के विभिन्न प्रकार के साधनों से आज यात्रा करना कितना अधिक सुविधाजनक हो गया है। इसके अलावा, यात्रा का समय भी कम हो जाता है। विभिन्न तीव्र-गति वाहन इन दिनों उपलब्ध हैं। ये वाहन पूरी तरह से हमारे समाज की रुपरेखा को बदल चुके हैं। महीनों की यात्रा दिनों में और दिनों की यात्रा चंद घंटों में पूरी हो जाती है। इतने द्रुतगति की रेलगाड़ियां, हवाई जहाज यातायात के रूप में काम में लाए जा रहे हैं। दिन-पर-दिन इनकी गति और उपलब्धता में और अधिक सुधार ही किया जा रहा है। विज्ञान ने भाप इंजन को विद्युत इंजन में परिवर्तित किया है। विज्ञान हमारे जीवन के लिए एक वरदान स्वरूप है ।

चिकित्सा के क्षेत्र में भी विज्ञान ने अच्छा- खासा कमाल किया है। आज कई असाध्य बीमारियों का इलाज मामूली सी छोटी गोलियों से हो जाता है। कैंसर और एड्‍स जैसे बीमारियों के लिए डॉक्टर्स और चिकित्सा विशेषज्ञ के लोग लगातार प्रयासरत हैं। नई-नई कोशिकाओं के निर्माण में भी सफलता प्राप्त कर ली गई है। इंजीनियरिग आदि क्षेत्रों में भी विज्ञान ने बहुत उन्नति की है। विज्ञान के कारण आज मनुष्य बहुत अधिक सभ्य बन गया है। सारे काम बिजली के द्वारा ही होते है। बिजली को अपने जीवन से अलग नही किया जा सकता। विज्ञान की सहायता से ही समाचार–पत्र, पत्रिकाओं, किताबों आदि की छपाई होती है।

खेतो में अनाज की उपज बढ़ाने के लिए ट्रेक्टर बनाये गये है। वस्त्र आदि की जरूरत पूरी करने के लिए तरह-तरह की मशीने बन चुकी हैं। विज्ञान की मदद से कम समय में अधिक चीजे बनाई जा सकती है। देश

की रक्षा के लिए विज्ञान की मदद से मनुष्य ने अनेकों मिसाइल और हथियार तैयार किए हैं। इस तरह विज्ञान हमारे जीवन का एक अलग नही हो पाने वाला हिस्सा-सा बन गया है। हम इसके बिना कुछ नही कर सकते हैं। विज्ञान ने हमारे रोजाना के कामों को भी आसान कर दिया है।

विज्ञान ने ही आज इंसान उपस्थिति अंतरिक्ष में दर्ज कराई है। अनेकों तरह के मानवजनित मानवरहित यान दिन-रात अंतरिक्ष में चक्कर काट रहे हैं। अंतरिक्ष में दूसरी जीवंत दुनिया की खोज लगातार जारी है।

जिस प्रकार हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी प्रकार विज्ञान के भी दो पहलू हैं। पहला सकारात्मक पहलू जो हमने आपको ऊपर बताया है, अब आइए हम विज्ञान के नकारात्मक पहलुओं को देखते हैं।

 

विज्ञान एक अभिशाप के रूप में

आज विज्ञान ने युद्ध कला को एक नई मुसीबत बना दिया है। कोई भी देश दुनिया के किसी भी देश को सेकंड भर में तबाह कर सकता है। ध्वनि, जल , वायु प्रदूषण,ओजोन लेयर में छेद आदि का जन्मदाता भी  विज्ञान ही है। विज्ञान ने मानव को धर्म-विमुख तथा नास्तिक भी बना दिया है। इंसानी कोमल भावनांए लुप्त हो गई हैं तथा वे बुद्धवादी, भौतिकवादी तथा जड़वत यंत्रवत बन गए हैं।

इसलिए रामधारी सिंह दिनकर ने कहा था-

‘विज्ञान यान पर चढ़ी आज सभ्यता डूबने जाती है।’

इन सारे वर्णनो से आधुनिक विज्ञान और तकनीक की प्रगति और विकास, उसमें अदभुत अविश्वसनीय से लगने वाले चमत्कार तो उभरकर सामने आ ही जाता है और विज्ञान के करिश्में हमे अच्छे लगने लगते हैं। लेकिन साथ ही मानवता पर विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति के माथे पर तनाव की रेखाांए भी उभर आती हैं। वास्तव में विज्ञान अपने में निर्माण तथा सृजन के साथ कई प्रकार के विनाश एंव विध्वंस की कई शक्तियों को समेटे हुए हैं। अब यह उसके प्रयोगकर्ता पर निर्भर है कि वह उसकी शक्तियों का प्रयोग निर्माण के लिए करता है अथवा विनाश के लिए। विज्ञान तो विष्णु की भांति सबका पालनहारी है, पर इसका दुरुपयोग करने पर शिव के समान संहारक बन सकता है। अत: इसकी शक्तियों का प्रयोग इंसानों को सोच समझकर ही करना होगा क्योंकि अंकुश के अभाव में यह विनाशकारी बन जाता है।

 

किसीने यथार्थ ही कहा है-

“भलाबुरा न कोई रूप से कहलाता है, दृष्टि-भेद स्वंय दोष-गुण दिखलाता है। कोई कमल की कली देखता है कीचड़ में किसी को चांद में भी दाग नजर आता है।” 

एक ओर परमाणु ऊर्जा जहां बिजली उत्पन्न करने के काम में लाई जा सकती है। वहीं इससे बनने वाले परमाणु बम वाले हथियार मानव के लिए अत्यंत विनाशकारी हैं। जापान का हिरोशिमा नागासाकी तो याद ही होगा आप सबको। हाल ही में फिर से आए जापान में भूकंप के बाद वहां के परमाणु रिएक्टर्स को क्षति बहुत बड़ी त्रासदी रही। अत: मनुष्य को अपनी आवश्यकता और सुविधानुसार मानवता की भलाई के लिए इनका लाभ उठाना चाहिए न कि दुरुपयोग कर इनके अविष्कारों का गलत फायदा उठाना चाहिए।

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